दोनों इंजन फेल, फिर भी 3 मिनट तक सरकाया प्लेन
पायलट अमित मुंबई में बीवी और 4 साल की बच्ची के साथ रहते हैं. घटना से पहले तक अमित का whatsapp स्टेटस था, 'परफेक्ट हालात का इंतजार मत करो. अपना रास्ता खुद बनाओ.'
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फोटो - thelallantop
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बाहरी दिल्ली का नजफगढ़ इलाका. 'खैर' गांव के एक खेत में तेज शोर के साथ एक हवाई जहाज गिरा. गांव वाले दौड़कर पहुंचे तो पता चला कि प्लेन गिरा नहीं, लड़खड़ाते हुए लैंड किया है. इसे क्रैश लैंडिंग कहते हैं. प्लेन में से 7 लोग थे, सातों जिंदा थे. उन्हें मामूली चोटें लगी थीं.
यह प्लेन एक मरीज को लेकर पटना से दिल्ली आ रहा था. पता चला कि प्लेन के दोनों इंजन खराब हो गए थे. लेकिन फिर भी सातों लोगों की जान बच गई. यह इत्तेफाक या चमत्कार नहीं था, प्लेन के पायलटों की सूझबूझ का कमाल था.
और वे दो हीरो थे, जिन्होंने अपनी और इन पांचों की जान बचाई. वे हैं, पायलट अमित कुमार और को-पायलट रोहित सिंह. टेक-ऑफ के 10 मिनट बाद ही प्लेन में गड़बड़ शुरू गई थी. दिल्ली पहुंचते-पहुंचते ये तय हो गया कि प्लेन की नॉर्मल लैंडिंग नहीं हो सकेगी. हालात मरने या जीने के हो गए थे. ये वो समय होता है जब दिमाग की नसें सुन्न हो जाती हैं. लेकिन नौजवान पायलटों ने धीरज नहीं खोया.
27 साल पुराना यह प्लेन TMC सांसद केडी सिंह की कंपनी एल्केमिस्ट एयरवेज का था. सूत्रों के मुताबिक, नवंबर में इस एयरक्राफ्ट ऑपरेटर का परमिट एक्सपायर हो रहा था. पायलटों ने इसे जिस तरह से उतारा, प्लेन को बहुत कम नुकसान हुआ है.
साउथवेस्ट दिल्ली के डीसीपी सुरेंद्र कुमार ने कहा, 'सब लोग ठीक-ठाक थे और वहां के लोकल लोग पायलटों की तारीफ कर रहे थे. उन्होंने 5 लोगों की जान बचाई, जिसकी तारीफ की ही जानी चाहिए.'

पायलट अमित, अपनी बेटी के साथ
यह प्लेन एक मरीज को लेकर पटना से दिल्ली आ रहा था. पता चला कि प्लेन के दोनों इंजन खराब हो गए थे. लेकिन फिर भी सातों लोगों की जान बच गई. यह इत्तेफाक या चमत्कार नहीं था, प्लेन के पायलटों की सूझबूझ का कमाल था.
हुआ क्या था?
'बीचकिंग एयर सी-90 ए' प्लेन पटना से चला था. 61 साल के दिल के मरीज वीरेंद्र राय को दिल्ली लाया जा रहा था. साथ में थे उनके रिश्तेदार जूही और भगवान राय. एक डॉक्टर रूपेश थे. एक टेक्नीशियन थे जंग बहादुर.और वे दो हीरो थे, जिन्होंने अपनी और इन पांचों की जान बचाई. वे हैं, पायलट अमित कुमार और को-पायलट रोहित सिंह. टेक-ऑफ के 10 मिनट बाद ही प्लेन में गड़बड़ शुरू गई थी. दिल्ली पहुंचते-पहुंचते ये तय हो गया कि प्लेन की नॉर्मल लैंडिंग नहीं हो सकेगी. हालात मरने या जीने के हो गए थे. ये वो समय होता है जब दिमाग की नसें सुन्न हो जाती हैं. लेकिन नौजवान पायलटों ने धीरज नहीं खोया.
बिना इंजन सपोर्ट के 3 मिनट तक कंट्रोल किया
चैलेंज ये था कि प्लेन को जल्दी लैंड कराना था, लेकिन रिहाइशी इलाकों में उतार नहीं सकते थे. राजधानी के आसमान में हवा का रुख भी पलटने लगा था. प्लेन नीचे गिरने लगा था. अमित और रोहित ने तय किया कि वे दिल्ली के गुड़गांव-द्वारका साइड की तरफ प्लेन उतारेंगे, जहां अब भी खेत वाले इलाके हैं. दोनों इंजन फेल होने के बावजूद वे करीब 3 मिनट तक प्लेन को हवा में सरकाते रहे और हरियाणा बॉर्डर से सटे नजफगढ़ के खैर गांव के एक खाली खेत में इसे उतार दिया. सबकी जान बच गई.27 साल पुराना यह प्लेन TMC सांसद केडी सिंह की कंपनी एल्केमिस्ट एयरवेज का था. सूत्रों के मुताबिक, नवंबर में इस एयरक्राफ्ट ऑपरेटर का परमिट एक्सपायर हो रहा था. पायलटों ने इसे जिस तरह से उतारा, प्लेन को बहुत कम नुकसान हुआ है.
मई 2011 में, हरियाणा के फरीदाबाद में एक एयर एंबुलेंस प्लेन क्रैश हो गया था. प्लेन में सवार सभी 10 लोगों की मौत हो गई थी. यह प्लेन भी पटना से दिल्ली आ रहा था.एक्सपर्ट मानते हैं कि ऊबड़-खाबड़ जमीन पर प्लेन को लैंड कराने में हुनर लगता है. वरना यह बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. लेकिन अमित और रोहित ने यह कर दिखाया. खबर मिलने पर जब दिल्ली पुलिस के अफसर वहां पहुंचे तो उन्होंने दोनों पायलटों की खूब तारीफ की.
साउथवेस्ट दिल्ली के डीसीपी सुरेंद्र कुमार ने कहा, 'सब लोग ठीक-ठाक थे और वहां के लोकल लोग पायलटों की तारीफ कर रहे थे. उन्होंने 5 लोगों की जान बचाई, जिसकी तारीफ की ही जानी चाहिए.'

पायलट अमित, अपनी बेटी के साथ
अमित मुंबई में बीवी और चार साल की बच्ची के साथ रहते हैं. रोहित हाल ही में पायलट बने हैं. दिलचस्प बात है कि घटना से पहले तक अमित का whatsapp स्टेटस था, 'परफेक्ट हालात का इंतजार मत करो. अपना रास्ता खुद बनाओ.'

