भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने चालान काटने की जगह जो किया, लोग उसकी वाहवाही कर रहे हैं
हेलमेट, सीट बेल्ट न लगाने पर भी इनाम!

मध्य प्रदेश पुलिस और उनका सड़क सुरक्षा सप्ताह, दोनों अचानक चर्चा में आ गए. वजह? जुर्माना वसूलने की एक अनोखी तकनीक. आमतौर पर ट्रैफिक नियम का पालन न करने पर क्या होता है? ज़ाहिर-सी बात है, चालान. कई बार पुलिस वाले समझा-बुझाकर चलता भी कर देते हैं. गुलाब का फूल देना भी एक 'तकनीक' रही है समझाने की. लेकिन भोपाल पुलिस ने जो किया, वो बिल्कुल अनोखा तरीका है- निबंध लिखवाना. यही 'जुर्माना' वसूला भोपाल पुलिस ने.
# क्या है पूरा मामला?
दरअसल, भोपाल पुलिस मना रही है सड़क सुरक्षा सप्ताह. 16 जनवरी को भोपाल पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया. बिना सीट बेल्ट लगाए गाड़ी चलाते लोग मिले. बिना हेलमेट पहने दोपहिया चालाक भी पकड़ में आए. लेकिन भोपाल पुलिस ने उनका चालान नहीं काटा. न तो किसी तरह का जुर्माना वसूला. इन सबसे लिखवाया 100 शब्दों का निबंध. टॉपिक दिया, ‘मैंने हेलमेट क्यों नहीं पहना?’ या ‘मैंने सीट बेल्ट क्यों नहीं लगाई?’
चौराहे पर ही भोपाल पुलिस ने टेंट लगाया हुआ था. बाक़ायदा पेन और नोटबुक का इंतज़ाम था. टेबल कुर्सी लगाई गई थी. बैठिए और बैठकर लिखिए निबंध. बताइए कि क्यों नहीं पहना आपने हेलमेट.
इस दौरान करीब 150 लोगों से निबंध लिखवाया गया. लोगों को पहले तो हैरानी हुई कि चालान नहीं काटा जा रहा. लेकिन फिर सभी ने निबंध लिखा.
मज़ेदार बात ये है कि निबंध में कई तरह के जवाब आए. लोगों ने बताया कि क्यों उन्होंने सीट बेल्ट नहीं लगाई या हेलमेट नहीं पहना.
लड़कियों ने हेलमेट न पहनने की वजह बताई कि पुलिस लड़कियों का चालान नहीं काटती. डीआईजी इरशाद वली के मुताबिक, जितने भी लोगों को इस दौरान ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन किया, उन सभी को समझाकर छोड़ दिया गया.
ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए भोपाल पुलिस की इस अनोखी जागरूकता मुहिम की हर ओर तारीफ हो रही है.
# इनाम भी मिलेगा
भोपाल पुलिस का कहना है कि इन निबंधो से कई फ़ायदे होंगे. पता चलेगा कि लोग ट्रैफ़िक नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहे. इससे ट्रैफ़िक पुलिस को भी समस्या सुलझाने में मदद मिलेगी.
भोपाल पुलिस इन निबंधों में से पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार देने का भी मन बनाए हुए है.
# और एक डराने वाला आंकड़ा
आंकड़े बताते हैं कि देश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या ज़्यादा है, बहुत ज़्यादा. तकरीबन दो लाख पचास हज़ार. हर दिन 600 से भी ज़्यादा लोग सड़क पर मारे जाते हैं. ये संख्या किसी भी युद्ध, किसी भी महामारी या किसी भी प्राकृतिक आपदा में मौत से ज़्यादा है.
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