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हमास को जंग के लिए इतने हथियार कहां से मिल रहे हैं? कौन है 'सीक्रेट दोस्त'?

हमास के पास भी बेहद संवेदनशील हथियार हैं – रॉकेट, मिसाइलें, विस्फोटक-ड्रोन और भतेरा गोला-बारूद. मगर हमास के पास इतना हथियार-कारतूस आ कहां से रहा है?

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21 अक्तूबर 2023 (अपडेटेड: 21 अक्तूबर 2023, 06:23 PM IST)
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गाज़ा के रफ़ा शहर में हमास लड़ाके (फ़ोटो - AFP)
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हमास और इज़रायल की जंग (Israel-Gaza War) में अब तक 5 हजार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. जब से हमास ने इज़रायल की ज़मीन पर रॉकेट दागे हैं, दोनों तरफ़ से हथियार रुके नहीं. इज़रायल लगातार हवाई रेड्स कर रहा है. बारूद की बारिश कर रहा है. हमास के पास भी बेहद संवेदनशील हथियार हैं – रॉकेट, मिसाइलें, विस्फोटक-ड्रोन और भतेरा गोला-बारूद.

मगर इसमें बार-बार एक सवाल उठ रहा है: हमास के पास इतने हथियार-कारतूस आ कहां से रहे हैं? हमास-शासित ग़ाज़ा, भूमध्यसागर के तट पर 360 वर्ग किलोमीटर की एक पट्टी है. दिल्ली का एक-चौथाई. एक तरफ़ पानी, तीन तरफ़ ज़मीन. पूर्व और उत्तर में इज़रायल और दक्षिण-पश्चिम में मिस्र है. कम संसाधनों और घनी आबादी वाला क्षेत्र है. 2007 में हमास के आने के बाद से ये बाक़ी दुनिया से लगभग पूरी तरह से कटा हुआ है. ऊपर से इज़रायल ने ग़ाज़ा पर ब्लॉकेड लगा रखा है. हवा और पानी पर नाकाबंदी है. फिर हमास के पास इतना हथियार-कारतूस आ कहां से रहा है?

जवाब: होशियारी, कामचलाऊ व्यवस्था और विदेशी दोस्त.

दोस्त कौन?

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, हमास बहुत सारे हथियार तस्करी के ज़रिए लाता है और ईरान इसमें उसकी मदद करता है. अमेरिका की खुफ़िया एजेंसी CIA की फ़ैक्टबुक भी इस बात की तस्दीक करती है. हालांकि, इज़रायल और अमेरिकी सरकार के पास ईरान की कोई प्रत्यक्ष भूमिका के पुख़्ता सबूत नहीं हैं. वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान लंबे समय से हमास का मुख्य सैन्य समर्थक रहा है. गुप्त सुरंगों या नाकाबंदी से बच निकलने वाली नावों के ज़रिए हथियारों की तस्करी की जाती है. अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हमास को कुल फंडिंग का 70 फीसदी हिस्सा ईरान से आता है. विशेषज्ञ हमास के फैले हुए सुरंग नेटवर्क की बात भी हाइलाइट करते हैं. हथियारों के विशेषज्ञ चार्ल्स लिस्टर का कहना है,

"ईरान समुद्र के रास्ते हमास को अपनी एडवांस्ड बैलिस्टिक मिसाइलें भेज रहा है. साथ ही ईरान ने हमास को अपने हथियार बनाने में भी मदद की है. इस वजह से हमास के पास अब अपना ख़ुद का भंडार भी है."

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लेबनान-स्थित हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने RTArabic न्यूज़ चैनल को एक इंटरव्यू में हमास के हथियार भंडार का विवरण दिया था. बताया,

"हमारे पास हर चीज़ के लिए कारख़ाने हैं. 250 किमी, 160 किमी, 80 किमी और 10 किलोमीटर की रेंज वाले रॉकेटों के लिए. मोर्टार और गोलों के लिए... हमारे पास कलाश्निकोव (राइफ़ल) के भी कारखाने हैं. रूसी हमारी मदद कर रहे हैं और हम ग़ाज़ा में हथियार बना रहे हैं."

इसमें एक ऐंगल लेबनानी चरमपंथी समूह हिज़बुल्लाह का भी है. कथित तौर पर हिज़बुल्लाह भी ईरान के बनाए रॉकेट और भारी हथियार ग़ाज़ा पहुंचाने में मदद करता है. 

कई रिपोर्टों में ये बात भी है कि तालिबान हमास को अमेरिकी हथियार दे रहा है. दरअसल, जब अमेरिका ने 2021 में अफ़ग़ानिस्तान में अपना अभियान ख़त्म किया, तो उसने हथियारों का एक भंडार छोड़ दिया. जब तालिबान देश की सत्ता पर क़ाबिज़ हुआ, तो उसने ये हथियार रख लिए.

एक और 'नया दोस्त'

ईरान के अलावा एक और दोस्त है. सीक्रेट दोस्त. न्यूज़ एजेंसी AP के हवाले से ख़बर आई है कि हमास ने जंग में उत्तर-कोरिया के हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है. उत्तर-कोरिया ने इस तरह के दावों का खंडन किया है लेकिन इज़रायल द्वारा ज़ब्त किए गए हथियार कुछ और ही कहानी बता रहे हैं.

हमास लड़ाकों के पास उत्तरी-कोरिया का F7 ग्रेनेड-लॉन्चर होने की आशंका है. हथियार-बंद गाड़ियों पर हमला करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. एक बार में एक ग्रेनेड और तुरंत री-लोड. हथियारों के विशेषज्ञ एन. आर. जेनज़ेन-जोन्स ने जानकारी दी है कि कि F-7 का इस्तेमाल सीरिया, इराक़, लेबनान और ग़ाज़ा पट्टी में देखा गया है.

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उत्तर-कोरिया का ग़ाज़ा को लेकर रुख क्या है? इस पर जियो-स्ट्रैटजी के जानकारों ने बताया कि उत्तर कोरिया लंबे समय से फ़िलिस्तीन के चरमपंथी समूहों को समर्थन दे रहा है. और, पहले भी उनके हथियार ऐसे समूहों के पास से ज़ब्त किए गए हैं.

UN में उत्तर कोरिया के मेंबर्स ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है. मगर राजधानी प्योंगयांग ने पिछले हफ़्ते ही ऐसे दावों को ख़ारिज किया था. कहा कि ये बेबुनियाद और झूठी अफ़वाहें हैं.

लोकल जुगाड़

अमेरिका-स्थित थिंक टैंक मिडल-ईस्ट इंस्टीट्यूट में सीनियर फ़ेलो चार्ल्स लिस्टर ने CNN को बताया कि ईरानी सेना की एक शाखा लगभग दो दशकों से हमास के इंजीनियरों को हथियारों की ट्रेनिंग दे रही है. इतनी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी तक पहुंच होने की वजह से हमास के इंजीनियर्स ने देश के अंदर के उत्पाद को बढ़ाया है. और, हमास स्वदेशी हथियार बनाने के लिए कच्चा माल कैसे जुटाता है – ये भी दिलचप्स है.

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ग़ाज़ा पट्टी में ऐसा कोई भी भारी उद्योग नहीं है. CIA फैक्टबुक के मुताबिक़, देश मुख्यतः कपड़ा, फ़ूड प्रोसेसिंग और फर्नीचर बनाता है. इसके अलावा, बेकार लोहे का ख़ूब निर्यात करता है. ये लोहा सुरंग नेटवर्क में हथियार बनाने के काम आता है. इज़राइल के गोला-बारूद को री-साइकल कर के जो हथियार बनते हैं, वो भी हमास के भंडार जुड़ जाते हैं.

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