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NCRB देशभर में होने वाले अपराधों की रिपोर्ट कैसे बनाता है?

29 अगस्त, 2022 को NCRB ने 'क्राइम इन इंडिया' की 2021 की रिपोर्ट जारी की है.

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31 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 1 सितंबर 2022, 12:26 PM IST)
NCRB LOGO
सांकेतिक तस्वीर. (इंडिया टुडे)
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29 अगस्त, 2022 को NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने 'क्राइम इन इंडिया' की 2021 की रिपोर्ट जारी की है. हर साल जारी होेने वाली NCRB की ये रिपोर्ट ये बताती है कि बीते साल देश भर में कितने क्राइम दर्ज किए गए. NCRB की ये रिपोर्ट बताती है कि देश में अलग-अलग तरह के जुर्म सालाना तौर पर बढ़े हैं या घटे. क्राइम बढ़ा या घटा इससे इतर इस रिपोर्ट में हम बात करेंगे कि आखिर NCRB पूरे देश की इतनी बड़ी रिपोर्ट बनाती कैसे है.

NCRB ने 'क्राइम इन इंडिया' की अपनी पहली रिपोर्ट साल 1953 में जारी की थी. रिपोर्ट के लिए डाटा इकट्ठा करने का काम स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) और डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (DCRB) का होता है. साल के अंत में डाटा NCRB को भेजा जाता है. जिस साल की रिपोर्ट तैयारी होती है उससे कैलेंडर ईयर कहा जाता है. जैसे कैलेंडर ईयर 2021. इस कैलेंडर ईयर में 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक होने वाले क्राइम का ब्योरा होता है.

डाटा जमा करने की प्रक्रिया क्या है?

देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों की पुलिस, आपराधिक डाटा को NCRB द्वारा निर्धारित तरीके से दर्ज करती है. ये हार्ड कॉपी होती है. इसके अलावा सॉफ्टकॉपी को NCRB द्वारा डेवलप किये गए सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन पर भी दर्ज किया जाता है. इसी तरह देश के 53 महानगरों के आपराधिक डाटा को वहां के SCRB/CID द्वारा दर्ज किया जाता है. जिलास्तर और राज्यस्तर के डाटा का एकीकरण राज्य की पुलिस एजेंसियों (SCRB/CID) द्वारा किया जाता है.

- डाटा का फर्स्ट लेवल वैलिडेशन यानी आंकड़ों की जांच पड़ताल, NCRB के एप्लीकेशन पर पुलिस स्टेशन में किया जाता है. 
- इसके बाद सेकंड लेवल पर NCRB के कहने पर राज्य की पुलिस जिलास्तर के डाटा एकीकरण के दौरान डाटा वैलिडेशन करती है. 
- थर्ड लेवल का डाटा वैलीडेशन राज्य स्तर पर NCRB के अधिकारियों द्वारा ही किया जाता है, जिसमें निदेशक/संयुक्त निदेशक /उप निदेशक /सीएसओ और अन्य अधिकारी शामिल होते हैं. अगर डाटा में कोई संशोधन होता है तो NCRB उसे अपने डाटा में शामिल करती है
- इसके अलावा जो केस करप्शन एक्ट, डायरेक्ट टैक्स इनैएक्टमेंट, कस्टम एक्ट या इस तरह अन्य केन्द्रीय एजेंसी के तहत रजिस्टर होता है तो उनका एकीकरण उक्त एजेंसी ही करती हैं.

NCRB डाटा कैसे कम्पाइल करता है.

- राज्यों और केंद्र शासित से फाइनल डाटा प्राप्त करने के बाद NCRB द्वारा पूरे भारत का डेटा जेनरेट किया जाता है.
- फिर NCRB के ऐप्लीकेशन पर भारत में हुए अपराधों के लिए राष्ट्रीय स्तर की एक टेबल तैयार की जाती हैं और इसके बाद NCRB इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता लगाने के लिए डाटा को क्रॉस चेक करती है.
- ये टेबल भारत में हुए आपराधिक आंकड़ों के आधार पर प्रदर्शित की जाती हैं.
- भारत के वो आपराधिक आंकड़ें जो NCRB की क्राइम रिपोर्ट में प्रकाशित नहीं होते हैं, NCRB उनके लिए एक अतिरिक्त टेबल बना कर अपनी वेबसाइट पर उन अपराधों की जानकारी उपलब्ध करवा देती है.

क्राइम रेट कैसे तय होता है?

क्राइम रेट निकालने के लिए NCRB, दर्ज किये गए आपराधिक मामलों को उस जगह की मध्य वर्ष की अनुमानित जनसंख्या से भाग दे देते हैं . जिससे उस जगह का क्राइम रेट तय होता है. इसे अगर गणित की भाषा में समझे तो फॉर्मूला कुछ यूं बनता है.

Crime Rate = Number of Cases Reported / Mid-Year Projected Population in Lakhs

(आपके लिए ये खबर लिखी है दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रहे आर्यन मिश्र ने)

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