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कोर्ट में लिया गया दिल्ली पुलिस का वाइवा

JNU मामले में कन्हैया की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने पुलिस से ही पूछ लिया कि उसे देशद्रोह की धारा का मतलब भी मालूम है?

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फोटो - thelallantop
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केतन बुकरैत
1 मार्च 2016 (Updated: 29 फ़रवरी 2016, 05:17 AM IST)
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जन्माष्टमी बहुतै दूर है लेकिन कन्हैया का नाम सबकी जुबान पर है. ऐसा नहीं है कि सब अचानक से आस्तिक हुई गए हैं. दरअसल कुछ लोग देश-दुनिया की भी खबर रखते हैं.
JNU की 'देशद्रोह कंट्रोवर्सी' के बारे में तो जानते ही होंगे? कन्हैया को पुलिस उठा ले गई ये कह के कि वो यूनिवर्सिटी में देश के खिलाफ़ नारे लगा रहे थे. कोई कह रहा था कि कश्मीर की आजादी के नारे तो किसी ने कहा कि देश के टुकड़े वाले. गिरफ्तार होने से पहले और बाद भी कन्हैया कहते रहे कि नारे उन्होंने नहीं लगाए, न उन्होंने वो प्रोग्राम कराया. बल्किदेश के संविधान में उनका पूरा यकीन है.
लेकिन सुनी किसी ने नहीं, गिरफ्तारी भी हुई और कोर्ट परिसर के बाहर कन्हैया को कथित तौर पर पीटा भी गया. पीटने वाले वकीलों के सरगना को जेल जाने से पहले ही जमानत मिल गई. लेकिन कन्हैया अब भी जेल में हैं.
वकीलों के त्वरित न्याय से कन्हैय्या को बचाती पुलिस
वकीलों के त्वरित न्याय से कन्हैया को बचाती पुलिस

हफ़्ते-दस दिन बाद ये भी सामने आ गया कि जिन वीडियो के बेस पर कन्हैया की थाना-पुलिस हो गई थी, वो भी फर्जी है. न्यूज़ चैनलों और खिड़की के कांच फोड़ देने की हद तक चिल्लाने वाले न्यूज़ ऐंकरों की थू-थू भी हुई, लेकिन पुलिस फिर भी अडिग रही. कमिश्नर बस्सी साहब ने कहा कि कन्हैया के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और उसका समर्थन करने वाले सच से वाकिफ नहीं हैं.
लेकिन कल यानी सोमवार की तारीख लिख लो, नोट कर लो. दिल्ली पुलिस ने भी यू-टर्न लेते हुए मान लिया कि कन्हैया का देशविरोधी नारे लगाते हुए कोई वीडियो नहीं है.
उधर, उमर खालिद और उसके आरोपी साथियों ने भी सरेंडर कर दिया. खालिद खुद कहते हैं कि अफजल गुरु का मसला मेरे दिल के बेहद नज़दीक है. भारत विरोधी नारों का ठीकरा उन्होंने भी कुछ बाहरी लोगों के सिर फोड़ दिया है.  खैर, वो पुलिस समझेगी और उनका काम ही यही है. उसके बाद हुआ ये कि किसी गजब दिमागदार मनुष्य ने केजरीवाल, सीताराम येचुरी और राहुल गांधी पर देशद्रोह का मुकदमा ठोंक दिया. पूरे प्रकरण में ये बात सबसे भयानक वाली फनी है.
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सोमवार को हाई कोर्ट ने पुलिस ही से पूछ डाला - "देशद्रोह होता क्या है, ये आपको मालूम भी है?" कोर्ट की बेंच जस्टिस प्रतिभा रानी ने ये सवाल पुलिस से पूछा.
उन्होंने कहा कि हर कोई धारा 124A को बहुत सीरियस मानता है लेकिन किसी को मालूम नहीं है. धारा 124A में तीन साल से कम की भी सज़ा होती है, कभी कभी तो खाली जुर्माना ही लगता है और कभी कभी बहुत ज़्यादा सीरियस सजा मिल जाती है. इस लिहाज़ से हर 124A के कैदी को आतंकवादी और गद्दार और न जाने क्या-क्या ठहराना कहीं से भी न्याय करना नहीं होता.
JNU में 9 फरवरी की रात हुआ प्रोटेस्ट
JNU में 9 फरवरी की रात हुआ प्रोटेस्ट

कोर्ट ने समझाया वहां मौजूद होने और नारेबाजी में हिस्सा लेने का फर्क

कोर्ट ने पुलिस से ये भी पूछा कि क्या जो वीडियो दिखाए (बिना एडिट किये हुए) गए हैं, ये प्रूव करते हैं कि कन्हैया कुमार देश-विरोधी नारे लगा रहे थे? वो इस बात को तो खुद स्वीकारता है कि वो वह मौजूद था, पर नारे लगा रहा था क्या?
पुलिस की साख पर 'येक के बाद येक' चोट करते हुए कोर्ट पूछे जा रही थी कि जब नारेबाजी की घटना 9 तारीख को हुई तो काहे लिए फुटेज को ज़ी न्यूज़ से लेने का इंतजार किया? ये भी पूछा कि FIR फाइल करने में इतनी देर क्यों हुई?
ASG मिस्टर मेहता ने कुबूल लिया कि ऐसा एक भी वीडियो सामने नहीं आया है जिसमें कन्हैया जो कि जेल में बंद हैं, कहीं देश-विरोधी नारे लगा रहे हों. लेकिन वो वहां मौजूद जरूर थे.
https://www.youtube.com/watch?v=5M5PGcNN1no
इस पर कोर्ट ने मिनट से पहले बिना स्माइली रिप्लाई दिया जिसका मोटा-मोटी ये मतलब था कि कहीं present होने और participate करने में उतना ही फरक होता है जितना समोसे और जलेबी में.
कोर्ट ने ये भी देखा कि FIR में लिखा था कि 3 पुलिस वाले सादे कपड़े में वहीँ मौजूद थे जहां नारेबाजी हो रही थी. तो पुलिस से पूछा गया कि वो तीनों कर क्या रहे थे? जब नारेबाजी चल रही थी तब कहां घूम रहे थे? नारों का मतलब नहीं समझ पा रहे थे? और अगर समझ पा रहे थे तो रिकॉर्ड क्यों नहीं किया?
कपिल सिब्बल जो अब कन्हैया के वकील हो गए हैं, बोले कि कन्हैया पर किसी भी हालत में देशद्रोह का मुकदमा चल ही नहीं सकता. अव्वल तो ये कि उसने ऐसे नारे ही नहीं लगाये. और अगर लगाये भी तो यूनिवर्सिटी के अन्दर लगाए जो कि एक पब्लिक प्लेस नहीं है.
लेकिन सरकार की तरफ से ASG मिस्टर मेहता ने कहा कि JNU में जो हुआ वो बाकी देश-विरोधी गतिविधियों को एक बूस्ट दे सकता है और जादवपुर और हैदराबाद यूनिवर्सिटी में जो हो रहा है वो इसी का नतीजा है. इसलिए कन्हैया को जमानत न दी जाए क्यूंकि इससे बाकी सभी का मनोबल बढ़ेगा.
दिल्ली सरकार के वकील मेहरा जी ने LG के ASG और अनिल सोनी और शैलेन्द्र बब्बर को स्पेशल प्रोसीक्यूटरबनाकर भेजने पर ऑब्जेक्शन उठाया था. लेकिन हुआ कुछ नहीं.

कन्हैया ने परिवार की सुरक्षा के लिए NHRC को लिखी चिट्ठी

कन्हैया ने National Human Rights Commission को सोमवार को एक ख़त लिखा है. इस ख़त में कन्हैया ये तो कहते हैं कि जेल के माहौल से वो संतुष्ट हैं लेकिन वो अपने परिवार की सुरक्षा पर चिंता जताते हैं. उनकी सरकार से दरख्वास्त है कि उनके परिवार को उचित सुरक्षा दिलवाई जाए.
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आगे क्या होता है देखेंगे, लेकिन कुल मिला के कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की रेल बना दी है और कन्हैया की अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी. जमानत का अभी कुछ पता नहीं है. मिलेगी तो हम बताएंगी ही.

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