खाल जलाकर खून में घुल जाए, इजरायल ने लेबनान पर ऐसा 'फॉस्फोरस बम' गिराया!
सफेद फॉस्फोरस फॉस्फेट पत्थरों से बनाया गया एक कृत्रिम पदार्थ है. यह काफी ज्वलनशील होता है. वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन के संपर्क में आने से यह जल उठता है. ऑक्सीजन के संपर्क में आकर यह करीब 815 डिग्री सेल्सियस तक का ताप (गर्मी) पैदा कर सकता है. ज्वलनशील हथियार की तरह इस्तेमाल करने पर यह तेज गर्मी और आग पैदा करता है. आम लोगों पर इसका इस्तेमाल प्रतिबंधित है.

इजरायल ने ईरान के साथ-साथ लेबनान पर भी हमले तेज कर दिए हैं. इसी बीच मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने दावा किया है कि इजरायल ने साउथ लेबनान के रिहाईशी इलाकों में हमले के दौरान सफेद फॉस्फोरस से बने बमों का इस्तेमाल किया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ह्यूमन राइट्स वॉच ने बताया कि इजरायली सेना ने 3 मार्च 2026 को गैरकानूनी तरीके से साउथ लेबनान के योमोर शहर में घरों के ऊपर तोपखाने से सफेद फॉस्फोरस से बने गोला-बारूद दागे.
मानवाधिकार संस्था ने 7 तस्वीरों को वेरिफाई करने और उनके लोकेशन की पुष्टि करने के बाद बताया कि शहर के एक रिहाईशी इलाके में सफेद फॉस्फोरस से बने विस्फोटक गिराए जा रहे हैं और सुरक्षाकर्मी उस क्षेत्र में कम से कम दो घरों और एक कार में लगी आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटे हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच के लेबनान रिसर्चर रामजी कैस ने बताया,
“इजरायली सेना की ओर से रिहाईशी इलाकों में सफेद फॉस्फोरस का गैरकानूनी इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है. नागरिकों के ऊपर इसके बेहद गंभीर परिणाम होंगे. सफेद फॉस्फोरस के प्रभाव से मौत हो सकती है या फिर गंभीर चोटें आ सकती हैं, जिसका असर पूरे जीवन भर रह सकता है.”
मानवाधिकार संगठन ने बताया कि साउथ लेबनान के योहमोर कस्बे में एक रिहाईशी इलाके के ऊपर कम से कम दो तोप से दागे गए सफेद फॉस्फोरस के गोले हवा में फटते हुए दिखाई दिए हैं.
संगठन की ओर से बताया गया कि तस्वीर में दिखाई देने वाले धुएं का पैटर्न M825-सीरीज के 155 MM तोपखाने के गोले के फटने से बनने वाले उंगली के जोड़ (Knuckle) के शेप से मिलता जुलता है. ये तोपखाना सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल के लिए जाना जाता है.
इससे पहले साल 2023 में ह्यूमन राइट्स वॉच ने इजरायल पर गाजा और लेबनान में सैन्य अभियान के दौरान सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल का आरोप लगाया था. तब इजरायली सिक्योरिटी फोर्सेज ने इन आरोपों का खंडन किया था.
सफेद फॉस्फोरस क्या होता है?
सफेद फॉस्फोरस फॉस्फेट पत्थरों से बनाया गया एक कृत्रिम पदार्थ है. यह काफी ज्वलनशील होता है. वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन के संपर्क में आने से यह जल उठता है. ऑक्सीजन के संपर्क में आकर यह करीब 815 डिग्री सेल्सियस तक का ताप (गर्मी) पैदा कर सकता है. ज्वलनशील हथियार की तरह इस्तेमाल करने पर यह तेज गर्मी और आग पैदा करता है. फॉस्फोरस तब तक जलता रहता है जब तक यह खत्म न हो जाए. इसके लिए इसे बस ऑक्सीजन की जरूरत होती है.
स्किन से होते हुए यह खून के फ्लो में मिलकर अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. ऑर्गन फेलियर की स्थिति भी आ सकती है. पीड़ित विकलांग भी हो सकता है. अगर सफेद फॉस्फोरस का कोई भी अंश बचा रह जाए तो पट्टी हटाने के बाद भी हवा के संपर्क में आकर ये फिर से सुलग सकता है. फॉस्फोरस बमों की आग पानी से नहीं बुझती. इसके लिए रेत छिड़कने जैसे तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं.
क्या यह प्रतिबंधित है?
सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल ओट के लिए धुआं बनाने, रोशनी करने, लक्ष्य की निशानदेही या बंकरों और इमारतों को जलाने के लिए किया जाता है लेकिन इसे आम लोगों पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. संयुक्त राष्ट्र के ‘दी कन्वेंशन ऑन सर्टन कन्वेंशनल वेपन्स’ (CCW) में खास तरह के हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है. कई युद्ध सामग्रियां ऐसी हैं जिनका सैन्य उद्देश्यों के लिए सीमित इस्तेमाल हो सकता है. इन्हें आम लोगों पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
CCW प्रोटोकॉल्स की तीसरी श्रेणी आग लगाने वाले (इन्सेंडियरी) हथियारों से जुड़ी है. इसका मतलब ऐसे हथियारों से हैं जो उत्तेजक होते हैं. सफेद फॉस्फोरस इसी श्रेणी में आता है. नागरिकों के बीच स्थित सैन्य ठिकानों पर भी इसके इस्तेमाल पर रोक है. आबादी वाले इलाकों में इन हथियारों को हवा में छोड़ने पर भी प्रतिबंध है. हालांकि इजरायल ने इन शर्तों पर दस्तखत नहीं किए हैं.
वीडियो: लेबनान में घुसी इजरायली सेना, हिजबुल्लाह ने भी मिसाइल दाग दी

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