'अपनों के शव भी नहीं मिलते', LOC पर पड़ने वाले गांव के लोग सरकार से क्या मांग रहे?
नदी में डूबे लोगों केे शवों को घर भेजने का कोई इंतजाम न होने के कारण, Kargil के लोग Hundurman में एक एक्सचेंज पॉइंट खोलने की मांग कर रहे हैं.

भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा को लेकर विवाद है. पाकिस्तान भारत के कई इलाकों पर कब्जा कर के बैठा है. इन्हीं इलाकों में से एक है कारगिल सेक्टर में पड़ने वाला हुंडुरमान (Hundurman Village) गांव. ये गांव नियंत्रण रेखा (Line Of Control) पर पड़ता है. कई जगहों की तरह यहां भी फेंसिंग नहीं है. LoC निर्धारित करने के लिए यहां कुदरती नदियां और नाले का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन हुंडुरमान से बहने वाली नदी की वजह से लोग एक मांग कर रहे. मांग अपनों के शवों की.
दरअसल, यहां से बहने वाली शिंगो (Shingo River) नदी कईयों की जान ले चुकी है. यहां के कई लोग नदी की धारा में बह गए लेकिन उनके शव भी नहीं मिले. LoC होने की वजह से शवों की तलाश भी मुश्किल काम है. यही वजह है कि यहां के लोग नदी की वजह से जान गंवा चुके अपने लोगों के शवों को हासिल करने के लिए एक ‘एक्सचेंज पॉइंट’ की मांग कर रहे हैं.
दो मुल्कों के बीच कसकती कहानियां20 मार्च को अपने छठे जन्मदिन के ठीक एक दिन बाद जुल्करनैन अली और उसके चचेरे भाई अली अकबर (6) हुंडुरमान में खेलने के लिए बाहर निकले. खेलते-खेलते दोनों बच्चे शिंगो नदी के तेज बहाव वाले पानी में फिसल गए. अकबर का शव एक दिन बाद हुंडुरमान में नदी से निकाल लिया गया, लेकिन जुल्करनैन का कोई पता नहीं चला. फिर सीमा पार से आए एक वाट्सऐप कॉल से परिवार को पता चला कि जुल्करनैन का शव मिल गया है और उसे LoC के उस पार बाल्टिस्तान के गंगानी गांव में दफना भी दिया गया है. बच्चों के पिता मोहम्मद हुसैन ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,
जुल्करनैन कभी भी नदी की तरफ नहीं जाता था. वहां तीन बच्चे थे जुल्करनैन. मेरी बहन का बेटा. एक और लड़का जो उनसे थोड़ा बड़ा था. बड़ा लड़का तो बच गया, लेकिन ये दोनों डूब गए.
हालांकि, कारगिल में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है. यहां के निवासी और 'अल महदी स्काउट्स' चलाने वाले जावेद कहते हैं कि कम से कम 10 से 12 ऐसे मामले हैं जहां शव नहीं मिल पाए. जावेद शिंगो और सुरू नदियों में शवों को खोजने में मदद करते हैं. वो बताते हैं कि नदी के तेज बहाव में बहकर शव पाकिस्तान चले जाते हैं. ये नदियां बहुत तेज बहती हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में. जावेद बताते हैं,
LoC के उस तरफ रिश्तेदार भीमुझे पिछले एक साल की कई घटनाएं निजी तौर पर याद हैं. एक बार एक कार दुर्घटना हुई थी, जिसमें पांच लोग डूब गए थे. हम सिर्फ दो शव ही निकाल पाए. जबकि तीन शव बहकर सीमा पार चले गए. अक्सर सोशल मीडिया के जरिए ही हमें पता चलता है कि शव वहां मिल गए हैं.
शिंगो नदी द्रास से कारगिल की तरफ बहती है और सुरू नदी जांस्कर से नीचे उतरकर कारगिल की तरफ आती है. ये दोनों नदियां हुंडुरमान के पास आकर मिलती हैं, जिससे इनका बहाव तथा रफ्तार और भी तेज हो जाती है. 2011 की जनगणना के अनुसार हुंडुरमान की आबादी 200 से कुछ ही ज्यादा है. सीमा के उस पार गंगानी नाम का छोटा सा गांव है. 1971 से पहले हुंडुरमान और गंगानी पाकिस्तान के कब्जे में आने वाले एक ही गांव का हिस्सा थे. 1971 में भारत ने हुंडुरमान पर वापस से कब्जा किया. इन दोनों गांवों में रहने वाले लोग आपस में रिश्तेदार भी हैं.
शवों को वापस पाने के लिए जद्दोजहदनदी में डूबे लोगों केे शवों को घर भेजने का कोई इंतजाम न होने के कारण कारगिल के लोग हुंडुरमान में एक ‘एक्सचेंज पॉइंट’ खोलने की मांग कर रहे हैं. कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस का हिस्सा रहे एक्टिविस्ट सज्जाद हुसैन कहते हैं कि 70 साल से भी ज्यादा समय से लद्दाख और बाल्टिस्तान के बीच बंटे परिवार एक-दूसरे से मिल नहीं पा रहे हैं. यह अलगाव जिंदगी के बाद भी जारी रहता है. जिन लोगों के शव किसी दुर्घटना के कारण नदी में बहकर दूसरी तरफ चले जाते हैं, उन्हें अक्सर उनकी अपनी जमीन पर कभी वापस नहीं लाया जाता. उन्होंने आगे कहा,
हम विदेश मंत्री और उनके पाकिस्तानी समकक्ष को इस मामले में दखल देने की गुजारिश करते हैं. इन शवों को सम्मान के साथ उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए एक तय एक्सचेंज पॉइंट बनाया जाना चाहिए.
जुल्करनैन का शव नदी में 40 दिन बाद मिला. उनके पिता का कहना है कि परिवार ने अपने बच्चे को बाल्टिस्तान में ही दफनाने की मंजूरी दे दी थी. वो कहते हैं कि 40 दिन बीत ही गए थे. उस पार के लोगों ने बताया कि उसे वहीं दफना देना बेहतर होगा इसलिए वो मान गए.
उन्होंने बच्चे की पहचान के लिए उसकी फोटो भेज दी थी. इसके बाद उधर से बताया गया कि उन्हें शव मिल गया है और उन्होंने उसे दफना दिया है. हालांकि बच्चे के अंतिम संस्कार की कोई तस्वीर नहीं आई है. जुल्करनैन के पिता तस्वीरों का इंतजार कर रहे हैं.
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