The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Home minister Rajnath Singh wears muslim cap in a iftar party in Lucknow, Would Narendra Modi be happy?

राजनाथ ने मुस्लिम टोपी पहन ली, लेकिन मोदी की राय जुदा है

तो क्या हिंदू नेताओं को सेक्युलरिज्म साबित करने के लिए टोपी पहननी चाहिए? या मुस्लिम नेताओं को तिलक लगाना चाहिए?

Advertisement
Img The Lallantop
मुलायम की बहू के साथ इफ्तार पार्टी में राजनाथ.
pic
कुलदीप
21 जून 2016 (अपडेटेड: 20 जून 2016, 05:13 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
Image embed
ये सवाल सोशल मीडिया पर फिर कुलांचे भर रहा है. क्यों? क्योंकि मोदी सरकार में होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने मुस्लिम टोपी पहन ली है. सोमवार को वह लखनऊ में रोज़ा इफ्तार में शरीक हुए. जगह थी दिलकुशा इलाके की दरगाह हजरत कासिम. यहां सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव भी वहां थी. अपर्णा 2017 यूपी चुनाव में लखनऊ कैंट से सपा प्रत्याशी भी हैं. वह राजनाथ से मिलीं तो तुरंत उनके पांव छू लिए. फिर दोनों राजनीतिक विरोधियों ने साथ बैठकर इफ्तारी की. राजनाथ के सिर पर मुस्लिम टोपी चमक रही थी.
Image embed
Image embed
'टोपी' पहनना सही है या नहीं, इस पर बड़े मतभेद अपने यहां रहे हैं. कुछ मानते हैं कि यह सिर्फ प्रतीक है और इससे दोनों समुदायों में भरोसा कायम होता है. कुछ इसे सिर्फ राजनीतिक फायदे और मुस्लिम तुष्टिकरण का हथकंडा मानते हैं. वे कहते हैं कि मुसलमानों का भला करने के लिए उनकी टोपी पहनना जरूरी नहीं. नीयत को तो आप कैसे आंकेंगे, लेकिन ये बात भी पर्याप्त लॉजिकल मालूम होती है. बीजेपी आम तौर पर इसमें दूसरे मत वाली पार्टी मानी जाती है. उसके ज्यादातर बड़े नेता मुस्लिम टोपी पहने हुए नहीं मिलते. बल्कि ठुकराते हुए जरूर मिल जाते हैं. राजनाथ की इन तस्वीरों से साल 2011 याद आ जाता है. जब एक 'सद्भावना सम्मेलन' में एक मौलवी साहब ने नरेंद्र मोदी को मंच पर मुस्लिम टोपी पहनानी चाही, लेकिन मोदी ने हाथ पकड़कर मना कर दिया. इस पर काफी विवाद हुआ और विपक्षी पार्टियों ने इसे मोदी के 'मुस्लिम विरोध' का सबूत बताया.
Image embed
इसके तीन साल बाद 2014 में जब बीजेपी ने मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया और मोदी जब व्यापक स्वीकार्यता की खोज में निकले, तब उन्होंने एक इंटरव्यू में इस पर सफाई भी दी.
Image embed
लेकिन मोदी के इन विचारों से अवगत होने के बावजूद राजनाथ ने भी टोपी पहन ली है. सोशल मीडिया पर वे लोग जो बीजेपी से ज्यादा, मोदी को पसंद करते हैं, वे तो नाराज होंगे ही. हालांकि जानने वाले जानते हैं कि राजनाथ को पर्सनली कभी मुस्लिम टोपी पहनने से गुरेज नहीं रहा. बल्कि बीजेपी में वह अपेक्षाकृत रूप से धार्मिक तौर पर लिबरल नेता ही माने जाते हैं. लखनऊ के शिया मौलवियों से उनकी ठीक-ठाक बनती है. सब जानते हैं कि प्रदेश में उनकी राजनीति का आधार धर्म नहीं रहा, जाति ही ज्यादा रहा है. 2014 के उसी इंटरव्यू में मुसलमानों के बारे में अपना विजन बताते हुए मोदी ने कहा था, 'वह भले ही टोपी पहने, एक हाथ में कुरान भी रखे, लेकिन उसके दूसरे हाथ में कंप्यूटर होना चाहिए.' तो क्या हिंदू नेताओं को सेक्युलरिज्म साबित करने के लिए टोपी पहननी चाहिए? या मुस्लिम नेताओं को तिलक लगाना चाहिए? आपको क्या लगता है? [total-poll id=23978]

Advertisement

Advertisement

()