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नोट बैन के बाद पहली बड़ी खुशखबरी नरेंद्र भाई ने दी है

नोट बैन के नफा-नुकसान पर चर्चा हो रही है. ऐसे में पीएम-मुख से निकली ये बातें याद रखी जाएं.

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कुलदीप
21 नवंबर 2016 (Updated: 20 नवंबर 2016, 04:38 AM IST)
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प्रधानमंत्री रविवार को आगरा में बोले. कुछ अतिरिक्त आक्रामक होकर बोले. वो यहां एक हाउसिंग स्कीम के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे, जिसके तहत 3 साल में 1 करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य लिया गया है. लेकिन उन्होंने अपने भाषण का बड़ा हिस्सा नोटबंदी के बचाव में खर्च किया. उन्होंने जोर देकर इस फैसले को डिफेंड किया और कहा कि इससे गरीब और मध्यवर्ग को थोड़ा कष्ट हो रहा है, लेकिन कुछ अमीर लोग तो पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं.

नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री की तरफ से ये सबसे जरूरी भाषण था, लेकिन शायद रेल हादसे की वजह से इस पर कम बात हो पाई. अंडरलाइन करने वाली बात ये है कि प्रधानमंत्री इस भाषण में 'फर्स्ट पर्सन' में बातें करते रहे. नोटबंदी के लिए 'सरकार का फैसला' या 'हमारा फैसला' के बजाय उन्होंने 'मेरा फैसला' शब्द चुना और 'मैं' की भाषा में ही सारे वादे किए.

https://twitter.com/narendramodi/status/800331067886424064 प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के पक्ष में जो बातें कहीं, उन्हें आप दावों की तरह भी ले सकते हैं और वादों की तरह भी. प्रधानमंत्री ने ब्याज दर घटाए जाने की बात कही और इशारा किया कि स्कूलों में एडमिशन और मकान की खरीद मे जो व्हाइट मनी को ब्लैक बनाकर देना पड़ता था, वो खत्म होगा. और भी कई वादे हैं. अभी जब नोटबंदी के नफा-नुकसान पर चर्चा हो रही है, लोग पीएम-मुख से निकली इन बातों को  याद रख सकते हैं ताकि सनद रहे.

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मोदी कहिन: 'जिस शहर को बिजली का बिल 5 करोड़ रुपये इकट्ठा करने में आंखों में पानी आ जाता था, 8 तारीख के बाद 500 और हजार के नोट पर मोदी ने हाथ लगाया. भाइयों-बहनों, जहां 5 करोड़ का बिल आता था, म्युनिसिपैलिटी को 15 करोड़ का बिल आना शुरू हो गया. ये बिल कौन नहीं देते थे? नियमों का पालन कौन नहीं करते थे? क्या मिडल क्लास नहीं करता था? क्या गरीब नहीं करते थे? जो नेताओं और बाबुओं के अगल-बगल रहते थे, वही मजा लेते थे. आज उन सबको पाई पाई चुकता करनी पड़ रही है.'

यानी हम उम्मीद कर सकते हैं कि नोट बैन के बाद बिल भुगतान अस्थायी बनकर नहीं रहेगा. प्रधानमंत्री ये सुनिश्चित करेंगे कि नए नोट पूरी तरह सर्कुलेशन में आने के बाद भी इन शहरों का कलेक्शन इतना बना रहेगा.

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मोदी कहिन: 'क्या किसी गरीब या मिडल क्लास वाले के पास काला धन है? लेकिन मिडल क्लास भी जब घर खरीदने जाता है तो बेचने वाला उससे कहता है कि इतना पैसा आपको कैश में देना पड़ेगा. उसे अपना व्हाइट मनी ब्लैक में देना पड़ता है. पूरी इकॉनमी को कुछ लोगों ने बर्बाद करके गरीब और मध्य वर्ग को लूटा है.'

प्रधानमंत्री ने उचित ही इस समस्या को रेखांकित किया है. इससे हम सब पीड़ित हैं. इसका ये अर्थ भी निकाला जा सकता है कि क्या प्रधानमंत्री ये काम भी रुक जाने का दावा कर गए. रुके न सही, पर मंद पड़ने की उम्मीद तो कर सकते हैं? है ना!

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मोदी कहिन: 'आपको भी नोट बैन से परेशानी हुई होगी. लेकिन कुछ लोगों को बहुत बड़ी सजा मिली है. ऐसी सजा मिली है कि उनकी सारी जिंदगी बर्बाद हो जाए.'

क्या उम्मीद लगाई जाए कि आने वाले सालों में काला धन जमा करने वालों को गाहे-बगाहे सजा मिलती रहेगी?

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मोदी कहिन: नोट बैन से मेरे गरीब भाई कष्ट उठा रहे हैं. मेरे मध्यम वर्ग के भाई कष्ट उठा रहे हैं. मेरे दलित और किसान भाई कष्ट उठा रहे हैं. आदिवासी कष्ट उठा रहे हैं. मेरी माताएं और बहनें कष्ट उठा रही हैं. मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं आपका तप बेकार नहीं जाएगा. देश सोने की तरह तपकर बाहर निकलेगा.

हम भी इसी इंतज़ार में हैं, सर. आपके वादे पर ऐतबार है. उम्मीद करते हैं कि जितना व्यापारिक घाटा भारत ने उठाया है, अर्थव्यवस्था को उससे ज्यादा फायदा आने वाले समय में होगा. आंकड़े सामने आएंगे. देखेंगे सर.

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मोदी कहिन: 'गरीब ईमानदारी से जीना चाहता है. क्या उसकी रक्षा करना, ये सरकार का दायित्व है कि नहीं है? मेरे इस कदम से मध्यम वर्ग के मानवीय को सुरक्षा मिलने वाली है. जो गरीब है, उसे हक मिलता नहीं है. गरीब को हक चाहिए. बीच में लुटेरों के कारण हक नहीं मिल पा रहा है. मध्यमवर्ग का शोषण बंद होगा. गरीब को हक मिलेगा. पैसे जमा हो गए हैं. बैंकों में 5 लाख करोड़ रुपया आया है. आगे भी आएगा. बैंक वाले क्या इसे डिब्बे में बंद रखेंगे? उनको बाजार में देना पड़ेगा. लोन देना पड़ेगा. कोई नाई की दुकान देना चाहता है तो लोन देना पड़ेगा. धोबी, बर्तन, कपड़े की दुकान के लिए लोन देना पड़ेगा. और इतने सारे पैसे निकालने के लिए उनको ब्याज भी कम करना पड़ेगा. बहुत कम ब्याज में रुपया गरीब और मध्यवर्ग को मिलने वाला है.'

यानी हमारी EMI घटेगी और नए लोन भी सस्ते होंगे.

6

मोदी कहिन: 'गरीब और मध्य वर्ग के पास काला धन होता है क्या? नौकरी करके कमाने वालों के पास काला धन होता है क्या? फिर भी स्कूलों में बच्चों के एडमिशन के लिए उनसे कैश पैसा मांगा जाता है. उसे अपनी व्हाइट मनी ब्लैक में देनी पड़ती है. गरीब और मध्यम वर्ग के मां-बाप पैसों के अभाव में लुटेरों के कारण नहीं दे पाते हैं. अब वो बीमारी जाने वाली है.'

अगले सेशन के एडमिशन चार महीने बाद शुरू हो जाएंगे. अगर आप बच्चे का एडमिशन कराने जा रहे हैं तो टेस्ट कीजिएगा. व्हाइट मनी को ब्लैक में मांगने का धंधा रुका है या नहीं.

सारे वादे नोट कर लीजिए. पूरे न हों तो अपने लोकतांत्रिक हक के तहत सवाल पूछिएगा. प्रधानमंत्री से जवाब भी मांगिएगा. जै जिनेंद्र.
इधर भी पढ़ लो, चक्षु खुलेंगेमोदी का मंसूबा टूट रहा है, बैंक खुद ब्लैक मनी को वाइट कर रहे हैंये कैसी तैयारी, नए नोट आधे छपे हुए निकल रहे हैं एटीएम से!

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