प्रधानमंत्री रविवार को आगरा में बोले. कुछ अतिरिक्त आक्रामक होकर बोले. वो यहांएक हाउसिंग स्कीम के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे, जिसके तहत 3 साल में 1 करोड़ मकानबनाने का लक्ष्य लिया गया है. लेकिन उन्होंने अपने भाषण का बड़ा हिस्सा नोटबंदी केबचाव में खर्च किया. उन्होंने जोर देकर इस फैसले को डिफेंड किया और कहा कि इससेगरीब और मध्यवर्ग को थोड़ा कष्ट हो रहा है, लेकिन कुछ अमीर लोग तो पूरी तरह बर्बादहो गए हैं.नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री की तरफ से ये सबसे जरूरी भाषण था, लेकिन शायद रेलहादसे की वजह से इस पर कम बात हो पाई. अंडरलाइन करने वाली बात ये हैकि प्रधानमंत्री इस भाषण में 'फर्स्ट पर्सन' में बातें करते रहे. नोटबंदी केलिए 'सरकार का फैसला' या 'हमारा फैसला' के बजाय उन्होंने 'मेरा फैसला' शब्द चुना और'मैं' की भाषा में ही सारे वादे किए.https://twitter.com/narendramodi/status/800331067886424064 प्रधानमंत्रीने नोटबंदी के पक्ष में जो बातें कहीं, उन्हें आप दावों की तरह भी ले सकते हैं औरवादों की तरह भी. प्रधानमंत्री ने ब्याज दर घटाए जाने की बात कही और इशारा किया किस्कूलों में एडमिशन और मकान की खरीद मे जो व्हाइट मनी को ब्लैक बनाकर देना पड़ताथा, वो खत्म होगा. और भी कई वादे हैं. अभी जब नोटबंदी के नफा-नुकसान पर चर्चा होरही है, लोग पीएम-मुख से निकली इन बातों को याद रख सकते हैं ताकि सनद रहे.1मोदी कहिन: 'जिस शहर को बिजली का बिल 5 करोड़ रुपये इकट्ठा करने में आंखों में पानीआ जाता था, 8 तारीख के बाद 500 और हजार के नोट पर मोदी ने हाथ लगाया. भाइयों-बहनों,जहां 5 करोड़ का बिल आता था, म्युनिसिपैलिटी को 15 करोड़ का बिल आना शुरू हो गया.ये बिल कौन नहीं देते थे? नियमों का पालन कौन नहीं करते थे? क्या मिडल क्लास नहींकरता था? क्या गरीब नहीं करते थे? जो नेताओं और बाबुओं के अगल-बगल रहते थे, वही मजालेते थे. आज उन सबको पाई पाई चुकता करनी पड़ रही है.'यानी हम उम्मीद कर सकते हैं कि नोट बैन के बाद बिल भुगतान अस्थायी बनकर नहीं रहेगा.प्रधानमंत्री ये सुनिश्चित करेंगे कि नए नोट पूरी तरह सर्कुलेशन में आने के बाद भीइन शहरों का कलेक्शन इतना बना रहेगा.2मोदी कहिन: 'क्या किसी गरीब या मिडल क्लास वाले के पास काला धन है? लेकिन मिडलक्लास भी जब घर खरीदने जाता है तो बेचने वाला उससे कहता है कि इतना पैसा आपको कैशमें देना पड़ेगा. उसे अपना व्हाइट मनी ब्लैक में देना पड़ता है. पूरी इकॉनमी को कुछलोगों ने बर्बाद करके गरीब और मध्य वर्ग को लूटा है.'प्रधानमंत्री ने उचित ही इस समस्या को रेखांकित किया है. इससे हम सब पीड़ित हैं.इसका ये अर्थ भी निकाला जा सकता है कि क्या प्रधानमंत्री ये काम भी रुक जाने कादावा कर गए. रुके न सही, पर मंद पड़ने की उम्मीद तो कर सकते हैं? है ना!3मोदी कहिन: 'आपको भी नोट बैन से परेशानी हुई होगी. लेकिन कुछ लोगों को बहुत बड़ीसजा मिली है. ऐसी सजा मिली है कि उनकी सारी जिंदगी बर्बाद हो जाए.'क्या उम्मीद लगाई जाए कि आने वाले सालों में काला धन जमा करने वालों को गाहे-बगाहेसजा मिलती रहेगी?4मोदी कहिन: नोट बैन से मेरे गरीब भाई कष्ट उठा रहे हैं. मेरे मध्यम वर्ग के भाईकष्ट उठा रहे हैं. मेरे दलित और किसान भाई कष्ट उठा रहे हैं. आदिवासी कष्ट उठा रहेहैं. मेरी माताएं और बहनें कष्ट उठा रही हैं. मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूंआपका तप बेकार नहीं जाएगा. देश सोने की तरह तपकर बाहर निकलेगा.हम भी इसी इंतज़ार में हैं, सर. आपके वादे पर ऐतबार है. उम्मीद करते हैं कि जितनाव्यापारिक घाटा भारत ने उठाया है, अर्थव्यवस्था को उससे ज्यादा फायदा आने वाले समयमें होगा. आंकड़े सामने आएंगे. देखेंगे सर.5मोदी कहिन: 'गरीब ईमानदारी से जीना चाहता है. क्या उसकी रक्षा करना, ये सरकार कादायित्व है कि नहीं है? मेरे इस कदम से मध्यम वर्ग के मानवीय को सुरक्षा मिलने वालीहै. जो गरीब है, उसे हक मिलता नहीं है. गरीब को हक चाहिए. बीच में लुटेरों के कारणहक नहीं मिल पा रहा है. मध्यमवर्ग का शोषण बंद होगा. गरीब को हक मिलेगा. पैसे जमाहो गए हैं. बैंकों में 5 लाख करोड़ रुपया आया है. आगे भी आएगा. बैंक वाले क्या इसेडिब्बे में बंद रखेंगे? उनको बाजार में देना पड़ेगा. लोन देना पड़ेगा. कोई नाई कीदुकान देना चाहता है तो लोन देना पड़ेगा. धोबी, बर्तन, कपड़े की दुकान के लिए लोनदेना पड़ेगा. और इतने सारे पैसे निकालने के लिए उनको ब्याज भी कम करना पड़ेगा. बहुतकम ब्याज में रुपया गरीब और मध्यवर्ग को मिलने वाला है.'यानी हमारी EMI घटेगी और नए लोन भी सस्ते होंगे.6मोदी कहिन: 'गरीब और मध्य वर्ग के पास काला धन होता है क्या? नौकरी करके कमानेवालों के पास काला धन होता है क्या? फिर भी स्कूलों में बच्चों के एडमिशन के लिएउनसे कैश पैसा मांगा जाता है. उसे अपनी व्हाइट मनी ब्लैक में देनी पड़ती है. गरीबऔर मध्यम वर्ग के मां-बाप पैसों के अभाव में लुटेरों के कारण नहीं दे पाते हैं. अबवो बीमारी जाने वाली है.'अगले सेशन के एडमिशन चार महीने बाद शुरू हो जाएंगे. अगर आप बच्चे का एडमिशन करानेजा रहे हैं तो टेस्ट कीजिएगा. व्हाइट मनी को ब्लैक में मांगने का धंधा रुका है यानहीं.सारे वादे नोट कर लीजिए. पूरे न हों तो अपने लोकतांत्रिक हक के तहत सवालपूछिएगा. प्रधानमंत्री से जवाब भी मांगिएगा. जै जिनेंद्र.-------------------------------------------------------------------------------- इधर भी पढ़ लो, चक्षु खुलेंगे मोदी का मंसूबा टूट रहा है, बैंक खुद ब्लैक मनी कोवाइट कर रहे हैं ये कैसी तैयारी, नए नोट आधे छपे हुए निकल रहे हैं एटीएम से!