रोज कहीं न कहीं आचार संहिता का उल्लंघन हो रहा है. इसी से समझ लीजिए कि लोकसभाचुनाव 2019 की रणभेरी बज चुकी है. मथुरा से बीजेपी की प्रत्याशी हेमा मालिनी ने भीचुनाव प्रचार शुरू किया. मथुरा वालों को शिकायत थी कि हेमा मालिनी अपने क्षेत्र मेंदिखाई नहीं देतीं. वो चुनाव से ऐन पहले दिखाई दीं और ऐसा दिखाई दीं कि उनकीतस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. उन्होंने गेहूं के खेत में जाकर चुनावीफसल काटी और उसकी फोटोज ट्वीट कीं. लिखा:गोवर्धन क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव प्रचार शुरू किया. जहां खेतों में काम कर रहीमहिलाओं से संपर्क किया. आपके लिए चुनाव प्रचार की कुछ तस्वीरें.Began my Lok Sabha campaign today with the Govardhan Kshetra where I had theopportunity to interact with women working in the fields. A few fotos for u ofmy first day of campaign pic.twitter.com/EH7vYm8Peu— Hema Malini (@dreamgirlhema) March 31, 2019हेडलाइन पढ़कर आए हो तो पता चल गया होगा कि हम एक गलती बताने आपको यहां लेकर आएहैं. लेकिन खबर लिखते समय हमको एक नहीं दो गलतियां दिख गईं.पहली गलतीनकलीपने और अज्ञानता की मात्रा इन तस्वीरों में बहुत ज्यादा है. हेमा मालिनी के साथखड़ी बाकी औरतों को देखो. सबके सिर ढके हुए हैं. हेमा मालिनी का सिर खुला हुआ है.बाल उलझे जा रहे हैं. नहीं नहीं सिर पर पल्लू डालने वाली या घूंघट वाली भकुवापनीबतियाने नहीं जा रहे हम. दरअसल गेहूं हो या धान, इनकी कटाई के समय महिलाएं पूरा सिरढककर रखती हैं. कई बार पूरा चेहरा भी. क्योंकि इनकी बालियों में जो रेशे होते हैंउनमें महीन कांटे होते हैं. वो बालों में फंस जाते हैं. होशियार आदमी लोग भी सिरढककर रखते हैं. लंबे बालों में अगर दो चार बालियों के रेशे चले गए तो उनको निकालनालंबा काम है. जो उस टाइम पर बिजली की तेजी से काम कर रही महिलाएं अफोर्ड नहीं करसकतीं. हेमा मालिनी ने ये सब नहीं किया. या तो उन्हें किसी ने बताया नहीं, या तोउन्होंने खेत काटा नहीं, या उन्होंने फोटो खराब होने के डर से सिर नहीं ढंका.गलत तरीका बनाम सही तरीकादूसरी गलतीमहिलाएं सज धजकर खेत काटने नहीं जातीं. गले में चेन, कानों में बड़ी बालियां या कोईभी गहने जो फंसकर, खिंचकर गिरने का डर हो, वो नहीं पहनकर जातीं. हां फोटो खिंचानेजाया जा सकता है लेकिन असलियत की फील लाने के लिए करेक्टर में आना जरूरी होता है.ये हेमा मालिनी से बेहतर कौन जान सकता है. इतने सालों तक उन्होंने फिल्मों के जरिएदिलों पर राज किया है.तीसरी बात कि ये कोई गलती नहीं है बल्कि जनता के लिए अपॉर्चुनिटी है. भैया हम तोसाफ स्वच्छ शुद्ध निर्मल बात कहिते हैं. फसल पक गई है. उसके सौ टंटे होते हैं. खेतकाटो. थ्रेशर तक लाओ. गेहूं अलग, भूसा अलग करो. फिर उसको ढोकर घर पहुंचाओ. मेरी जाननिकलती थी भूसा रखवाने में. एक कोठरी में कई क्विंटल भूसा रखना होता था और उससेउड़ती धूल सांस रोक देती थी. तो भैया बहुत जानलेवा काम है ये. अगर इसमें हाथ बटानेवाला कोई मिल जाए तो क्या ही कहना. ये लोग आ रहे हैं चुनाव प्रचार के लिए. सब कुछहम ही बताएं क्या अब?--------------------------------------------------------------------------------