पड़ताल: अब प्राइवेट स्कूल जून-जुलाई की फीस नहीं ले सकेंगे!
सोशल मीडिया के अनुसार हाईकोर्ट ने ऐसा ऑर्डर दिया है.
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सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज में प्राइवेट स्कूलों के लिए ऐसा दावा किया गया है.
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सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है. इस मैसेज में लिखा है कि प्राइवेट स्कूल अब गर्मियों की छुट्टी की फीस नहीं ले सकेंगे. अगर वो ऐसा करेंगे तो स्कूल के खिलाफ कार्रवाई होगी. स्कूल की मान्यता भी रद्द की जाएगी. इसे हाईकोर्ट का ऑर्डर बताया जा रहा है. अगर पुलिस स्कूलों पर कार्रवाई न करे तो सीएम विंडो पर शिकायत करने के लिए कहा है. यह सब 'सीआईडी' के लेटर हैड पर लिखा है. स्कूल की फीस लोगों के जीवन की इतनी बड़ी समस्या है कि ऐसे मैसेज पढ़कर लोगों को दिल कर जाता है कि सच निकल जाए. लेकिन क्या ये खुशी टिकने लायक है? हम बताते हैं.

स्कूलों की फीस को लेकर यह मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
ये खुशी टिके इसलिए ज़रूरी है कि मैसेज में लिखी बातें सच निकलें. लेकिन हमने इस मैसेज की पड़ताल की तो यह मैसेज फेक यानी फर्जी निकला. दुखद. :(
दिक्कत कहां आ रही है?
दिक्कत इस लेटर की शुरुआत से शुरू होती है. इस लेटर पर CID का फुलफॉर्म 'क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट' की जगह 'क्राइम इंटेलीजेंस डिटेक्टिव' लिखा है. पहला वाला सीआईडी पुलिस के अंदर एक विभाग होता है. गंभीर अपराधों की जांच करता है. यहां CID से जो मतलब है, उसका पुलिस या सरकार से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है. इसलिए उसके लेटरहेड पर लिखी कोई बात स्कूलों पर बाध्यकारी नहीं हो सकती. वैसे भी CID (असली वाली) स्कूल फीस जैसे मामलों में सामान्यतः नहीं पड़ती है.
इस वायरल मैसेज के बारे में पूछने पर गोस्वामी ने बताया कि यह वायरल मैसेज उन्होंने देखा है. यह मैसेज फर्जी है. इसे किसी और ने उनकी संस्था के नाम से बनाकर चला दिया है. इस वायरल मैसेज के बारे में उन्होंने अपनी सीआईडी के असली लेटर हैड से एक स्पष्टीकरण भी जारी किया था. इसका फोटो भी उन्होंने हमें भेजा.

CID नाम की संस्था ने जारी किया स्पष्टीकरण.
तो लेटरहेड नकली था. उसपर लिखे मैसेज में भी तथ्यात्मक गलतियां निकलीं. हाईकोर्ट ऑर्डर का जो शिकायत नंबर दिया गया था, वो गलत था. क्योंकि उसमें लास्ट का एक डिजिट नहीं था. फिर इसमें छुट्टियों के महीने जून-जुलाई बताए गए हैं. जबकि स्कूलों की छुट्टियां मई-जून के महीने में रहती हैं. मैसेज में 'जागो ग्राहक जागो' लिखा है. ये सरकार का एक कैंपेन ज़रूर है, लेकिन इसका न इस नकली सीआईडी और न ही हाईकोर्ट के किसी आदेश से संबंध है.
सो हमारी पड़ताल में यह मैसेज पूरी तरह से गलत साबित हुआ.
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स्कूलों की फीस को लेकर यह मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
ये खुशी टिके इसलिए ज़रूरी है कि मैसेज में लिखी बातें सच निकलें. लेकिन हमने इस मैसेज की पड़ताल की तो यह मैसेज फेक यानी फर्जी निकला. दुखद. :(
दिक्कत कहां आ रही है?
दिक्कत इस लेटर की शुरुआत से शुरू होती है. इस लेटर पर CID का फुलफॉर्म 'क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट' की जगह 'क्राइम इंटेलीजेंस डिटेक्टिव' लिखा है. पहला वाला सीआईडी पुलिस के अंदर एक विभाग होता है. गंभीर अपराधों की जांच करता है. यहां CID से जो मतलब है, उसका पुलिस या सरकार से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है. इसलिए उसके लेटरहेड पर लिखी कोई बात स्कूलों पर बाध्यकारी नहीं हो सकती. वैसे भी CID (असली वाली) स्कूल फीस जैसे मामलों में सामान्यतः नहीं पड़ती है.
लेकिन ये इस अफवाह की सबसे बड़ी समस्या नहीं है. क्योंकि यहां खेल करने वाले ने नकल की नकल बनाकर कांड किया है. जी हां.
हमें लगा कि 'क्राइम इंटेलीजेंस डिटेक्टिव' जितना क्रिएटिव नाम किसी ने खालिस इस अफवाह के लिए गढ़ा है. लेकिन लेटर-हेड पर 'सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था' और साथ में रजिस्ट्रेशन नंबर, फोन नंबर और पता भी लिखा था. हमको मौज सूझी, तो हमने इस लेटर-हेड पर लिखे नंबर पर कॉल कर दिया. फोन पर घंटी जाने लगी. हमें हैरानी हुई. फिर कॉल रिसीव भी हो गया और उधर से कहा गया कि अरविंद गिरी गोस्वामी बोल रहे हैं. गोस्वामी ने बताया कि इस नाम की संस्था सच में मौजूद है और वो इसके चीफ डायरेक्टर हैं !
हमने ऐसा नाम रखने का कारण पूछा तो बताया गया कि इस CID का ऑफिस गाज़ियाबाद के साहिबाबाद में है. यह संस्था भ्रष्टाचार और अपराध के विरुद्ध मुहिम चलाने वाली एक संस्था है. साथ ही ये डिटेक्टिव और सिक्योरिटी सर्विस भी प्रोवाइड करते हैं. इसी वजह से इस संस्था का नाम अपराध खुफिया जासूस है.इस वायरल मैसेज के बारे में पूछने पर गोस्वामी ने बताया कि यह वायरल मैसेज उन्होंने देखा है. यह मैसेज फर्जी है. इसे किसी और ने उनकी संस्था के नाम से बनाकर चला दिया है. इस वायरल मैसेज के बारे में उन्होंने अपनी सीआईडी के असली लेटर हैड से एक स्पष्टीकरण भी जारी किया था. इसका फोटो भी उन्होंने हमें भेजा.

CID नाम की संस्था ने जारी किया स्पष्टीकरण.
तो लेटरहेड नकली था. उसपर लिखे मैसेज में भी तथ्यात्मक गलतियां निकलीं. हाईकोर्ट ऑर्डर का जो शिकायत नंबर दिया गया था, वो गलत था. क्योंकि उसमें लास्ट का एक डिजिट नहीं था. फिर इसमें छुट्टियों के महीने जून-जुलाई बताए गए हैं. जबकि स्कूलों की छुट्टियां मई-जून के महीने में रहती हैं. मैसेज में 'जागो ग्राहक जागो' लिखा है. ये सरकार का एक कैंपेन ज़रूर है, लेकिन इसका न इस नकली सीआईडी और न ही हाईकोर्ट के किसी आदेश से संबंध है.
सो हमारी पड़ताल में यह मैसेज पूरी तरह से गलत साबित हुआ.
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