'इन दोनों की शादी हुई तो दंगे भड़क जाएंगे'
मंजीत भाटी और सलमा को शादी का सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा है. कोढ़ में खाज ये कि दोनों आते हैं दादरी टाउन से. दादरी तो याद ही होगा.
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Source: Mail Today
दादरी इस बार फिर खबरों में है. इस बार नफरत की नहीं, प्यार की वजह से. वहां एक प्रेम कहानी है. और उस प्रेम की दुश्वारियां हैं. ये प्रेमी जोड़ा है मंजीत भाटी और सलमा. सलमा का नाम बदल कर सपना आर्या हो गया है. इनकी शादी को 6 महीने हो गए हैं. लेकिन इनकी शादी रजिस्टर्ड नहीं हो पाई. वजह है वो डर, कि हिंदू मुस्लिम दंगे भड़क जाएंगे.
पिछले साल वहां बहुत हंगामा तब कटा था. जब 52 साल के इखलाक का बेरहमी से मर्डर कर दिया गया था. और उसके बेटे को अधमरा कर हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया था. इस शक में, कि उसके फ्रिज में गोमांस रखा था. बाद में जांच हुई, रिपोर्ट आई कि वो गोमांस नहीं बकरे का मीट था. तब से वह एरिया संवेदनशील माना जाता है. उसके चक्कर में मुसीबत हो गई है इन प्रेमियों की.
अब इस लव स्टोरी का हर एंगल आपको दिखाते हैं. स्टेप बाई स्टेप. थोड़ा याद करोगे तो कयामत से कयामत तक पिच्चर के सीन याद आएंगे. कहानी उसी तरह शुरू होती है. पिछले साल 19 अक्टूबर को मंजीत और सलमा बाइक से भाग लिए. दादरी में अपना गांव चितेहरा छोड़ कर पहुंच गए इलाहाबाद शहर.
शादी का फैसला जल्दी में नहीं लिया था. 24 साल के मंजीत और 20 साल की सलमा काफी टाइम से दोस्त थे. सलमा के मां बाप उसके बचपन में दुनिया से रुख्सत हो गए. घर के और बड़े बुजुर्ग उस पर शादी का दबाव बना रहे थे. वो भी एक अधेड़ के साथ. दोनों ने आपस में बात की. समझ बूझ कर, आगा पीछा सोच कर निकल भागे.
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वहां जाकर दोनों ने आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली. सलमा ने हिंदू धर्म अपना लिया और सपना हो गईं. उसके बाद शुरू हुईं असली दिक्कतें. दोनों को सपना के घर वालों की तरफ से धमकियां मिलने लगीं. कि घर आओ लौट कर. काट देंगे बहा देंगे वगैरह. दोनों ने पुलिस के पास जाकर अपनी कहानी बताई और प्रोटेक्शन मांगा. कहीं कोई सुनवाई नहीं. पांच महीने से लगातार दोनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं. डरे सहमे हुए अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन कराने को गुहार लगा रहे हैं. लेकिन ऑफिसर्स सिर्फ इस डर से उनको टरका देते हैं कि इलाके में दंगा भड़क जाएगा.
गौतम बुद्ध नगर के डीएम एनपी सिंह ने फिलहाल वादा किया है. कि वो सीनियर ऑफिसर्स से बात करके ये शादी रजिस्टर्ड कराएंगे. वो बताते हैं "दोनों बालिग हैं. उनकी शादी के रजिस्ट्रेशन में यूं तो कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन इस बात से इन्कार भी नहीं किया जा सकता जो अफसर बता रहे हैं. इनकी शादी ऑफिसियल होने से दंगे भड़कने का खतरा तो है ही."
एक रजिस्ट्रार के पास गए थे एप्लीकेशन लेकर. उसने मुंह बनाते हुए मान तो लिया कि हम रजिस्ट्रेशन कर देंगे. लेकिन पहले 20 हजार रुपए लाओ. दोनों सकते में आ गए उसका फैला मुंह देख कर. दोनों ने अब तक हर दफ्तर छान मारा है. डीएम, एसडीएम, एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट तक. यहां तक कि सीएम अखिलेश यादव को भी चिट्ठी लिखी. लेकिन कुछ नहीं हुआ. मंजीत ने अखबार मेल टुडे को बताया कि ऐसा कह कर ऑफिसर्स सिर्फ पल्ला झाड़ रहे हैं. हमारे गांव में किसी को इस शादी से प्रॉब्लम नहीं है. बल्कि वो हमको एकता की मिसाल मानते हैं.
देखो भाई. इंडिया में शादी बियाह अभी बहुत सेंसिटिव इस्सू है. देहात में तो और ज्यादा. उस पर जब किस्सा दूसरे धर्म में भाग कर शादी करने का हो तो स्थितियां बिगड़ जाती हैं. अभी यहां समाज के सुलझने और लोगों के बड़ा होने में काफी वक्त लगेगा. एक्सेप्ट करने में टाइम लगेगा. फिर भी इतने अफसरों में कोई भी इस जोड़े की बात सुन लेता है तो काम बन जाएगा.
पिछले साल वहां बहुत हंगामा तब कटा था. जब 52 साल के इखलाक का बेरहमी से मर्डर कर दिया गया था. और उसके बेटे को अधमरा कर हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया था. इस शक में, कि उसके फ्रिज में गोमांस रखा था. बाद में जांच हुई, रिपोर्ट आई कि वो गोमांस नहीं बकरे का मीट था. तब से वह एरिया संवेदनशील माना जाता है. उसके चक्कर में मुसीबत हो गई है इन प्रेमियों की.
अब इस लव स्टोरी का हर एंगल आपको दिखाते हैं. स्टेप बाई स्टेप. थोड़ा याद करोगे तो कयामत से कयामत तक पिच्चर के सीन याद आएंगे. कहानी उसी तरह शुरू होती है. पिछले साल 19 अक्टूबर को मंजीत और सलमा बाइक से भाग लिए. दादरी में अपना गांव चितेहरा छोड़ कर पहुंच गए इलाहाबाद शहर.
शादी का फैसला जल्दी में नहीं लिया था. 24 साल के मंजीत और 20 साल की सलमा काफी टाइम से दोस्त थे. सलमा के मां बाप उसके बचपन में दुनिया से रुख्सत हो गए. घर के और बड़े बुजुर्ग उस पर शादी का दबाव बना रहे थे. वो भी एक अधेड़ के साथ. दोनों ने आपस में बात की. समझ बूझ कर, आगा पीछा सोच कर निकल भागे.
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वहां जाकर दोनों ने आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली. सलमा ने हिंदू धर्म अपना लिया और सपना हो गईं. उसके बाद शुरू हुईं असली दिक्कतें. दोनों को सपना के घर वालों की तरफ से धमकियां मिलने लगीं. कि घर आओ लौट कर. काट देंगे बहा देंगे वगैरह. दोनों ने पुलिस के पास जाकर अपनी कहानी बताई और प्रोटेक्शन मांगा. कहीं कोई सुनवाई नहीं. पांच महीने से लगातार दोनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं. डरे सहमे हुए अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन कराने को गुहार लगा रहे हैं. लेकिन ऑफिसर्स सिर्फ इस डर से उनको टरका देते हैं कि इलाके में दंगा भड़क जाएगा.
गौतम बुद्ध नगर के डीएम एनपी सिंह ने फिलहाल वादा किया है. कि वो सीनियर ऑफिसर्स से बात करके ये शादी रजिस्टर्ड कराएंगे. वो बताते हैं "दोनों बालिग हैं. उनकी शादी के रजिस्ट्रेशन में यूं तो कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन इस बात से इन्कार भी नहीं किया जा सकता जो अफसर बता रहे हैं. इनकी शादी ऑफिसियल होने से दंगे भड़कने का खतरा तो है ही."
एक रजिस्ट्रार के पास गए थे एप्लीकेशन लेकर. उसने मुंह बनाते हुए मान तो लिया कि हम रजिस्ट्रेशन कर देंगे. लेकिन पहले 20 हजार रुपए लाओ. दोनों सकते में आ गए उसका फैला मुंह देख कर. दोनों ने अब तक हर दफ्तर छान मारा है. डीएम, एसडीएम, एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट तक. यहां तक कि सीएम अखिलेश यादव को भी चिट्ठी लिखी. लेकिन कुछ नहीं हुआ. मंजीत ने अखबार मेल टुडे को बताया कि ऐसा कह कर ऑफिसर्स सिर्फ पल्ला झाड़ रहे हैं. हमारे गांव में किसी को इस शादी से प्रॉब्लम नहीं है. बल्कि वो हमको एकता की मिसाल मानते हैं.
देखो भाई. इंडिया में शादी बियाह अभी बहुत सेंसिटिव इस्सू है. देहात में तो और ज्यादा. उस पर जब किस्सा दूसरे धर्म में भाग कर शादी करने का हो तो स्थितियां बिगड़ जाती हैं. अभी यहां समाज के सुलझने और लोगों के बड़ा होने में काफी वक्त लगेगा. एक्सेप्ट करने में टाइम लगेगा. फिर भी इतने अफसरों में कोई भी इस जोड़े की बात सुन लेता है तो काम बन जाएगा.

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