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आई ऐम टेररिस्ट्स वाइफ, बट आई ऐम नॉट टेररिस्ट

ISIS चीफ बगदादी है न. उसकी वाइफ, जिससे तलाक हो चुका है. इसे भी चाहिए आजादी. जेल से छूटने के बाद भी. ये उस नर्क में नहीं रहना चाहती.

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आशुतोष चचा
1 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 1 अप्रैल 2016, 11:00 AM IST)
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बगदादी की एक्स वाइफ अपने खूंखार शौहर के साये से दूर सुकून से रहना चाहती है. उसने कहा है कि मैं यूरोप में रहना चाहती हूं, अरब में नहीं, मैं आज़ाद जिंदगी जीना चाहती हूं. सजा-अल-दुलायमी ISIS चीफ बगदादी की एक्स वाइफ है. दोनों की एक बेटी भी है. दुलायमी को कई महीने पहले जेल से रिहा कर दिया गया था. उस पर एक्सट्रीमिस्ट ऑर्गनाइजेशन्स से लिंक होने का शक था. वो अपने बच्चों के साथ 2014 से लेबनान की एक जेल में बंद थी.
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“मेरा निकाह 2008 में बगदादी से हुआ था. अब मेरा उससे तलाक हो चुका है. मेरी क्या गलती है?” उसकी और बगदादी की बेटी हगर सात साल की है. हगर यूरोप जाकर पढ़ना चाहती है. बगदादी से पहले दुलायमा की शादी सद्दाम हुसैन के एक पर्सनल गार्ड से हुई थी. इन दोनों के जुड़वा बच्चे हैं. अपने पहले शौहर की मौत के बाद अपने पिता के सलाह से उसने बगदादी से निकाह कर लिया.
दुलायमा ने बताया कि बगदादी एक “नॉर्मल आदमी” था. वो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर था. उसके बच्चे थे. ये तो रहस्य है कि वो इतने खूंखार आतंकी संगठन का लीडर कैसे बन सकता है! उसने बताया कि बगदादी से उसकी आखिरी बार 2009 में बात हुई थी. उसने उससे वापस आने के लिये पूछा था पर उसने मना कर दिया.

रूस, अमेरिका और यूरोप में भी फैमिलीज़ बनती हैं निशाना

दुलायमा पहली नहीं हैं जो अपने आतंकवादी पति की वजह से परेशान है. सिक्योरिटी एजेंसीज़ अक्सर आतंकवादियों को पकड़ने के लिये उनके परिवार को टॉर्चर करतीं हैं. हाल में अमेरिका के रिपब्लिकन प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट, डॉनल्ड ट्रम्प ने कहा था कि आतंकवादियों के खात्मे के लिये उनके परिवार को भी खत्म करना पड़ेगा. बाद में बवाल मचने पर उन्होंने अपने बयान पर सफाई दे दी.
पिछले हफ्ते हुए ब्रसेल्स धमाके में दो हमलावर इब्राहीम और खालिद भाई थे. इसके बाद से आतंकियों के परिवार वालों पर और शक किया जाने लगा है.
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खालिद और इब्राहीम

रूस में भी आतंकवादियों को पकड़ने या दबाने के लिये एजेंसीज़ का यही तिकड़म है. परिवार को टॉर्चर करना. रूस के चेचन्या में अक्सर आतंकियों के रिश्तेदारों को अरेस्ट और टॉर्चर किया जाता है. कभी-कभी इन्हें मार भी दिया जाता है.
हालांकि, वो कहते हैं कि आतंकियों के फैमिली वालों का रिकॉर्ड भी खराब ही है. आतंकवादी करतूतों में इनका भी हाथ होता है. इसलिये आतंकवादियों तक पहुंचने का रास्ता इनका परिवार ही है. चेचन्या के बारे में इनकी सफाई है कि ऐसी वारदात को अंजाम देने के लिए फैमिली वाले हेल्प करते हैं. जैसे 2004 में दो बहनों ने एक प्लेन को उड़ा लिया था. 2011 में भी एक टीनेजर ने अपनी बहन के साथ बम बनाया था जिसे बाद में उसके भाई ने दोमोदेवो एयरपोर्ट पर एक्सप्लोड कर दिया. इसमें उसके साथ 36 और लोग मारे गये थे.

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