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खामेनेई के बाद अब कौन? ईरान में 'सबकुछ सेट' है

Ali Khamenei Successor: सुप्रीम लीडर की पावर का दायरा उसके रिप्रेजेंटेटिव के जरिए फैला हुआ है. उसके लगभग 2,000 लोग, सरकार के सभी सेक्टर्स में फैले हुए हैं. वे सभी लीडर के क्लर्क के तौर पर काम करते हैं.

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how supreme leader is chosen in iran after death of ayatollah ali khamenei
अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता थे. (PHOTO-AFP)
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मानस राज
1 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 03:45 PM IST)
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ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो चुकी है. हालांकि जंग अब भी जारी है. ईरान लगातार अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अली खामेनेई की जगह अब ईरान की कमान कौन संभालेगा? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि ईरान में सुप्रीम लीडर का पद प्रेसिडेंट जैसी पॉलिटिकल लीडरशिप से भी ऊपर होता है. ईरान की नई लीडरशिप के लिए कवायद भी शुरू हो चुकी है.

इंडिया टुडे से जुड़े सुमित की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेश्कियान, ईरान के चीफ जस्टिस गुलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई और शरिया कानून और ईरानी संविधान के हिसाब से कानून को कोऑर्डिनेट करने वाली ताकतवार बॉडी गार्डियन काउंसिल के एक मेंबर मिलकर देश को लीड करेंगे. नए सुप्रीम लीडर के चुनाव तक ऐसा जारी रहेगा. मोहम्मद मोखबर अगले सुप्रीम लीडर के चुनाव तक के बदलाव के दौर को संभालेंगे. मोखबर ईरान के अंतरिम राष्ट्रपति रह चुके हैं.

अब समझते हैं कि ईरान का पॉलिटिकल सिस्टम कैसा है? यह भी जानेंगे कि अगला सुप्रीम लीडर कैसे चुना जाएगा?

अब सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी किसके पास?

ईरानी कानून के तहत असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नाम के 88 सदस्यों वाला एक पैनल सुप्रीम लीडर को चुनेगा. एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस पैनल में पूरी तरह से शिया मौलवी शामिल होते हैं. इन्हें हर आठ साल में आम लोगों द्वारा चुना जाता है. इनकी उम्मीदवारी को ईरान की संवैधानिक निगरानी संस्था ‘गार्डियन काउंसिल’ मंजूर करती है. यह संस्था ईरान में अलग-अलग चुनावों में उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने के लिए जानी जाती है. गार्डियन काउंसिल ने ही ईरान के पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी को मार्च 2024 में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का चुनाव लड़ने से रोक दिया था.

सुप्रीम लीडर की ताकत

ईरान के पावर स्ट्रक्चर में सबसे ऊपर सुप्रीम लीडर आते हैं. अयातुल्ला अली खामेनई ने 1989 में ईरानी क्रांति के जनक अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी की जगह ली. खोमैनी और खामेनेई ही ऐसे दो लोग हैं जो 1979 में इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना के बाद से इस पद पर रहे हैं. ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की आम नीतियों" को तय करने और उनकी देखरेख के लिए जिम्मेदार है. वह ईरान की घरेलू और विदेशी नीतियों की दिशा तय करता है. साथ ही वो आर्म्ड फोर्सेज का कमांडर-इन-चीफ भी होता है.

फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम लीडर ईरान के इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑपरेशन्स को भी कंट्रोल करता है. सिर्फ वही युद्ध या शांति की घोषणा कर सकता है. उसके पास ज्यूडिशियरी, सरकारी रेडियो और टेलीविजन नेटवर्क, और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के लीडर्स को नियुक्त करने और हटाने की शक्ति है. वह काउंसिल ऑफ गार्डियंस के बारह मेंबर में से छह को खुद अपॉइंट करता है. यह ईरान की सबसे पावरफुल बॉडी है जो पार्लियामेंट के कामों को देखती है. ये तय करती है कि कौन से कैंडिडेट पब्लिक ऑफिस के लिए चुनाव लड़ने के काबिल हैं.

सुप्रीम लीडर की पावर का दायरा उसके रिप्रेजेंटेटिव के जरिए फैला हुआ है. उसके लगभग 2,000 लोग, सरकार के सभी सेक्टर्स में फैले हुए हैं. वे सभी लीडर के क्लर्क के तौर पर काम करते हैं. कुछ मामलों में सुप्रीम लीडर के रिप्रेजेंटेटिव, राष्ट्रपति के मंत्री से भी ज्यादा पावरफुल होते हैं. उनके पास सुप्रीम लीडर की तरफ से राज्य के किसी भी मामले में दखल देने का अधिकार होता है.

वीडियो: ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले को लेकर अन्य देशों ने क्या कहा?

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