वो प्रधानमंत्री जिसकी कुर्सी चंद कागज खा गए
बुरे दौर में 'आइसलैंड सबसे पहले' जैसे नारे लगाकर सत्ता में आए थे, आज देश के सबसे बड़े विलेन हैं.
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आइसलैंड के प्रधानमंत्री सिग्मंडर डेविड गुन्लौग्सन ने इस्तीफा दे दिया है. पनामा पेपर्स लीक होने के बाद उन पर इस्तीफे का बहुत प्रेशर था. उनकी बीवी ने 9 साल पहले एक विदेशी कंपनी बनाई थी. जिसमें अब तक में करोड़ों का गैरकानूनी इंवेस्टमेंट किया गया.
पत्नी के साथ सिग्मंडर डेविड गुन्लौग्सन Source-Iceland Monitor
अब जब बात खुली तो उनके खिलाफ प्रोटेस्ट होने लगे. सोमवार को लोग संसद के सामने उनका इस्तीफा मांगने पहुंच गए. विपक्ष ने विश्वास प्रस्ताव लाने की बात कही. बात बढ़ी. सिग्मंडर को पता था वो टिक न पाएंगे. प्रेसिडेंट से संसद भंग करने को कहा, और आखिरकार खुद ही मंगलवार को इस्तीफा दे दिया.
लोग सिग्मंडर पर भड़के हैं, इसकी वजह भी है. 2008 में आइसलैंड ने पैसों के मामले में दुर्दिन देखे हैं. उस वक़्त सिग्मंडर ही थे जो “In Defence Of Iceland” मूवमेंट में आगे-आगे कूदते. तब वो खुद को एक ऐसे आदमी के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे थे जो उन तमाम गिद्धों के खिलाफ है. जो आइसलैंड के पैसों पर नजर गड़ाए बैठे हैं.
https://twitter.com/HjorturJohann/status/717044736717094914
उस वक़्त ये आइसलैंड सबसे पहले सरीखे जुमले उछालते. अक्सर ये कहते पाए जाते कि देश का रुपया देश में रहना चाहिए. आइसलैंड में रुपए को क्रोना कहते हैं. लेकिन अब हाल ऐसा हो गया था कि रुपए-पैसे का नाम लो तो इंटरव्यू छोड़ कर चले जाते थे.
https://youtu.be/zTDYQtoPAfQ?t=11
पिछले महीने की बात है. सिग्मंडर डेविड एक स्वीडिश टीवी चैनल को इंटरव्यू दे रहे थे. बातें चल रही थीं कैसे आइसलैंड आर्थिक मंदी के बाद संभल रहा है. इंटरव्यू लाइव था. सिग्मंडर ने कहा हर किसी को चाहिए वो अपने कमाए से एक हिस्सा समाज को दे, ऐसा न करना समाज से धोखा है.
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इंटरव्यू करने वाले ने पूछ दिया. और आपका क्या? आपका भी किसी विदेशी कंपनी में पैसा होने की बात चल रही है. सिग्मंडर भड़क गए. कहा जतवा नहीं उड़ रहा तुम पिसान उड़ा रहे हो, जहां कुछ संदिग्ध नहीं है वहां संदिग्ध तलाश रहे हो, मेरे सारे हिसाब-किताब क्लियर हैं. बाहर गए तो बीवी के साथ पब्लिकली कहे कि मीडिया वाले उनकी जिंदगी में धंस रहे हैं.
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अब उसी फेर में पड़े हैं, पनामा पेपर आने के बाद. पता चल रहा है आज से नहीं सालों से गड़बड़ी चल रही थी, 2009 में जब संसद पहुंचे थे तब भी उस आधे पैसे के बारे में नहीं बताया था जो इनकी बीवी के जरिए विदेशी कंपनी विंट्रिस में लगाया था. और अंत में जिसके कारण कुर्सी ही गंवानी पड़ी.
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पत्नी के साथ सिग्मंडर डेविड गुन्लौग्सन Source-Iceland Monitor
अब जब बात खुली तो उनके खिलाफ प्रोटेस्ट होने लगे. सोमवार को लोग संसद के सामने उनका इस्तीफा मांगने पहुंच गए. विपक्ष ने विश्वास प्रस्ताव लाने की बात कही. बात बढ़ी. सिग्मंडर को पता था वो टिक न पाएंगे. प्रेसिडेंट से संसद भंग करने को कहा, और आखिरकार खुद ही मंगलवार को इस्तीफा दे दिया.
लोग सिग्मंडर पर भड़के हैं, इसकी वजह भी है. 2008 में आइसलैंड ने पैसों के मामले में दुर्दिन देखे हैं. उस वक़्त सिग्मंडर ही थे जो “In Defence Of Iceland” मूवमेंट में आगे-आगे कूदते. तब वो खुद को एक ऐसे आदमी के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे थे जो उन तमाम गिद्धों के खिलाफ है. जो आइसलैंड के पैसों पर नजर गड़ाए बैठे हैं.
https://twitter.com/HjorturJohann/status/717044736717094914
उस वक़्त ये आइसलैंड सबसे पहले सरीखे जुमले उछालते. अक्सर ये कहते पाए जाते कि देश का रुपया देश में रहना चाहिए. आइसलैंड में रुपए को क्रोना कहते हैं. लेकिन अब हाल ऐसा हो गया था कि रुपए-पैसे का नाम लो तो इंटरव्यू छोड़ कर चले जाते थे.
https://youtu.be/zTDYQtoPAfQ?t=11
पिछले महीने की बात है. सिग्मंडर डेविड एक स्वीडिश टीवी चैनल को इंटरव्यू दे रहे थे. बातें चल रही थीं कैसे आइसलैंड आर्थिक मंदी के बाद संभल रहा है. इंटरव्यू लाइव था. सिग्मंडर ने कहा हर किसी को चाहिए वो अपने कमाए से एक हिस्सा समाज को दे, ऐसा न करना समाज से धोखा है.
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इंटरव्यू करने वाले ने पूछ दिया. और आपका क्या? आपका भी किसी विदेशी कंपनी में पैसा होने की बात चल रही है. सिग्मंडर भड़क गए. कहा जतवा नहीं उड़ रहा तुम पिसान उड़ा रहे हो, जहां कुछ संदिग्ध नहीं है वहां संदिग्ध तलाश रहे हो, मेरे सारे हिसाब-किताब क्लियर हैं. बाहर गए तो बीवी के साथ पब्लिकली कहे कि मीडिया वाले उनकी जिंदगी में धंस रहे हैं.
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अब उसी फेर में पड़े हैं, पनामा पेपर आने के बाद. पता चल रहा है आज से नहीं सालों से गड़बड़ी चल रही थी, 2009 में जब संसद पहुंचे थे तब भी उस आधे पैसे के बारे में नहीं बताया था जो इनकी बीवी के जरिए विदेशी कंपनी विंट्रिस में लगाया था. और अंत में जिसके कारण कुर्सी ही गंवानी पड़ी.
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