ओमिक्रॉन एक कॉमन कोल्ड नहीं है, स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है. ऐसा सिस्टमबनाना बेहद जरूरी है, जिससे बड़ी संख्या में टेस्ट हो सकें, लोगों को सलाह दी जासके और बड़ी संख्या में मरीजों की निगरानी की जा सके, क्योंकि (कोविड के केसों) मेंउछाल अचानक आ सकता है और यह बहुत बड़ा हो सकता है.सौम्या स्वामीनाथन WHO की चीफ साइंटिस्ट हैं. उन्होंने कोरोना के नए वेरिएंटओमिक्रॉन को लेकर यह बात कही है. सौम्या स्वामीनाथन ने यह बात कहते हुए WHO कीमहामारी विशेषज्ञ मारिया वान केरखोव के एक ट्वीट को रीट्वीट किया है. मारिया नेअपने ट्वीट में ओमिक्रॉन के खतरे को कम आंके जाने से लोगों को सचेत किया है. वेलिखती हैं, कुछ रिपोर्ट्स में दिखाया गया है कि डेल्टा वेरिएंट की तुलना मेंओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्ति के अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कम है. ओमिक्रॉन(और डेल्टा) से अभी भी बहुत से लोग संक्रमित हैं, अस्पताल में भर्ती हैं और मौतेंभी हो रही हैं. हम संक्रमण को रोक सकते हैं और जान बचा सकते हैं.#Omicronis NOT the common cold! Health systems can get overwhelmed. Important to havesystems to test, advise and monitor large number of patients as the surge can besudden and huge https://t.co/YSCcYFBCB7— Soumya Swaminathan (@doctorsoumya) January 4, 2022WHO ने ओमिक्रॉन को 'वेरिएंट ऑफ कन्सर्न' की श्रेणी में डाल दिया है. आइये हम आपकोबताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार डेल्टा वेरिएंट के मुकाबलेओमिक्रॉन कितना खतरनाक है. अभी तक सामने आई स्टडीज में इसे लेकर क्या पता लगाहै? और कैसे इसके चलते आई तीसरी लहर हालात खराब कर सकती है?कितना खतरनाक ओमिक्रॉन वेरिएंट? ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर WHO का कहना है कि यह कोरोना के डेल्टा वेरिएंट से 6 गुनाज्यादा ताकतवर है. यह पिछले सभी वेरिएंट से ज्यादा तेजी से फैलता है. वैक्सीनेशन केबाद भी ओमिक्रॉन का संक्रमण हो सकता है, साथ ही इसमें नेचुरल इंफेक्शन से होने वालेइम्यून रिस्पॉन्स को भी बेअसर करने की क्षमता है.WHO चीफ अधानोम घेब्रेयेससडेल्टा के मुकाबले कितना घातक?ख़बरों के मुताबिक़, ओमिक्रॉन पिछले वेरिएंट्स के मुकाबले तेजी से फैल जरूर रहा है,लेकिन फ़िलहाल ये डेल्टा वैरिएंट की तुलना में माइल्ड है. इसमें संक्रमित लोगों केअस्पताल पहुंचने और हालत बिगड़ने की आशंका पिछले वेरिएंट से कम है. बीबीसी में छपीएक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका में एक स्टडी में पता लगा है कि ओमिक्रॉन केचलते आई कोरोना की तीसरी लहर में लोगों को अस्पताल में इलाज की आवश्यकता होने कीसंभावना पिछली लहर की तुलना में 70 से 80 प्रतिशत तक कम है. ओमिक्रॉन मेंडेल्टा वेरिएंट के मुकाबले अस्पताल में इलाज की आवश्यकता वाले मरीजों की संख्या मेंलगभग दो-तिहाई की कमी आई है.फिर तेजी से क्यों फैल रहा ओमिक्रॉन? द गार्डियन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार ओमिक्रॉन लोगों के फेफड़ों को उतना नुकसाननहीं पहुंचा पा रहा है, जितना कि डेल्टा और कोविड के बाकी वैरिएंट पहुंचातेहैं. ओमिक्रॉन वैरिएंट में फेफड़ों की तुलना में गले को संक्रमित करने की अधिकसंभावना है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे यह समझा सकता है कि ओमिक्रॉन बाकीवेरिएंट की तुलना में अधिक संक्रामक लेकिन कम खतरनाक क्यों है.इसे ऐसे समझिए कि अगर वायरस में गले को संक्रमित करने की क्षमता ज्यादा है, तो वहतेजी से फैलेगा, लेकिन ऐसे में संक्रमित व्यक्ति की हालत बिगड़ने की आशंका कम हीहै. वहीं अगर वायरस में फेफड़ों को संक्रमित करने की क्षमता ज्यादा है तो वह अधिकखतरनाक होगा लेकिन कम फैलने वाला होगा. इससे समझा जा सकता है कि ओमिक्रॉन कम खतरनाकहोने के बाद भी तेजी से क्यों फैल रहा है. ध्यान रहे कि ओमिक्रॉन पर आ रही तमामजानकारियाँ अभी बहुत नई हैं, और उससे संबंधित डेटा का विशेषज्ञों द्वारा रिव्यू अभीतक नहीं किया गया है. शायद कुछ जानकारियां सामने आगे आएं.ओमिक्रॉन के लक्षण क्या हैं? ओमिक्रॉन के लक्षणों के बारे में एक्सपर्ट्स का कहनाहै कि अगर लक्षणों पर ध्यान ना दिया गया तो केसेज और बढ़ने की संभावना है. लक्षणदिखने पर खुद को तुरंत आइसोलेट कर लें. और कोरोना की जांच करवाएं. आजतक की रिपोर्टके अनुसार दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर धीरेन गुप्ता ने बताया, ओमिक्रॉनपुराने वेरिएंट की तुलना में ऊपरी श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है, इसीलिएओमिक्रॉन में खांसी, जुकाम जैसे लक्षण होते हैं. ओमिक्रॉन के ज्यादातर मरीजों मेंएक खास लक्षण जरूर पाया जा रहा है और वो है भूख ना लगना. UK के 'ZOE COVID Study'ऐप के अनुसार इस वेरिएंट के कुछ लक्षण डेल्टा वेरिएंट से मिलते-जुलते हो सकते हैं.वहीं इस बार संक्रमण में कुछ अलग लक्षण भी पाए गए हैं. जैसे हल्का बुखार, गले मेंखराश, नाक बहना, छींक-खांसी आना, शरीर में बहुत दर्द और थकान, रात में बहुत पसीनाआना. ओमिक्रॉन वेरिएंट पर वैक्सीन कितनी असरदार?टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्स्पर्ट्स ने ओमिक्रॉन वेरिएंट केसामने वैक्सीन का प्रभाव कम होने को लेकर चेतावनी दी है. एक्सपर्टस का कहना है किओमिक्रॉन में जो म्युटेशन हुआ है वह इसे वैक्सीन की इम्युनिटी को मात देने मेंसक्षम बनाता देता है. इसीलिए वैक्सीनेशन के बाद भी ओमिक्रॉन का संक्रमण हो सकताहै. लेकिन अभी तक की स्टडीज में पता लगा है कि वैक्सीन ने ओमिक्रॉन संक्रमण कोगंभीर होने से रोकने में कारगर भूमिका जरूर निभाई है. एक्सपर्टस एक और बात भी बतातेहैं, इनके मुताबिक एक अच्छा संकेत यह भी है कि ओमिक्रॉन संक्रमित के शरीर में बनीएंटीबॉडी उसे डेल्टा और बाकी वेरिएंट के खतरे से बचाती हैं.लेकिन बात ये भी है कि अगर वायरस जितना फैलेगा, उसके फिर से म्यूटेट कर जाने केउतने ख़तरे बने रहेंगे. ये जीव विज्ञान का सिद्धांत है. ऐसे में किंचित कम ख़तरनाकफ़ॉर्म से किसी ज़्यादा ख़तरनाक फ़ॉर्म में वायरस बदले, संक्रमण की चेन टूटे, इसकेलिए हमें और हमारी सरकारों को साझा प्रयास करने होंगे.सरकारों को स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर करनी चाहिए, टेस्टिंग और मॉनीटरिंग ज्यादाहोनी चाहिए क्योंकि कोरोना के केसों में अचानक भारी उछाल आ सकता है. और जनता कोअपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी. यह बात सुनना तब और जरूरी हो जाता है, जब 5 राज्योंमें चुनावों का बिगुल बज चुका हो, और तमाम नेता लाखों की भीड़ को संबोधित कर रहेहों.