RSS के जॉइंट जनरल सेक्रेटरी दत्तात्रेय होसाबले ने समलैंगिकता के बारे में बातकरते हुए कहा कि ये क्राइम नहीं है. संघ परिवार, जो समलैंगिकता और सेक्स को लेकरअपने रूढ़िवादी-नैतिकतावादी विचारों के लिए जाना है, की तरफ से ऐसी बात का कहा जानाजरा चौंकाने वाला है. बीते गुरूवार इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बात करते हुएदत्तात्रेय ने कहा, "संघ का समलैंगिकता के बारे में बात करना जरूरी क्यों है?समलैंगिकता तब तक गुनाह नहीं है जब तक किसी और को नुकसान न पहुंचाए. किसको किसकेसाथ सेक्स करना है, ये उसका निजी मामला है." समलैंगिकता पर लोक सभा में चल रही बहसको तो भइया अब नया रुख मिलेगा. क्योंकि ये स्टेटमेंट तब आया है जब लोक सभा मेंसमलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर करने के लिए पेश किए गए शशि थरूर के प्राइवेटबिल का बीजेपी के सांसद कड़ा विरोध कर रहे थे. बीजेपी या आरएसएस से समलैंगिकता केपक्ष में कोई बात सुनने को मिले, ऐसा बहुत कम देखा गया है. नवंबर 2015 में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था सुप्रीम कोर्ट को समलैंगिकता पर लिए गए फैसले के बारेमें एक बार फिर से सोचना चाहिए. अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को'कॉन्जरवेटिव' बताते हुए कहा था, "अगर किसी चीज(समलैंगिकता) को लाखों लोग मानतेहों, तो आप उससे पल्ला नहीं झाड़ सकते. मुझे लगता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलतथा." इसके पहले आरएसएस के सदस्य राम माधव ने भी समलैंगिकता के अपराध होने पर डाउटजताया था. हालांकि पार्टी की सोच इसकी ठीक उल्टी दिखाई देती है. क्योंकि पिछले तीनमहीनों में समलैंगिकता के सपोर्ट में पेश किए गए शशि थरूर के प्राइवेट बिल को 2 बारमात खानी पड़ी है. बिल के विरोध में वोट करने वाली लोक सभा में बीजेपी के सांसदमेजॉरिटी में हैं. बता दें कि भारतीय पीनल कोड के सेक्शन 377 के तहत समलैंगिकताअपराध है. दिल्ली हाई कोर्ट के 2009 में समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर करदिया था. लेकिन दिसंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट 377 को वापस ले आया था. जिसके तहत'अननैचुरल' सेक्स करने पर 10 साल तक की जेल हो सकती है.