HIV संक्रमित चाची ने नाबालिग भतीजे के साथ जो किया, पढ़कर कान खड़े हो जाएंगे!
महिला के पति की बीते दिसंबर में ही एड्स के चलते हुई है मौत
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पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. (सांकेतिक तस्वीर)
उत्तराखंड (Uttarakhand) के ऊधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar) में पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया है. इस महिला पर अपने 15 साल के भतीजे का यौन शोषण करने का आरोप है. बच्चे के परिजनों ने महिला को HIV संक्रमित बताया है और आरोप लगाया है कि आरोपी महिला बच्चे को भी संक्रमित करना चाहती थी.
क्या है मामला?
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मामले की जांच कर रहीं सब-इंस्पेक्टर रीता चौहान ने बताया कि आरोपी महिला ने होली से कुछ दिन पहले बच्चे का शोषण किया था. उन्होंने बताया,
मिली जानकारी के अनुसार बीते शनिवार, 2 अप्रैल को आरोपी महिला जब पीड़ित बच्चे को धमका रही थी, तभी बच्चे की मां मौके पर पहुंच गई. बच्चे ने अपनी मां को सारी बात बताई. जिसके बाद बच्चे के मां-बाप ने स्थानीय पुलिस थाने में महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. आजतक से जुड़े रमेश चंद्रा की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित बच्चे के पिता ने महिला पर आरोप लगाया है कि महिला का पति HIV संक्रमित था और वह भी संक्रमित है. पिता के मुताबिक इसके बावजूद महिला ने उनके बेटे से शारीरिक संबंध केवल इसलिए बनाए, क्योंकि वह बच्चे की जिंदगी खराब करना चाहती थी.
महिला पर क्या कार्रवाई हुई?
इस मामले को लेकर उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर इलाके के क्षेत्राधिकारी (सीओ) अभय प्रताप सिंह ने बताया,
पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि महिला के खिलाफ IPC की धारा 270 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5 और 6 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया गया है. IPC की धारा 270 के अंतर्गत उन लोगों पर मामला दर्ज किया जाता है, जो किसी गंभीर संक्रामक बीमारी को फैलाने के लिए जिम्मेदार हों. इसके तहत दोषी पाए जाने पर 2 साल की सजा या जुर्माना या फिर दोनों ही तरीके से दंडित किया जा सकता है.
वहीं, पॉक्सो ऐक्ट की धारा 5 और 6 के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर मौत की सजा भी हो सकती है. पॉक्सो एक्ट का अंग्रेजी में पूरा नाम है 'Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act, 2012'. इस ऐक्ट को बच्चों को यौन अपराधों, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी से बचाने के लिए बनाया गया था. ये ऐक्ट इसलिए भी बनाया गया था, ताकि बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों का ट्रायल आसान हो सके और अपराधियों को जल्द सजा मिल सके. इस ऐक्ट में 18 साल से कम उम्र के पीड़ितों को बच्चे की कैटेगरी में रखा जाता है.

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