'शाम को घर से गया, सुबह आया तो 9 लोग बह चुके थे... ' हिमाचल में फटे बादल ने इस शख्स का सब छीन लिया
Himachal Pradesh Cloud Burst: अशोक अपने किसी रिश्तेदार से मिलने गांव से बाहर चले गए थे. रात एक बजे गांव में बादल फटने की खबर मिली. वापस लौटे तो सब बर्बाद हो चुका था. पत्नी, बच्चे कोई नहीं था. कई और परिवारों का भी ऐसा ही हाल है.

हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू और मंडी में बादल फटने की वजह से अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है (Himachal Pradesh Cloud Burst). लगभग 45 लोग अभी भी लापता हैं. इस बीच समेज खड्ड गांव के एक परिवार की भावुक कहानी सामने आई है. परिवार के 11 सदस्यों में से नौ लापता हैं. वो सभी पानी के साथ बह गए. 42 साल के अशोक केदरता को अपने परिजनों के जिंदा मिलने की बहुत कम उम्मीद है.
31 जुलाई की शाम को ही अशोक अपने किसी रिश्तेदार से मिलने गांव से बाहर चले गए थे. रात एक बजे गांव में बादल फटने की खबर मिली. वापस लौटे तो सब बर्बाद हो चुका था. अशोक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,
मेरी पत्नी अनिता देवी (38), मेरे दो बच्चे - मुकेश (19) और योगप्रिया (11), भाई सूरत राम, उनकी पत्नी संतोष कुमारी, उनके बेटे नीरा और सोनू का कोई पता नहीं है. वो अब हमारे बीच नहीं हैं. जो वहां नहीं थे वही बचे हैं. मेरा सौतेला भतीजा मोनू अपनी बहन और मां प्रीति के साथ पास के गांव में अपने ननिहाल में था.
कानरादर गांव में राजेश कुमार केदारता ने आपदा में अपने चार रिश्तेदारों को खो दिया. गांव की चंपो देवी बताती हैं कि 70 साल की चिंता देवी नाम की महिला के पति के सभी रिश्तेदार लापता हैं. उनका कनरादर गांव में एक घर था जो बह गया.
रामपुर उपमंडल के समेज गांव में 30 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है. समेज गांव की रहने वाली अनिता देवी ने 31 जुलाई की रात के बारे में NDTV को बताया,
जब मैं और मेरा परिवार सो रहे थे, एक जोरदार धमाके से घर हिला. जब हमने बाहर देखा तो पूरा गांव बह चुका था. हम भागकर गांव के भगवती काली माता मंदिर में पहुंचे और पूरी रात वहीं बिताई. केवल हमारा घर इस तबाही से बच गया, लेकिन बाकी सब कुछ मेरी आंखों के सामने बह गया.
समेज गांव के ही बुजुर्ग बख्शी राम ने अपना दुख साझा किया,
मेरे परिवार के करीब 14 से 15 लोग बाढ़ में बह गए. मुझे रात 2 बजे बाढ़ की खबर मिली और मैं उस वक्त रामपुर में था, इसलिए मैं बच गया. जब मैं सुबह 4 बजे यहां पहुंचा तो सब कुछ खत्म हो गया था. मैं अपने प्रियजनों को तलाश कर रहा हूं. उम्मीद है कि कोई अभी भी जिंदा हो.
पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने तीन अगस्त को कुल्लू जिले के सैंज क्षेत्र का दौरा किया और प्रभावित परिवारों से बातचीत की. उन्होंने कहा कि कुछ पीड़ित अभी भी राहत कोष का इंतजार कर रहे हैं.
इससे पहले दो अगस्त को समेज गांव का दौरा करने वाले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पीड़ितों के लिए 50,000 रुपये की तत्काल राहत की घोषणा की और कहा कि उन्हें गैस सिलेंडर, खाना और अन्य जरूरी चीजों के साथ अगले तीन महीनों के लिए किराए के लिए 5,000 रुपये महीना दिए जाएंगे.
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