RSS हेडक्वॉर्टर के अपने भाषण में क्या-क्या बोले प्रणब मुखर्जी और मोहन भागवत
कुछ लोग कह रहे हैं कि प्रणव मुखर्जी संतुलित बोले, तो कुछ कह रहे हैं कि उन्होंने RSS को ट्रोल कर दिया.
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RSS हैडक्वार्टर में प्रणब दा और भागवत.
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)के नागपुर मुख्यालय में स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित किया. RSS में स्वयंसेवकों की तीन साल की ट्रेनिंग पूरी होने पर यह शिविर लगा था. इसमें देश भर से चुने गए RSS स्वयंसेवक शामिल होते हैं.
RSS के शिविर में क्या बोले प्रणब दा, आइए जानते हैं कुछ बातें:

मंच से बोलते प्रणब दा.
#मैं यहां भारत, राष्ट्रवाद और देशभक्ति के बारे में चर्चा करने यहां आया हूं.
#ये तीनों अपने आप में अलग चीजें हैं. इन तीनों पर एक साथ चर्चा कठिन है.
#हजारों साल पहले भारत में मेगस्थनीज, फाह्यान और ह्वेनसांग जैसे विदेशी आए. सबने भारत के प्रशासन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की.
#हजारों साल पहले भी भारत में नालंदा और तक्षशिला जैसे शिक्षा संस्थान रहे हैं.
#भारत यूरोपियन स्टेट के कंसेप्ट से पहले भी एक स्टेट है. हम सर्वे भवन्तु सुखिन: और वसुधैव कुटुम्बकम को मानते आए हैं.
#जैसे सर्वपल्ली राधाकृष्णनन ने कहा था कि हमारे बीच कोई भी विचारधारात्मक अंतर हो हम एक ही देश के बाशिंदे रहेंगे. हमारे अंदर बहुत सारे अंतर हैं.
#अगर हम भारत के इतिहास को देखें तो हम महाजनपद देखते हैं. जिनमें चंद्रगुप्त मौर्या, अशोक जैसे राजा थे. चंद्रगुप्त के बाद भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट गया.
#इसके कुछ सैकड़ों साल बाद भारत पर मुस्लिमों का राज रहा. फिर अंग्रेजों का राज हो गया.
#ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक पावर सेंटर बनाया, जो गवर्नर जनरल था. 1857 की क्रांति के बाद भारत पर रानी का शासन लागू हो गया.
#इतने सालों के अलग-अलग राज के बाद भी हमारी 5,000 सालों पुरानी संस्कृति जिंदा रही.
#(उन्होंने बंगाली में कहा जिसका मतलब था कि) भारत ऐसे बना है जैसे अलग-अलग नदियां मिलकर समुद्र बनाती हैं.
#कांग्रेस के सुरेंद्रनाथ घोष ने राष्ट्रवाद का कॉन्सेप्ट दिया जिसमें सभी भारतीय शामिल थे. फिर बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज का नारा दिया.
#फिर गांधीजी और नेहरू जी ने राष्ट्रवाद पर चर्चा की. नेहरू ने कहा कि राष्ट्रवाद जाति, धर्म से ऊपर उठकर देश के प्रति जिम्मेदारी है.
#हमें 1947 में आजादी मिली. सरदार पटेल ने सब रियासतों को मिलाकर एक देश बनाया. 1950 में भारत में संविधान लागू हुआ. जिससे पूरे देश के सभी लोगों को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार दिया.
#हमें आजादी के टाइम 1900 साल के विदेशी राज के बाद एक देश मिला. जिसमें एक लोकतंत्र कायम हुआ.
#कुछ सच्चाई हैं, जो मैंने पिछले 50 सालों में जानी हैं.
#भारत विविधताओं का देश है. जो हमें खास बनाती हैं. यहां बहुत सारे धर्म, जातियां और भाषाएं हैं. फिर भी यहां बस एक संविधान, एक झंडा और सबकी एक ही पहचान है वो है भारतीय.
#राष्ट्रवाद सब जाति-धर्मों से ऊपर है.
#हमारे अंदर विचारों की भिन्नता है. हम इसे खारिज नहीं कर सकते. इसके लिए आपस में संवाद बहुत जरूरी है.
# देश में डर-भय का माहौल बन रहा है लेकिन हमें सहनशीलता सीखनी चाहिए. संविधान के रास्ते ही शांति के रास्ते पर चलना चाहिए.
#अगर किसी बच्चे या महिला पर अत्याचार होता है तो वो भारत की आत्मा पर एक हमला है. हमें गुस्से और हिंसा को छोड़कर शांति की ओर आगे बढ़ना चाहिए.
#आप सब जवान हैं, पढ़े-लिखे हैं आपको देश में सौहार्द बनाने के लिए काम करना चाहिए.
#भारत सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है. लेकिन फिर भी हम वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में बहुत नीचे हैं.
#चाणक्य का एक कथन है कि जनता की खुशी में ही राजा की खुशी है.
#हम सबको मिलकर बीमारियों, गरीबी और दूसरी समस्याओं से लड़ना होगा. जिससे हम एक अच्छा देश बना सकें.
इससे पहले मोहन भागवत ने कहा कि इस कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी के आने पर विवाद की आवश्यकता नहीं है. हमने प्रणब दा को निमंत्रण दिया और उन्होंने दिल से स्वीकार किया.
उनके पहुंचने पर संघ का एंथम, जिसे संघ प्रार्थना कहा जाता है, भी गाया गया. प्रणब ने संघ के लोगों की तरह 'संघ नमस्कार' नहीं किया.
प्रणब मुखर्जी 6 जून को ही नागपुर पहुंच गए थे. आज शिविर समाप्ति पर उन्होंने भाषण दिया. इससे पहले उन्होंने केशव बलराम हेडगेवार की जन्मस्थली के दर्शन किया. जहां मोहन भागवत ने उनका स्वागत किया. वहां रखी विजिटर बुक में उन्होंने हेडगेवार को भारत मां का महान सपूत बताया.
साथ ही प्रणब मुखर्जी को टैग करते हुए लिखा, शायद आज की घटना से आपको समझ आ गया होगा कि भाजपा कैसे डर्टी ट्रिक्स चलती है. RSS को भी पता है कि आप अपने भाषण में उनके नजरिए का समर्थन नहीं करेंगे. लेकिन आपका भाषण भुला दिया जाएगा, बस तस्वीरें रह जाएंगी और वो गलत बयानों के साथ फैलाई जाएंगी. नागपुर जाने से आप बीजेपी-आरएसएस को झूठी कहानियां और अफवाहें फैलाने की अनुमति दे रहे हैं. यह तो अभी बस शुरुआत है.
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वीडियो- प्रणब मुखर्जी की पूरी कहानी
RSS के शिविर में क्या बोले प्रणब दा, आइए जानते हैं कुछ बातें:

मंच से बोलते प्रणब दा.
#मैं यहां भारत, राष्ट्रवाद और देशभक्ति के बारे में चर्चा करने यहां आया हूं.
#ये तीनों अपने आप में अलग चीजें हैं. इन तीनों पर एक साथ चर्चा कठिन है.
#हजारों साल पहले भारत में मेगस्थनीज, फाह्यान और ह्वेनसांग जैसे विदेशी आए. सबने भारत के प्रशासन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की.
#हजारों साल पहले भी भारत में नालंदा और तक्षशिला जैसे शिक्षा संस्थान रहे हैं.
#भारत यूरोपियन स्टेट के कंसेप्ट से पहले भी एक स्टेट है. हम सर्वे भवन्तु सुखिन: और वसुधैव कुटुम्बकम को मानते आए हैं.
#जैसे सर्वपल्ली राधाकृष्णनन ने कहा था कि हमारे बीच कोई भी विचारधारात्मक अंतर हो हम एक ही देश के बाशिंदे रहेंगे. हमारे अंदर बहुत सारे अंतर हैं.
#अगर हम भारत के इतिहास को देखें तो हम महाजनपद देखते हैं. जिनमें चंद्रगुप्त मौर्या, अशोक जैसे राजा थे. चंद्रगुप्त के बाद भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट गया.
#इसके कुछ सैकड़ों साल बाद भारत पर मुस्लिमों का राज रहा. फिर अंग्रेजों का राज हो गया.
#ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक पावर सेंटर बनाया, जो गवर्नर जनरल था. 1857 की क्रांति के बाद भारत पर रानी का शासन लागू हो गया.
#इतने सालों के अलग-अलग राज के बाद भी हमारी 5,000 सालों पुरानी संस्कृति जिंदा रही.
#(उन्होंने बंगाली में कहा जिसका मतलब था कि) भारत ऐसे बना है जैसे अलग-अलग नदियां मिलकर समुद्र बनाती हैं.
#कांग्रेस के सुरेंद्रनाथ घोष ने राष्ट्रवाद का कॉन्सेप्ट दिया जिसमें सभी भारतीय शामिल थे. फिर बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज का नारा दिया.
#फिर गांधीजी और नेहरू जी ने राष्ट्रवाद पर चर्चा की. नेहरू ने कहा कि राष्ट्रवाद जाति, धर्म से ऊपर उठकर देश के प्रति जिम्मेदारी है.
#हमें 1947 में आजादी मिली. सरदार पटेल ने सब रियासतों को मिलाकर एक देश बनाया. 1950 में भारत में संविधान लागू हुआ. जिससे पूरे देश के सभी लोगों को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार दिया.
#हमें आजादी के टाइम 1900 साल के विदेशी राज के बाद एक देश मिला. जिसमें एक लोकतंत्र कायम हुआ.
#कुछ सच्चाई हैं, जो मैंने पिछले 50 सालों में जानी हैं.
#भारत विविधताओं का देश है. जो हमें खास बनाती हैं. यहां बहुत सारे धर्म, जातियां और भाषाएं हैं. फिर भी यहां बस एक संविधान, एक झंडा और सबकी एक ही पहचान है वो है भारतीय.
#राष्ट्रवाद सब जाति-धर्मों से ऊपर है.
#हमारे अंदर विचारों की भिन्नता है. हम इसे खारिज नहीं कर सकते. इसके लिए आपस में संवाद बहुत जरूरी है.
# देश में डर-भय का माहौल बन रहा है लेकिन हमें सहनशीलता सीखनी चाहिए. संविधान के रास्ते ही शांति के रास्ते पर चलना चाहिए.
#अगर किसी बच्चे या महिला पर अत्याचार होता है तो वो भारत की आत्मा पर एक हमला है. हमें गुस्से और हिंसा को छोड़कर शांति की ओर आगे बढ़ना चाहिए.
#आप सब जवान हैं, पढ़े-लिखे हैं आपको देश में सौहार्द बनाने के लिए काम करना चाहिए.
#भारत सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है. लेकिन फिर भी हम वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में बहुत नीचे हैं.
#चाणक्य का एक कथन है कि जनता की खुशी में ही राजा की खुशी है.
#हम सबको मिलकर बीमारियों, गरीबी और दूसरी समस्याओं से लड़ना होगा. जिससे हम एक अच्छा देश बना सकें.
इससे पहले मोहन भागवत ने कहा कि इस कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी के आने पर विवाद की आवश्यकता नहीं है. हमने प्रणब दा को निमंत्रण दिया और उन्होंने दिल से स्वीकार किया.
आगे उन्होंने कहा कि संघ सिर्फ हिंदू नहीं पूरे समाज को संगठित करना चाहता है. भारत की धरती पर जन्मा हर कोई भारतपुत्र है. डीएनए के अनुसार हर भारतवासी के पूर्वज समान हैं. ये बात सबको समझनी चाहिए. संघ एक डेमोक्रेटिक माइंड का संगठन है. हमें सबको समानता पर लाना होगा. सरकार बहुत कुछ कर सकती है, सब कुछ नहीं.Dr Pranab Mukherjee ko humne sehej roop se amantran diya aur unhone humara sneh pehchan kar unhone sahmiti di. Unko kaise bulaya aur woh kaise ja rahe hain yeh charcha nirarthak hai: RSS Chief Mohan Bhagwat pic.twitter.com/5pkT4bmyvX
— ANI (@ANI) June 7, 2018
उनके पहुंचने पर संघ का एंथम, जिसे संघ प्रार्थना कहा जाता है, भी गाया गया. प्रणब ने संघ के लोगों की तरह 'संघ नमस्कार' नहीं किया.
Former President Dr Pranab Mukherjee at Rashtriya Swayamsevak Sangh's (RSS) Tritiya Varsh event, in Nagpur. pic.twitter.com/V0f2oHG8vA
— ANI (@ANI) June 7, 2018
प्रणब मुखर्जी 6 जून को ही नागपुर पहुंच गए थे. आज शिविर समाप्ति पर उन्होंने भाषण दिया. इससे पहले उन्होंने केशव बलराम हेडगेवार की जन्मस्थली के दर्शन किया. जहां मोहन भागवत ने उनका स्वागत किया. वहां रखी विजिटर बुक में उन्होंने हेडगेवार को भारत मां का महान सपूत बताया.
'Today I came here to pay my respect and homage to a great son of Mother India': Former President Dr.Pranab Mukherjee's message in the visitor's book at RSS founder KB Hedgewar's birthplace in Nagpur pic.twitter.com/ax76NCzJMaप्रणब मुखर्जी द्वारा RSS के इनविटेशन को स्वीकार करने के बाद से ही कांग्रेस के कुछ नेता सवाल उठा रहे थे. खुद प्रणब दा की बेटी और दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी प्रणब की यात्रा का विरोध किया था. कल दिन में अफवाह उड़ी थी कि शर्मिष्ठा भाजपा में शामिल हो सकती हैं. इस पर उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि वो कांग्रेस में भरोसा रखती हैं. कांग्रेस छोड़ने से पहले वो राजनीति छोड़ना पसंद करेंगी.
— ANI (@ANI) June 7, 2018
In the mountains enjoying a beautiful sunset, & suddenly this news that I’m supposedly joining BJP hits like a torpedo! Can’t there be some peace & sanity in this world? I joined politics because I believe in @INCIndia
Wud rather leave politics than leave Congress — Sharmistha Mukherjee (@Sharmistha_GK) June 6, 2018
साथ ही प्रणब मुखर्जी को टैग करते हुए लिखा, शायद आज की घटना से आपको समझ आ गया होगा कि भाजपा कैसे डर्टी ट्रिक्स चलती है. RSS को भी पता है कि आप अपने भाषण में उनके नजरिए का समर्थन नहीं करेंगे. लेकिन आपका भाषण भुला दिया जाएगा, बस तस्वीरें रह जाएंगी और वो गलत बयानों के साथ फैलाई जाएंगी. नागपुर जाने से आप बीजेपी-आरएसएस को झूठी कहानियां और अफवाहें फैलाने की अनुमति दे रहे हैं. यह तो अभी बस शुरुआत है.
Hope @CitiznMukherjee
now realises from todays’ incident, how BJP dirty tricks dept operates. Even RSS wouldn’t believe that u r going 2 endorse its views in ur speech. But the speech will be forgotten, visuals will remain & those will be circulated with fake statements. 1/2 — Sharmistha Mukherjee (@Sharmistha_GK) June 6, 2018
.@CitiznMukherjee
By going 2 Nagpur, u r giving BJP/RSS full handle 2 plant false stories, spread falls rumours as 2day & making it somewhat believable. And this is just d beginning! 2/2 — Sharmistha Mukherjee (@Sharmistha_GK) June 6, 2018
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बन सकते थे प्रधानमंत्री, और बन गए राष्ट्रपति
वीडियो- प्रणब मुखर्जी की पूरी कहानी

