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बिजली मंत्री के प्रोग्राम में बिजली गई तो बवाल क्यों?

बिजली आती-जाती रहेगी मंत्रीजी, आप ये हाजिरजवाबी बचाए रखिए बस.

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20 मई 2016 (अपडेटेड: 20 मई 2016, 01:28 PM IST)
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डॉक्युमेंट्री फिल्म ‘कटियाबाज़’ का एक सीन कानपुर के विधायक इरफ़ान सोलंकी ‘जनता’ की तरफ से मीटिंग कर रहे हैं बिजली बोर्ड के कर्मचारियों के साथ. मुद्दा है बिजली कटौती. अधिकारी : हम कोशिश कर रहे हैं. अठारह घंटे बिजली रहेगी. कोशिश जारी है. इरफान सोलंकी : अठारह नहीं, सोलह मानते हैं. ठीक है? नहीं तो फिर महोदय आप होंगे और हम होंगे.
रियल लाइफ ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल की प्रेस कॉन्फ्रेंस, 2 साल की उपलब्धियों का एक सीन https://www.youtube.com/watch?v=diykPotmbWw सब लोग मुस्कुरा रहे हैं और बिजली चली जाती है. अंधेरा. तुरंत आ भी जाती है. लोग मुस्कुराते हैं क्योंकि मंत्रीजी अब भी मुस्कुरा रहे हैं. (नेपथ्य में इंजीनियर रो रहा है. उसकी आवाज किसी को नहीं सुनाई देती) पीयूष गोयल (मुस्कुराते हुए) : मेरी पत्नी कहती है कि तुम्हारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिजली जानी चाहिए जिससे तुम्हें पता चलेगा कि जनता को कितनी दिक्कत होती है. लोग ठहाके लगा रहे हैं. बिजली फिर चली जाती है. अंधेरा ही अंधेरा. फिर तुरंत आ जाती है. लोग इधर-उधर देख के फिर मुस्कुराते हैं क्योंकि मंत्रीजी अब भी मुस्कुरा रहे हैं. (नेपथ्य में कोई नई नौकरी ढूंढ रहा है) पीयूष गोयल (थोड़ा कम मुस्कुराते हुए) : माइल्स टु गो बिफोर आई स्लीप. सच में जी? सच बात तो ये है कि बिजली गई. इसमें गोयल जी का कुसूर नहीं है. बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियां इसको देखती हैं. बिजली उत्पादन होता है पावर प्लांट में. वहां से इसको भेजा जाता है हमारे पास. वोल्टेज और करेंट को इधर उधर से एडजस्ट कर छोटे-छोटे बिजली स्टेशनों के जरिये हमारे नजदीकी ट्रांसफॉर्मर तक. बिजली पैदा करने वाली कंपनियां अलग, बांटने वाली अलग और सप्लाई करने वाली अलग. बांटने वाली पावर ग्रिड और सप्लाई करने वाली डिस्कॉम. सप्लाई वाली ही हमसे बिल लेती हैं. क्योंकि वो खरीद के हमको बेचती हैं. ठीक वैसे ही जैसे माल्या की कंपनी में दारू बनती है और लुटिया पठान हमारे मोहल्ले में बेचता है. जनता की दिक्कत है कि गड़बड़ी होने पर ना तो लुटिया पठान को धमकाया जा सकता है और ना ही सप्लाई कंपनी को. हमारे यहां बिजली में दिक्कतें बहुत हैं. हम कोयले की आग से पानी गरम कर भाप बनाते हैं और उससे टरबाइन घुमाते हैं. उससे जनरेटर का लोहा-लक्कड़ जुड़ा होता है, वो भी घूमता है. फिर दसवीं क्लास का फैराडे का नियम लगा के बिजली पैदा होती है. कोयला हमारे पास बहुत है. दिक्कत है कि 'कोल इंडिया' समय पर कोयला नहीं दे पाती और हमें बाहर से मंगवाना पड़ता है. अगर वो मिल भी जाए तो एक नई दिक्कत है. कोयला प्रदूषण बहुत करता है. अमेरिका और अन्य देश दबाव डाल रहे हैं कि सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी अपनाएं. ताकि प्रदूषण कम हो और अमेरिकी तकनीक भी यहां आए. मामला फिर फंसता है. सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी मंहगे पड़ते हैं. जिस देश में अभी तक कई गांवों में बिजली नहीं पहुंची वहां ये कैसे लागू होगा? इसके अलावा भी दिक्कत है. जो भी बिजली हम पैदा करते हैं उसे हम खूब वेस्ट करते हैं. पावर प्लांट से घर तक लाने में बहुत बिजली यूं ही बर्बाद हो जाती है. जैसे पानी का टैंकर पूूरे रास्ते पानी चुआते जाता है. बिहार में तो आधी बिजली चू जाती है. तार टूट के लोगों पर गिर जाते हैं. अवैध कनेक्शन रखते हैं. दूसरों की लाइन से बिजली चुराते हैं. सप्लाई कंपनी वाले इस बात पर बिगड़ जाते हैं और घाटे में चले जाते हैं. बिगाड़ना किसी समस्या का हल नहीं है. क्योंकि इसके बाद बहुत सारे लोग कटिया लगा कर  बिजली लेते हैं और बिल नहीं देते. दो साल पहले पीयूष गोयल ने कहा कि मैं ये सारी दिक्कतें दूर कर दूंगा. सारी मतलब सारी. मानने लायक बात है बॉस? अगर लुटिया कुछ ऐसा वादा करता तो हम बोलते चल बे. पर बॉस, गोयल अपना लक पहन के चले हैं. डिग्रियों के झंझावात में गोयल जी के पास शानदार डिग्रियां हैं. सीए में ऑल इंडिया सेकंड रैंक, लॉ में यूनिवर्सिटी में सेकंड रैंक. अमेरिकी यूनिवर्सिटियों से डिग्री है. येल वाली नहीं. ओरिजिनल. इन्वेस्टमेंट बैंकर रहे हैं. स्टेट बैंक के बोर्ड में थे. काबिल आदमी हैं. राजनीति में इनका परिवार रहा है. पापा गोयल और मम्मी गोयल दोनों लोग बीजेपी में क्रमशः केंद्रीय मंत्री और एमएलए रह चुके हैं. फिर भी इतनी पढ़ाई? अपने बिहार के तेजस्वी ने तो पापा यादव और मम्मी यादव से कहा नहीं पढूंगा. नहीं पढूंगा. बोल दिया ना. पीयूष गोयल ने दो सालों में कुछ तो कर ही दिखाया है- 1. सप्लाई कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए इंतजाम हुआ है. उनका अधिकांश घाटा राज्य सरकार भरेगी. और बिल लेने में मदद करेगी. हर घर में मीटर होंगे और तमीज से काम होगा. 2. सोलर एनर्जी में ‘बोली लगा’ के दाम फाइनल किया जा रहा है. इस से ब्लैक मनी मार्केट में नहीं आएगी और दाम कम रहेगा. यही विंड एनर्जी के साथ भी किया जाएगा. सोलर एनर्जी उत्पादन बढ़ा है. मध्य प्रदेश में दुनिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट लगेगा. पहले कंपनियां सारा खर्चा जोड़ के उस पर अपना प्रॉफिट रख के दाम बताती थीं. इससे अंट-शंट काम हो जाता था. कुछ भी जोड़ दो! 3. कोयला देश से ही ज्यादा निकाला जा रहा है. और निकाला भी जायेगा. पहला लक्ष्य लोगों को बिजली देना है. इसलिए कोयले से उत्पादन बदस्तूर जारी रहेगा. हालांकि इससे प्रदूषण का खतरा तो रहेगा ही. 4. एकदम लंठ भी नहीं बन जाना है. सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी को बहुत बढ़ाना है. प्रदूषण कम करना हमारी भी जिम्मेदारी है. 5. LED बल्ब लोगों को कम दाम में दिए जा रहे हैं. 2019 तक जनता 40 हजार करोड़ रुपये हर साल सिर्फ बिल में बचाएगी. आप भी LED बल्ब ले ही लीजिये. 6. किसानों के लिए ग्रिड बनाने पर विचार हो रहा है. काम पूरा होने में थोड़ा टाइम लगता है. 7. दो सालों में बहुत सारे गांवों में बिजली पहुंच गई है. तेज काम हुआ है. 8. कॉर्पोरेट और बड़ी बड़ी रिपोर्टों ने पीयूष गोयल को सबसे काबिल मंत्री बताया है. बहुत बड़ाई हो गयी. अब   बताइए इनकी कांफ्रेंस में 13 सेकंड के लिए बिजली कटी थी कैसे? ये भी ठीक ही हुआ. मंत्रीजी काम तेजी से बढ़ाएंगे. हमें इनसे शिकवा नहीं है. बस उस इंजीनियर को सस्पेंड मत करना. सिस्टम को मजबूत बनाइए. समस्या तकनीक और तारों में है. आदमी अपने पास अच्छे हैं. ऐसा हर मीटिंग में मंत्रीजी आप ही बोलते हैं. मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, सिक्योरिटी के लिए लगे कैमरे सब के सब आप की बिजली का ही इंतजार कर रहे हैं. 65 करोड़ युवा आपकी तरफ देख रहे हैं. 2019 तक हर गांव में बिजली पहुंचाने का वादा किया था आपने. पटाक्षेप! ठीक है, मान लेते हैं. नहीं तो फिर महोदय हम होंगे और आप होंगे.

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