11 रुपए चढ़ाओ पापमुक्त का सर्टिफिकेट पाओ, ऑफर असीमित समय के लिए
राजस्थान में वह मंदिर है जहां से आपको पापमुक्त होने का सर्टिफिकेट मिल सकता है. मोहर, दस्तखत के साथ. उसको यमराज के यहां कैसे ले जाओगे इसका प्लान करो.
Advertisement

फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
गंगा नहाओ सारे पाप धुल जाएंगे. लेकिन उसमें एक प्रॉब्लम होगी. वहां से सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा. उसके लिए आपको "गौतमेश्वर महादेव पापमोचन तीर्थ" आना पड़ेगा. राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में है ये शिव मंदिर. जहां बाकायदे मोहर दस्तखत के साथ 'पाप मुक्त' का सर्टिफिकेट दिया जाता है.
इस मंदिर में पाप दोष निवारण की सदियों पुरानी परंपरा है. नंदकिशोर शर्मा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि "आसपास के गांवों से लोग आते हैं. डुबकी लगाते हैं और सर्टिफिकेट पाते हैं." आजादी के बाद से अब तक सर्टिफिकेट हासिल करने वालों का रिकॉर्ड कायम हो चुका है.
पाप मुक्त सर्टिफिकेट प्राप्त करने का तरीका
इस मंदिर में मंदाकिनी कुंड है. एक पुजारी जी से मिलिए. पुजारियों की फौज को कहते हैं अमीनत कचहरी. ये एक सर्टिफिकेट का रेट लेते हैं एक रुपया. और मात्र दस रुपए कुंड में नहाने और 'दोष निवारण' का चार्ज. ज्यादा दौड़भाग नहीं. आपके हाथ आ जाएगा मंदिर की मोहर लगा सर्टिफिकेट.
बहुत पुरानी परंपरा है
आदिवासियों का हरिद्वार कहते हैं इस जगह को. मई के महीने में लाखों लोग आते हैं चढ़ावा करने और कुंड में डुबकी लगाने. पिछले कुछ सालों में इसकी प्रसिद्धि बहुत बढ़ गई है. लेकिन सर्टिफिकेट बनने कम हो गए हैं. आठ दिन के मेले में सिर्फ तीन सर्टिफिकेट बने.
ऐसी मान्यता है कि गौतम ऋषि के हाथ से हो गया था किसी जानवर का मर्डर. उन्होंने खुद को सजा दी. फिर यहां आकर कुंड में डुबकी लगाई और पाप धो लिए. तब से ये परंपरा चल रही है. अब जो किसान हैं वो खेती के दौरान कितने ही कीड़ों को मार देते हैं. दवाई डालकर. कितने अंडे फूट जाते हैं. कित्ते पक्षी बेघर हो जाते हैं. तो इस पाप का बोझ 'ऊपर' न झेलना पड़े. इसके लिए वो यहां से सर्टिफाइड पाप मुक्त होने की कोशिश करते हैं. लेकिन दिक्कत एक बात की है. क्या ये सर्टिफिकेट मरने के बाद यमराज के दरबार में पेश कर पाएंगे?
बहुत पुरानी परंपरा है
आदिवासियों का हरिद्वार कहते हैं इस जगह को. मई के महीने में लाखों लोग आते हैं चढ़ावा करने और कुंड में डुबकी लगाने. पिछले कुछ सालों में इसकी प्रसिद्धि बहुत बढ़ गई है. लेकिन सर्टिफिकेट बनने कम हो गए हैं. आठ दिन के मेले में सिर्फ तीन सर्टिफिकेट बने.
ऐसी मान्यता है कि गौतम ऋषि के हाथ से हो गया था किसी जानवर का मर्डर. उन्होंने खुद को सजा दी. फिर यहां आकर कुंड में डुबकी लगाई और पाप धो लिए. तब से ये परंपरा चल रही है. अब जो किसान हैं वो खेती के दौरान कितने ही कीड़ों को मार देते हैं. दवाई डालकर. कितने अंडे फूट जाते हैं. कित्ते पक्षी बेघर हो जाते हैं. तो इस पाप का बोझ 'ऊपर' न झेलना पड़े. इसके लिए वो यहां से सर्टिफाइड पाप मुक्त होने की कोशिश करते हैं. लेकिन दिक्कत एक बात की है. क्या ये सर्टिफिकेट मरने के बाद यमराज के दरबार में पेश कर पाएंगे?
