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हिंदू शरणार्थी बनकर 24 साल पहले भारत आया, नागरिकता ली, अब पाक का जासूस निकला!

1998 में भागचंद परिवार समेत दिल्ली आया था. संजय कलोनी में रह कर टैक्सी चलाता था और मजदूरी करता था.

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22 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 22 अगस्त 2022, 10:35 PM IST)
Hindu refugee with Indian citizenship was spying, police arrested him from Delhi
दिल्ली से पाकिस्तानी जासूस गिरफ़्तार
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राजस्थान इंटेलिजेंस ने दिल्ली से एक कथित पाकिस्तानी जासूस को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है आरोपी 24 साल पहले पाकिस्तान से भारत आया था. आरोपी ने हिंदू शरणार्थी के तौर पर भारत की नागरिकता भी ले ली थी. ये शख्स दिल्ली में रह रहा था. आरोप है कि दिल्ली में रह कर ये भारत की सेंसिटिव जानकारियों को पाकिस्तान भेज रहा था. 

आरोपी का नाम भागचंद बताया जा रहा है. साल 1998 में भागचंद पूरे परिवार के साथ पाकिस्तान से भारत आया था. तीन साल पहले इसे भारत की नागरिकता भी मिल गई थी. बताया जा रहा है कि भागचंद दिल्ली में मजदूरी और टैक्सी चलाने का काम करता था. भागचंद के परिवार में माता-पिता को मिलाकर कुल 8 लोग हैं.

आज तक की खबर के मुताबिक पूरी कार्रवाई राजस्थान पुलिस की सीआईडी-इंटेलिजेंस सेल ने किया है. इंटेलिजेंस के महानिदेशक उमेश मिश्रा ने बताया कि भागचंद का नाम एक दूसरे जासूस की गिरफ्तारी के बाद सामने आया. उन्होंने बताया कि नारायण लाल गड़ारी नाम के शख्स को 14 अगस्त को भीलवाड़ा से गिरफ़्तार किया गया था. नारायण से पुछताछ मे भागचंद के बारे मे पुलिस को पता चला. इसके बाद दिल्ली आकर उसे गिरफ्तार किया गया.

जांच मे सामने आया है कि भागचंद सिम खरीदता था जिनसे अलग अलग सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाए जाते थे. फिर इन सिम कार्ड को बच्चों के कपड़े और मसालों के डिब्बों मे छिपाकर मुंबई भेज देता था. जयपुर मे ज्वाइंट इंटेलिजेंस की टीमें दोनों आरोपियोें से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि जासूसी के सभी तारों को जोड़ा जा सके.

आरोप हैं कि भागचंद पैसों के लालच में पाकिस्तान को भारतीय फोन नंबर उपलब्ध करवाता था. इसके अलावा आरोपी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों की तस्वीरें भी पाकिस्तान भेजता करता था.

नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक भागचंद की पत्नी ने बताया कि 19 अगस्त की सुबह कुछ लोग जोमैटो की डिलीवरी के बहाने आए थे. उन्होंने दरवाजा खुलवाया और उसके बाद भागचंद को गिरफ्तार कर लिया गया.

(ये खबर आपके लिए हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे सुमेश ने लिखी है.)

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