वो 6 हिंदी फिल्में जिन्हें लेकर झूठ बोला गया कि हॉलीवुड ने उनकी नकल की
नकल आज तक बॉलीवुड ने ही की है हॉलीवुड फिल्मों की, लेकिन खुशफहमी हमने पाल ही ली.
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यश चोपड़ा की फिल्म "डर" में शाहरुख का किरदार जो मार्टिन स्कॉरसेज़ी की "केप फीयर" में रॉबर्ट डिनीरो के कैरेक्टर से लिया गया था.
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ऋतिक रोशन की 'काबिल' के राइट्स खरीदकर हॉलीवुड में रीमेक बनाया जा सकता है, ऐसी चर्चा है. हालांकि संजय गुप्ता के डायरेक्शन वाली ये फिल्म भी ओरिजिनल कहानी वाली है पक्का नहीं है, क्योंकि कोरियाई थ्रिलर 'ब्रोकन' और इसमें बहुत समानताएं हैं. ख़ैर, जब खबर आई कि 'काबिल' के राइट्स हॉलीवुड में लेने की कोशिश हो रही है तो लगा कि हमेशा बॉलीवुड ही हॉलीवुड की नकल नहीं करता है, हम भी कुछ हैं.
कुछ हद तक बात सही है. कुछेक इंडियन फिल्में हैं जिनसे बाहर वालों ने भी प्रेरणा ली. एक-आध ऑफिशियल रीमेक भी बने हैं. लेकिन ज्यादातर जिन फिल्मों को लेकर कहा जाता है कि हॉलीवुड ने इनसे प्रेरणा ली और इनकी नकल की, वो गलत है. बात ऐसी कुछ फिल्मों की.
#1. डर (1993)
डायरेक्टर यश चोपड़ा की 'डर' में शाहरुख खान ने राहुल का रोल किया था जो किरण (जूही चावला) से एकतरफा प्यार करता है और उसका जुनून ख़ूनी रूप ले लेता है. उनका डायलॉग "क क क किरण" बहुत फेमस हुआ था.
कहा जाता है कि 1996 में आई मार्क वॉलबर्ग और रीस विदरस्पून की फिल्म 'फीयर' इस बॉलीवुड फिल्म से प्रेरित थी. क्योंकि डर का अंग्रेजी टाइटल यही होता है. दोनों की कहानी करीब एक जैसी है कि एक लड़का एक लड़की का पीछा करता है. 'डर' में वो सीन है जिसमें राहुल अपने सीने पर चाकू से किरण का नाम लिख लेता है औऱ खून बहता रहता है. 'फीयर' में भी ऐसा ही सीन होता है.
असल में यश चोपड़ा ने 1991 में आई डायरेक्टर मार्टिन स्कॉरसेज़ी की साइकोलॉजिकल थ्रिलर 'केप फीयर' से अपनी फिल्म की कहानी उठाई थी. 'केप फीयर' का प्लॉट विस्तृत था, चोपड़ा ने उसमें लड़की के प्रति ऑब्सेस्ड पुरुष वाले हिस्से को लेकर अपनी फिल्म बनाई. मूल फिल्म में रॉबर्ट डिनीरो ने जैसे आतंक का निर्माण किया था बाद की दोनों फिल्मों शाहरुख या मार्क वॉलबर्ग उसका दस परसेंट भी नहीं कर पाए.
#2. जब वी मेट (2007)
इम्तियाज की लिखी और निर्देशित ये फिल्म पंजाबी लड़की गीत (करीना कपूर) की कहानी थी, जो अपने घर जा रही होती है और ट्रेन पर आदित्य (शाहिद कपूर) से मिलती है जो एक बिजनेसमैन है और जिंदगी से बहुत निराश है. गीत उसके जीने के ढंग को बदल देती है. वो मन में उसे चाहने लगता है लेकिन गीत को किसी और से प्यार है जिसे पाने के लिए वो घर से भाग जाती है.
हमारे यहां मानते हैं कि इसी से प्रेरणा लेकर तीन साल बाद आई रोमैंटिक कॉमेडी 'लीप ईयर' (2010) बनी. भारतीय जड़ों वाले डायरेक्टर आनंद टकर की ये फिल्म एना नाम की बिजनेसवुमन की कहानी है जो अपने बॉयफ्रेंड को प्रपोज़ करने के लिए बोस्टन से डबलिन की यात्रा तय करती है. इस जर्नी में उसकी मदद एक युवक करता है.
दरअसल ये फिल्म 'जब वी मेट' की रीमेक नहीं थी. 'लीप ईयर' की असल प्रेरणा 1945 में रिलीज हुई ब्रिटिश फिल्म 'आई नो वेयर आई एम गोइंग!' थी जिसमें जोएन नाम की महिला एक रईस कारोबारी से शादी करने के लिए जर्नी करती है. इसी दौरान उसकी मुलाकात एक नैवी ऑफिसर से होती है जिसे एना से प्यार हो जाता है. बहुत संभव है कि 'जब वी मेट' की कहानी भी उसी फिल्म से प्रेरित थी. 1942 में आई इटैलियन कॉमेडी 'फोर स्टेप्स इन द क्लाउड्स' भी इम्तियाज की फिल्म की प्रेरणा हो सकती है.
#3. मैंने प्यार क्यों किया (2005)
सलमान खान की ये फिल्म याद होगी. इसमें 'जस्ट चिल चिल' गाना था. डेविड धवन ने डायरेक्ट की थी. ये एक डॉक्टर की कहानी थी जो अपनी गर्लफ्रेंड को पटाए रखने के लिए अपनी सेक्रेटरी को पत्नी बनाकर पेश करता है. वहीं वो सेक्रेटरी सच में उससे प्यार करती है.
फिर 2011 में एक्टर एडम सैंडलर और जेनिफर एनिस्टन की हॉलीवुड रोमांटिक कॉमेडी 'जस्ट गो विद इट' रिलीज हुई. मानते हैं कि ये सलमान वाली फिल्म की रीमेक थी क्योंकि इसमें बहुत सारे सीन हूबहू वैसे लगते हैं.
हालांकि ऐसा नहीं है. ये दोनों ही फिल्में 1969 में आई अमेरिकी कॉमेडी 'कैक्टस फ्लावर' से प्रेरित हैं. इस मूल फिल्म में डॉक्टर विंस्टन का कैरेक्टर टोनी से प्यार करता है लेकिन उससे शादी नहीं करता. उसने बोल रखा है कि उसके बीवी और बच्चे हैं. लेकिन जब टोनी आत्महत्या करने की कोशिश करती है तब वो उससे शादी करने का मन बना लेता है लेकिन टोनी पहले उसकी बीवी से मिलना चाहती है. तो डॉक्टर अपनी सेक्रेटरी को अपनी नकली बीवी बनाकर उसे मिलाता है.
#4. दो आंखें बारह हाथ (1957)
महाराष्ट्र में औंध रियासत के महाराजा भावनराव ने 1939 में स्वतंत्रपुर नाम की बस्ती बनाई थी जिसमें कैदियों को आज़ाद रखा जाता था. इस open prison की कहानी पर 1957 में वी. शांताराम ने 'दो आंखें बारह हाथ' जैसी महान फिल्म बनाई. कहानी में आदिनाथ नाम का जेल वार्डन छह बड़े अपराधियों को अपनी जिम्मेदारी पर कैद से निकालता है और उन्हें सुधारने के लिए ओपन प्रिजन एक्सपेरिमेंट करता है. उसका मानना है कि हर इंसान में सुधार की गुंजाइश होती है.
इसके दस साल बाद 1967 में 'द डर्टी डज़न' नाम की वॉर मूवी बनाई गई. इसमें दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटेन में एक मेजर को जिम्मा सौंपा जाता है कि वो जेल की सजा काट रहे एक दर्जन पूर्व-सैनिकों को प्रशिक्षित करे और युद्ध में हिस्सा लेने के लिए तैयार करे.
ऐसा कहा जाता है कि ये फिल्म भारत की 'दो आंखें बारह हाथ' से प्रेरित थी. हालांकि ये पुष्ट नहीं है क्योंकि 'द डर्टी डज़न' 1965 में प्रकाशित हुए ई. एम. नेथनसन के इसी नाम वाले नॉवेल पर आधारित थी. हो सकता है नेथनसन ने भारत के ओपन प्रिज़न एक्सपेरिमेंट के बारे में पढ़ा हो और विदेशी भाषा में डब शांताराम की फिल्म को भी देखा हो, लेकिन उनकी असल प्रेरणा वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान अमेरिकी आर्मी की 101 एयरबोर्न डिविजन के 13 सैनिकों के बारे में फैली किंवदंतियां थीं जिन्हें युद्ध संवाददाता 'द फिल्दी थर्टीन' नाम से संबोधित किया करते थे.
#5. विकी डोनर (2012)
आयुष्मान खुराना अभिनीत 'विकी डोनर' के एक साल बाद 2013 में एक्टर विंस वॉन की 'डिलीवरी मैन' रिलीज हुई थी. दोनों की कहानी ऐसे युवकों के बारे में थी जिनके शुक्राणु बहुत उर्वर होते हैं और उनसे बहुत सारे बच्चे पैदा होते हैं. हम इंडिया में ये कहते हैं कि 'विकी डोनर' वो हिंदी फिल्म थी जिससे प्रेरणा लेकर हॉलीवुड ने 'डिलीवरी मैन' बनाई. पर ये सच नहीं है.
असल में 2011 में डायरेक्टर केन स्कॉट ने कैनेडियन कॉमेडी 'स्टारबक' बनाई थी. 'विकी डोनर' के मेकर्स ने इससे अपनी कहानी उठाई थी. 'डिलीवरी मैन' तो 'स्टारबक' की रीमेक थी. यहां तक कि दोनों ही फिल्में केन स्कॉट ने ही डायरेक्ट की थी.
#6. छोटी सी बात (1976)
बहुत बेहतरीन निर्देशकों में से एक बासु चैटर्जी की ये फिल्म एक ऐसे शर्मीले युवक (अमोल पालेकर) की कहानी है जो एक लड़की (विद्या सिन्हा) से प्यार करता है लेकिन इज़हार नहीं कर पाता. बार-बार फेल होता है. ऐसे में वो कर्नल सिंह (अशोक कुमार) की शरण में जाता है जो उसके लव गुरु बनते हैं और उसका कायापलट कर देते हैं.
इस फिल्म और 2005 में रिलीज हुई विल स्मिथ स्टारर रोमैंटिक कॉमेडी 'हिच' में समानताएं थीं इसलिए ये कह दिया गया कि ये हॉलीवुड फिल्म अपनी वाली फिल्म 'छोटी सी बात' से प्रेरित थी. हालांकि ये पुष्ट नहीं है. हां, 2007 में रिलीज हुई डेविड धवन की सलमान और गोविंदा स्टारर 'पार्टनर' जरूर 'हिच' की नकल थी.
वैसे 'छोटी सी बात' भी एकदम मौलिक स्क्रिप्ट नहीं थी, वो 1960 में रिलीज हुई ब्रिटिश कॉमेडी 'स्कूल फॉर स्काउंड्रल्स' से प्रेरित थी.
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डायरेक्टर यश चोपड़ा की 'डर' में शाहरुख खान ने राहुल का रोल किया था जो किरण (जूही चावला) से एकतरफा प्यार करता है और उसका जुनून ख़ूनी रूप ले लेता है. उनका डायलॉग "क क क किरण" बहुत फेमस हुआ था.
कहा जाता है कि 1996 में आई मार्क वॉलबर्ग और रीस विदरस्पून की फिल्म 'फीयर' इस बॉलीवुड फिल्म से प्रेरित थी. क्योंकि डर का अंग्रेजी टाइटल यही होता है. दोनों की कहानी करीब एक जैसी है कि एक लड़का एक लड़की का पीछा करता है. 'डर' में वो सीन है जिसमें राहुल अपने सीने पर चाकू से किरण का नाम लिख लेता है औऱ खून बहता रहता है. 'फीयर' में भी ऐसा ही सीन होता है.
असल में यश चोपड़ा ने 1991 में आई डायरेक्टर मार्टिन स्कॉरसेज़ी की साइकोलॉजिकल थ्रिलर 'केप फीयर' से अपनी फिल्म की कहानी उठाई थी. 'केप फीयर' का प्लॉट विस्तृत था, चोपड़ा ने उसमें लड़की के प्रति ऑब्सेस्ड पुरुष वाले हिस्से को लेकर अपनी फिल्म बनाई. मूल फिल्म में रॉबर्ट डिनीरो ने जैसे आतंक का निर्माण किया था बाद की दोनों फिल्मों शाहरुख या मार्क वॉलबर्ग उसका दस परसेंट भी नहीं कर पाए.
#2. जब वी मेट (2007)
इम्तियाज की लिखी और निर्देशित ये फिल्म पंजाबी लड़की गीत (करीना कपूर) की कहानी थी, जो अपने घर जा रही होती है और ट्रेन पर आदित्य (शाहिद कपूर) से मिलती है जो एक बिजनेसमैन है और जिंदगी से बहुत निराश है. गीत उसके जीने के ढंग को बदल देती है. वो मन में उसे चाहने लगता है लेकिन गीत को किसी और से प्यार है जिसे पाने के लिए वो घर से भाग जाती है.
हमारे यहां मानते हैं कि इसी से प्रेरणा लेकर तीन साल बाद आई रोमैंटिक कॉमेडी 'लीप ईयर' (2010) बनी. भारतीय जड़ों वाले डायरेक्टर आनंद टकर की ये फिल्म एना नाम की बिजनेसवुमन की कहानी है जो अपने बॉयफ्रेंड को प्रपोज़ करने के लिए बोस्टन से डबलिन की यात्रा तय करती है. इस जर्नी में उसकी मदद एक युवक करता है.
दरअसल ये फिल्म 'जब वी मेट' की रीमेक नहीं थी. 'लीप ईयर' की असल प्रेरणा 1945 में रिलीज हुई ब्रिटिश फिल्म 'आई नो वेयर आई एम गोइंग!' थी जिसमें जोएन नाम की महिला एक रईस कारोबारी से शादी करने के लिए जर्नी करती है. इसी दौरान उसकी मुलाकात एक नैवी ऑफिसर से होती है जिसे एना से प्यार हो जाता है. बहुत संभव है कि 'जब वी मेट' की कहानी भी उसी फिल्म से प्रेरित थी. 1942 में आई इटैलियन कॉमेडी 'फोर स्टेप्स इन द क्लाउड्स' भी इम्तियाज की फिल्म की प्रेरणा हो सकती है.
#3. मैंने प्यार क्यों किया (2005)
सलमान खान की ये फिल्म याद होगी. इसमें 'जस्ट चिल चिल' गाना था. डेविड धवन ने डायरेक्ट की थी. ये एक डॉक्टर की कहानी थी जो अपनी गर्लफ्रेंड को पटाए रखने के लिए अपनी सेक्रेटरी को पत्नी बनाकर पेश करता है. वहीं वो सेक्रेटरी सच में उससे प्यार करती है.
फिर 2011 में एक्टर एडम सैंडलर और जेनिफर एनिस्टन की हॉलीवुड रोमांटिक कॉमेडी 'जस्ट गो विद इट' रिलीज हुई. मानते हैं कि ये सलमान वाली फिल्म की रीमेक थी क्योंकि इसमें बहुत सारे सीन हूबहू वैसे लगते हैं.
हालांकि ऐसा नहीं है. ये दोनों ही फिल्में 1969 में आई अमेरिकी कॉमेडी 'कैक्टस फ्लावर' से प्रेरित हैं. इस मूल फिल्म में डॉक्टर विंस्टन का कैरेक्टर टोनी से प्यार करता है लेकिन उससे शादी नहीं करता. उसने बोल रखा है कि उसके बीवी और बच्चे हैं. लेकिन जब टोनी आत्महत्या करने की कोशिश करती है तब वो उससे शादी करने का मन बना लेता है लेकिन टोनी पहले उसकी बीवी से मिलना चाहती है. तो डॉक्टर अपनी सेक्रेटरी को अपनी नकली बीवी बनाकर उसे मिलाता है.
#4. दो आंखें बारह हाथ (1957)
महाराष्ट्र में औंध रियासत के महाराजा भावनराव ने 1939 में स्वतंत्रपुर नाम की बस्ती बनाई थी जिसमें कैदियों को आज़ाद रखा जाता था. इस open prison की कहानी पर 1957 में वी. शांताराम ने 'दो आंखें बारह हाथ' जैसी महान फिल्म बनाई. कहानी में आदिनाथ नाम का जेल वार्डन छह बड़े अपराधियों को अपनी जिम्मेदारी पर कैद से निकालता है और उन्हें सुधारने के लिए ओपन प्रिजन एक्सपेरिमेंट करता है. उसका मानना है कि हर इंसान में सुधार की गुंजाइश होती है.
इसके दस साल बाद 1967 में 'द डर्टी डज़न' नाम की वॉर मूवी बनाई गई. इसमें दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटेन में एक मेजर को जिम्मा सौंपा जाता है कि वो जेल की सजा काट रहे एक दर्जन पूर्व-सैनिकों को प्रशिक्षित करे और युद्ध में हिस्सा लेने के लिए तैयार करे.
ऐसा कहा जाता है कि ये फिल्म भारत की 'दो आंखें बारह हाथ' से प्रेरित थी. हालांकि ये पुष्ट नहीं है क्योंकि 'द डर्टी डज़न' 1965 में प्रकाशित हुए ई. एम. नेथनसन के इसी नाम वाले नॉवेल पर आधारित थी. हो सकता है नेथनसन ने भारत के ओपन प्रिज़न एक्सपेरिमेंट के बारे में पढ़ा हो और विदेशी भाषा में डब शांताराम की फिल्म को भी देखा हो, लेकिन उनकी असल प्रेरणा वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान अमेरिकी आर्मी की 101 एयरबोर्न डिविजन के 13 सैनिकों के बारे में फैली किंवदंतियां थीं जिन्हें युद्ध संवाददाता 'द फिल्दी थर्टीन' नाम से संबोधित किया करते थे.
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आयुष्मान खुराना अभिनीत 'विकी डोनर' के एक साल बाद 2013 में एक्टर विंस वॉन की 'डिलीवरी मैन' रिलीज हुई थी. दोनों की कहानी ऐसे युवकों के बारे में थी जिनके शुक्राणु बहुत उर्वर होते हैं और उनसे बहुत सारे बच्चे पैदा होते हैं. हम इंडिया में ये कहते हैं कि 'विकी डोनर' वो हिंदी फिल्म थी जिससे प्रेरणा लेकर हॉलीवुड ने 'डिलीवरी मैन' बनाई. पर ये सच नहीं है.
असल में 2011 में डायरेक्टर केन स्कॉट ने कैनेडियन कॉमेडी 'स्टारबक' बनाई थी. 'विकी डोनर' के मेकर्स ने इससे अपनी कहानी उठाई थी. 'डिलीवरी मैन' तो 'स्टारबक' की रीमेक थी. यहां तक कि दोनों ही फिल्में केन स्कॉट ने ही डायरेक्ट की थी.
#6. छोटी सी बात (1976)
बहुत बेहतरीन निर्देशकों में से एक बासु चैटर्जी की ये फिल्म एक ऐसे शर्मीले युवक (अमोल पालेकर) की कहानी है जो एक लड़की (विद्या सिन्हा) से प्यार करता है लेकिन इज़हार नहीं कर पाता. बार-बार फेल होता है. ऐसे में वो कर्नल सिंह (अशोक कुमार) की शरण में जाता है जो उसके लव गुरु बनते हैं और उसका कायापलट कर देते हैं.
इस फिल्म और 2005 में रिलीज हुई विल स्मिथ स्टारर रोमैंटिक कॉमेडी 'हिच' में समानताएं थीं इसलिए ये कह दिया गया कि ये हॉलीवुड फिल्म अपनी वाली फिल्म 'छोटी सी बात' से प्रेरित थी. हालांकि ये पुष्ट नहीं है. हां, 2007 में रिलीज हुई डेविड धवन की सलमान और गोविंदा स्टारर 'पार्टनर' जरूर 'हिच' की नकल थी.
वैसे 'छोटी सी बात' भी एकदम मौलिक स्क्रिप्ट नहीं थी, वो 1960 में रिलीज हुई ब्रिटिश कॉमेडी 'स्कूल फॉर स्काउंड्रल्स' से प्रेरित थी.
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