हमारे शरीर में ढेरों अंग हैं, और हर अंग कईयों तरीके से खराब हो सकता है, काम करनाबंद कर सकता है. उसपर रोज़ होने वाले एक्सीडेंट के केसेज़, जो कि, हम कितने ही स्वस्थहों, हमें एक पल से ‘है’ से ‘था/थी’ बना सकते हैं.क्या यह तमाम असंभावनाओं के बीच एक बड़ा, बहुत बड़ा संयोग नहीं कि हम-आप एक इंसान हैंऔर जीवित हैं? पहले तो इतने जीवों में से इंसान के रूप में जन्म लेना ही एक सूक्ष्मसंभावनाओं की लॉटरी खुलने सरीखा है, उसपर यदि आप इसे पढ़ पा रहे हैं तो आप और हम ठीकइस वक्त जीवित हैं. किसी ने ठीक ही कहा था कि – ‘मुझे विनयपूर्ण बनाए रखने के लिएएक ही बात काफी है कि एक दिन मैं नहीं होऊंगा.’किसी की मृत्यु पर दरअसल दो तरह का दुःख होता है. एक उस जाने वाले का दुःख जो हमाराएक अंश भी अपने साथ लेकर जाता है, दूसरा अपने नश्वर होने का दुःख, जिससे हमज़्यादातर समय गाफ़िल ही रहते हैं.बहरहाल, अभी बात श्रीदेवी की करते हैं. वो अज़ीम-ओ-शान अदाकारा, जो अभीजुम्मा-जुम्मा 54 वर्ष की थीं, वो अब हमारे बीच नहीं हैं. कार्डिएक अरेस्ट से उनकीमृत्यु हो गई – अचानक. उनकी मृत्यु ने कुछ सवाल खड़े किए, जिनमें से कुछ के उत्तरकिसी विशेषज्ञ के द्वारा ही दिए जा सकते थे. जैसे जिस रोग के चलते उनकी मृत्यु हुईउस रोग से संबंधित सवाल. हमने उन सवालों के उत्तर पाने के लिए स्कंद शुक्ल सेसंपर्क किया.स्कंद शुक्ल22 सितम्बर, 1979 को राजापुर, बांदा में जन्मे स्कंद शुक्ल वर्तमान में लखनऊ मेंगठिया-रोग-विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं. वृत्ति से चिकित्सक होने के कारणलोक-कष्ट और उसके निवारण से उनका सहज ही एक जुड़ाव है. इसके साथ ही साहित्य के प्रतिउनका आरंभ से ही गहन अनुराग रहा है. अनेक कविताएं-कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओंमें प्रकाशित हो चुकी हैं और साथ ही दो उपन्यास 'परमारथ के कारने' और 'अधूरी औरत'भी. सामाजिक मीडिया पर भी अनेकानेक वैज्ञानिक-स्वास्थ्य-समाज-सम्बन्धीलेखों-जानकारियों के माध्यम से सक्रिय हैं. उन्हें shuklaskand@yahoo.co.inपर ई-मेल के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है. तो आइए उनसे श्रीदेवी की मृत्यु सेजुड़े ‘चिकित्सकीय’ पहलुओं के ऊपर कुछ सवालों के उत्तर प्राप्त करते हैं.--------------------------------------------------------------------------------# स्कंद जी, श्रीदेवी की मृत्यु के कारणों को लेकर क्या कन्फ्यूजन है और क्या यदिश्रीदेवी के बारे में उनके परिवार वालों को पहले पता चल जाता तो उन्हें बचाया जासकता था?पहली बात तो कुछ भी हमारे पास तथ्यात्मक सबूत हैं नहीं. हम नहीं जानते हैं कि किसीका व्यक्तिगत जीवन कैसा था, उसकी लाइफ-स्टाइल कैसी थी, और वो क्या खाता पीता था,उसकी व्यक्तिगत जीवन में क्या समस्याएं थीं? हमें अमूमन किसी के बारे में व्यक्तिगतटिप्पणी करने से बचना चाहिए. दूसरी बात ये भी है कि सामने कोई आदमी आपको फिट दिखाईदे रहा है, तन्दुरुस्त दिखाई दे रहा है, तो इसका अर्थ ये नहीं लगाया जाना चाहिए किवो मानसिक या शारीरिक दुःख से जूंझ नहीं रहा.श्रीदेवी वाले मामले से अलग हट के मैं ये कहना चाहता हूं कि पतला होना ये गारंटीनहीं देता कि किसी का ह्रदय या कोई भी अंग स्वस्थ है और उसके लिए बहुत सी और भीचीज़ें देखनी पड़ती हैं. जैसे आदमी के स्वास्थ्य के लिए वज़न बढ़ाना या वज़न का बढ़नाखरतनाक होता है, उसी तरह से वज़न को बहुत तेज़ी से घटाना या बहुत ज़्यादा घटा लेना भीखरतनाक होता है. कई वज़न घटाने की दवाएं भी कुछ दुष्प्रभाव रखती हैं लेकिन इन सबबातों के बारे में हम कुछ व्यक्तिगत तौर पर नहीं कह सकते, हमें बस अपना ध्यान रखनाचाहिए कि हम संतुलित भोजन लें, व्यायाम करें. नशे से दूर रहें और जो हमारी हाईट केहिसाब से आदर्श वज़न है वो हम मेंटेन करके रखें.# कुछ लोग कह रहे हैं कि श्रीदेवी को कार्डिएक अरेस्ट हुआ कुछ कह रहे हैं कि हार्टअटैक हुआ, क्या अंतर है?हार्ट हम जानते हैं, ऐसा अंग है शरीर का, जो धड़कता है. एक मिनट में औसतन बहत्तरबार. लेकिन यदि वो हर मिनट साठ से सौ बार तक धड़कता है तो यह भी सामान्य की श्रेणीमें आता है. लेकिन यदि साठ से कम है तो वो भी अनियमित है, और यदि सौ से ज़्यादा हैतो वो भी अनियमित है.जो एथलीट होते हैं आम तौर पर उनका हार्ट रेट कम मिलता है – पचास, पचपन. लेकिन यदिकिसी का बहुत कम है – मान लीजिए, चालीस - तो फिर चक्कर आने लगते हैं, बेहोशी होनेलगती है, तब ध्यान देना ज़रुरी है.# लेकिन एक्सरसाईज़ के बाद, दौड़ने के बाद, यदि यह अस्थाई रूप से सौ के ऊपर हो जाएतो?देखिए ये जो साठ से सौ बार तक धड़कने की बात कही मैंने वो रेस्टिंग या स्लीपिंग यानिआराम के वक्त या सोते वक्त की हार्ट-बीट्स की बात की है. आप उत्तेजना में हैं, आपघबराए हुए हैं, सीढ़ियां चढ़ के आए हैं तो थोड़ी बहुत हार्ट-बीट्स बढ़ना कोई एब्नॉर्मलबात नहीं है.# जी वापस आते हैं कार्डिएक अरेस्ट और हार्ट अटैक के बीच के अंतर में लोग हृदय में उलझते हैं, वे हृदय की शब्दावली में भी उलझ रहे हैं. सो कुछ बातों सेअवगत कराना आवश्यक हो जाता है. इन शब्दों का प्रयोग बहुधा हृदय-रोग-विशेषज्ञ करतेहैं: ‘मायोकार्डियल इन्फार्क्शन’, ‘एंजायना पेक्टोरिस’, ‘एरिद्मिया’ और ‘कार्डियलएरेस्ट’. मनुष्य के पास एक ह्रदय है, जो एक मांस का लोथड़ा है. खोखला है. जीवन भरधड़कता है. शरीर से आते ख़ून से भरता है, शरीर को फिर ख़ून फेंकता है. लेकिन इस मज़दूरको भी ख़ुराक चाहिए. नहीं तो यह भी कमज़ोर हो सकता है. घायल हो सकता है. मर भी सकताहै.सबको ख़ून देने वाले हृदय को ख़ून देने वाली तीन धमनियां हैं, जिन्हें कोरोनरीधमनियां कहा गया है. इन धमनियों में अगर रक्तप्रवाह आधा-अधूरा या पूरा अवरुद्ध होगातो हृदय के लिए समस्याएं पैदा होगी. ये समस्याएं ही ऊपर के चिकित्सकीय नामों मेंआपको बताई गई हैं.कोई धमनी पूरी तरह खून के थक्के से बन्द हो जाए, तो जिस हिस्से में वह खून पहुंचातीहो, वह मर जाए. हृदय का उतना मांस मृत, यह ‘मायोकार्डियल इन्फार्क्शन’ हुआ. इसे हीआम भाषा में जनता कई बार हार्ट-अटैक कह देती है.फिर अगर यह अवरोध आधा-अधूरा हुआ तो हो सकता है कि दर्द चलने या काम करने पर होलेकिन आराम करने पर न हो. यह स्थिति ‘एंजायना पेक्टोरिस’ कहलाती है. ‘एंजायना’ यानीदर्द, चाहे वह कहीं का भी हो. ‘पेक्टोरिस’ यानी छाती का. तो इस तरह ‘एंजायनापेक्टोरिस’ छाती में हृदय के कारण उठने वाले उस दर्द को कहा जाने लगा, जो‘मायोकार्डियल इन्फार्क्शन’ से कुछ कमतर है. ‘स्टेबल एंजायना’, ‘एंजायना’ का पहलाप्रकार है, जो काम करने पर या तनाव पर उठता है और कुछ देर में आराम करने पर मिटजाता है. एन्जायनारोधक दवाओं से इसमें आराम पड़ जाता है. लेकिन फिर एंजायना के औरप्रकार भी हैं. कई बार यह दर्द बैठे-बैठे बिना कोई काम किये या बिना तनाव के होगया. सामान्य एंजायना से यह दर्द कुछ लम्बा खिंच गया. या फिर एन्जाइनरोधक दवाओं सेनहीं गया. इस तरह के एंजायना को ‘अनस्टेबल एंजायना’ कहा जाता है. या फिर कोरोनरीबन्द न हुई हो, सिकुड़ गई हो. अब इस प्रकार के एंजायना को ‘प्रिंज़मेटल एंजायना’ कहाजाता है.या ऐसा भी हो सकता है कि कोरोनरी में ख़ून का रुकाव हो , लेकिन दर्द न हो. व्यक्तिको पता ही न चले. या मामूली उलझन-भर हो. या सिर्फ़ घबराहट. यह स्थिति ‘सायलेंटएंजायना’ कहलाती है. डायबिटीज़ में ऐसी कई मौतों से डॉक्टर रोज़ जूझते हैं.अब आइए ‘कार्डियक एरेस्ट’ पर. ‘कार्डियक एरेस्ट’ यानी हृदय का रुकना. हृदयधड़कते-धड़कते कब रुकेगा? जब उसकी इतनी मांसपेशी को ख़ून न मिले कि वह बिना ऑक्सीजन मरजाए. लेकिन फिर कई बार स्वस्थ हृदय भी ख़ून में तमाम रसायनों-तत्त्वों के बढ़ने-घटनेसे रुक सकता है. मांसपेशी ठीक है, लेकिन खून का पर्यावरण गड़बड़ है. ऐसा कैसे होगाइसके लिए ‘एरिद्मिया’ को ध्यान में रखनी ज़रूरी है. इसी ‘कार्डियक एरेस्ट’ को साधारणलोग ‘हार्ट फ़ेल’ होना भी कह देते हैं. हृदय मांसपेशी है. उसमें एक बिजली की लहरदारकौंध उठती है, तो वह धड़कता हुआ जिस्म में ख़ून फेंकता है. इस धड़कन का एक नियम, एकक्रम है, यही क्रम आपको ईसीजी में दिखता है. अब चाहे हृदय को ख़ून ढंग से न मिले औरचाहे ख़ून में कोई गड़बड़ हो जाए, उसके धड़कन अनियमित हो सकती है. वह मरा नहीं है,लेकिन वह रुक सकता है. वह अभी जीवित है, लेकिन आराम करने लग गया. लेकिन उसके आरामने मनुष्य की जान ले ली. यही कार्डियक एरेस्ट है. कई बार यह रुका हृदय दोबारा चलपड़ता है, कई बार कभी नहीं चलता. लेकिन अगर रुका हृदय दोबारा चला पर देर से चला, तोतब तक मस्तिष्क मर गया. अब यह मरा मस्तिष्क लेकिन चलता हृदय लिये व्यक्ति भला किसकाम का! यही ब्रेन-डेथ की स्थिति है.# क्या कोई हृदय बिना लंबे रोग के रुक सकता है?जी, बिल्कुल रुक सकता है. हृदय धड़कन से फूलता-पिचकता है. फूलना ख़ून से भरना है,पिचकना उसे आगे फेंकना. कुछ क्षणों की स्पन्दन-त्रुटि हुई. और वह वैसे नहीं धड़का,जैसे उसे स्वस्थ रूप से धड़कना चाहिए था. फिर चाहे वह अपनी ग़लती सुधार ले, चाहे नसुधारे, आदमी जा चुका.# ह्रदय के रुकने पर मृत्यु क्यूं होती है?जी वही, ह्रदय रुकता है तो मस्तिष्क में खून पहुंचना बंद हो जाता है, और एक बारमस्तिष्क रुका – जिसे हम ब्रेन डेड की स्थिति कहते हैं – तो फिर वो इर्रिवर्सेबलहै. यानी यदि अब ह्रदय फिर से धड़कना शुरू कर भी दे तो भी व्यक्ति मृत है. आदमीमस्तिष्क था, वह गया. रेने देकार्ते को याद कीजिए - कॉजिटो अर्गो सम. यानी मैंसोचता हूं, इसलिए मैं हूं. मस्तिष्क नहीं तो दुविधा नहीं. और न कोई चिन्तन. और नकोई अस्तित्व. कई बार इसी के चलते बड़ी इमोशनल स्थिति हो जाती है. मृतक के परिवारवाले कहते हैं कि ह्रदय तो धड़क रहा है, या ह्रदय ने तो धड़कना शुरू कर दिया. मगरनहीं. उनको बताना मुश्किल होता है कि मस्तिष्क का मरना आदमी का मरना है.# मतलब ह्रदय गति के चलने या रुकने से मृत्यु घोषित नहीं होती?मैं आपको एक दूसरा उदाहरण देता हूं, आजकल तो बीटिंग हार्ट सर्जरी होती है, मतलब किह्रदय धड़क रहा है और ऑपरेशन भी हो रहा है, लेकिन जब बाईपास ऑपरेशन हुआ करते थे, तोधड़कते हुए दिल को रोककर के एक बाईपास मशीन लगा दी जाती थी और तब ऑपरेट किया जाता थाहार्ट को. तो वो बाईपास मशीन दिल का काम करती थी और ब्रेन तक ब्लड सुनिश्चित करतीथी. वो बाईपास मशीन एक तरह से दिल की स्टेपनी थी.# यानी यदि मैं अपने समझने के लिए कहूं कि थोड़ी देर दिल रुक जाए या रोक दिया जाए तोकोई इश्यू नहीं लेकिन यदि दिमाग रुक जाए तो वो इश्यू है?दिमाग को यदि ग्लूकोस और ऑक्सीजन नहीं मिली पांच सात मिनट तक, बल्कि कुछ सेकेंडोंमें ही दिमाग में परिवर्तन आने शुरू हो जाते हैं.# क्या ये सत्य है कि दिल का तीसरा दौरा फैटल होता है या तीसरे हार्ट अटैक में मौतनिश्चित होती है?नहीं ऐसा कुछ नहीं है, कई बार लोग तीन चार पांच हार्ट अटैक भी सरवाईव कर ले जातेहैं. डिपेंड ये करता है कि छोटा हार्ट अटैक है, बड़ा हार्ट अटैक है, ग्लोबल है, लोकलहै. हार्ट के भी दो हिस्से हैं – लेफ्ट हार्ट के ज़्यादा खतरनाक होते हैं, राईट केतुलनात्मक रूप से कम होते हैं.क्या इनके आलावा भी ह्रदय की अन्य घातक और सामान्य बीमारियां हैं जिनके विषय मेंहमें, हम आम लोगों को, जानना चाहिए?मोटे तौर पर हार्ट की बिमारियों को आप चार कैटेगरी में बांट लीजिए. - हार्ट कीमांसपेशी की बीमारी- हार्ट को जो भी नसें खून पहुंचाती है उनकी बीमारी- हार्ट के चारों तरफ एक झिल्ली होती है, पेरिकार्डयम, उसकी बीमारी- हार्ट के अंदर जो वॉल्व होते हैं उसकी बीमारी कभी कभी क्या होता है कि हार्ट कीजो मसल होती है, उसमें कुछ ऐसी ऐसी बीमारी होती है, जिसका संबंध खून के कम होने सेनहीं होता, उसमें कुछ खराबी अपने आप आ जाती है, उसे कार्डियोमायोपैथी बोलते हैं.हार्ट की नसों की बीमारी के बारे में हम बात कर ही चुके हैं - 'मायोकार्डियलइन्फार्क्शन' और 'एंजायना पेक्टोरिस' और वो सब.हार्ट की झिल्ली में पानी भर गया या सूजन आ गई - तो वो पेरिकार्डयल हार्ट डिज़ीज़ होगई.कई बार हार्ट के वॉल्व खराब हो जाएंगे तो हार्ट ठीक से भरेगा नहीं, खून फैंकेगानहीं – तो वो तो वॉल्वयूलर# हार्ट डिज़ीज़ की कोई निश्चित उम्र तो नहीं होती है, लेकिन किस उम्र में प्रायिकताबढ़/घट जाती है?हार्ट की बीमारियां, पहली बात तो महिलाओं में कम और पुरुषों में ज़्यादा हैं.# कारण?बड़ा कारण जेनेटिक्स और हार्मोनल है. इसके अलावा महिलाएं सामान्यतः धुम्रपान,मदिरापान से दूर रहती हैं.अब तक हार्ट अटैक प्रौढ़ और वृद्ध पुरुषों में देखने को मिलते थे लेकिन इधर खान-पानमें गड़बड़ी, व्यायाम न करने और नशा-वसा (उन्होंने नशा-वशा कहा था, मगर नशा-वसा भीग़लत नहीं लगता) के चक्कर में पच्चीस-तीस साल के लड़कों कीएंजियोप्लास्टी-एंजियोग्राफी हो रही है, हार्ट अटैक बढ़ रहे हैं – लाइफस्टाइल!एंजियोग्राफ़ी यानी दवा डालकर कोरोनरी धमनियों की जांच की रुकावट कहां और कितनी है.एंजियोप्लास्टी यानी उसे स्टेंट डालकर खोलना. लोग देर तक जग रहे हैं, ओवर टाइम कररहे हैं, ऑफिस में डेडलाइन दी हुई है. कंपटीशन है. इतनी ज़्यादा लाईफ थ्रेटनिंग होगई है कि...इतना तनाव में है पारिवारिक और व्यवसायिक जीवन को लेकर...# माना मेरे सामने किसी को हार्ट अटैक आया है तो मैं कैसे पहचान सकता हूं और मुझेक्या करना चाहिए?वैसे तो मेडिकल साइंस की किताबें ये कहती हैं कि जबड़े से लेकर नाभि तक कहीं भी दर्दहार्ट की वजह से हो सकता है. कहिए नाभि में दर्द हो, कहिए पसली में दर्द हो, इवनदांत का दर्द...लेकिन ज़्यादातर अगर कहीं भी, विशेष रूप से सीने में भारीपन, दर्द, उलझन, पसीना आना,विशेष रूप से बाएं कंधें में दर्द – ये हो रहा है तो उसक वक्त हार्ट अटैक के बारेमें सोचना है. # कई बार सीने में दर्द नहीं होता, केवल घबराहट होती है, उलझन होतीहै और व्यक्ति डॉक्टर के पास नहीं जाता.# कभी कभी वो दर्द के लिए पेन किलर खा लेता है – पसलियों में दर्द है, सोचता है ऐसेही सही हो जाएगा.# कभी कंधे में दर्द होता हा तो सोचता है मोच आ गई होगी, मांसपेशी खिंच गई होगी औरदवा खा लेता.# कभी-कभी किसी के ऊपरी पीठ या पेट में दर्द होता है, वो उसे बदहज़मी समझता है –लेकिन वो हार्ट अटैक होता है. ये सारी बातें समझना ज़रुरी है कि सिमटम्पस कोसीरियसली लिया जाए और उसका इलाज किया जाए. डॉक्टर के मिला जाए, ईसीजी होगा, दो तीनखून की जांचें होंगी और उसके बाद जरूरत पड़ने पर जो भी दवाएं शुरू करनी होंगी वोडॉक्टर शुरू कर देंगे.# फर्स्ट एड के विषय में कुछ बताना चाहेंगे?वह बेसिक लाइफ़ सपोर्ट है, पूरा अलग विषय है. और अधूरे ज्ञान से लोग कहीं नुकसान नकर बैठें. उसका इंस्ट्रक्टर-कोर्स होता है दर्पण भाई. हैंड्स ऑन. वह लेख से नहींसिखाया जा सकता.# इंस्ट्रक्टर-कोर्स कहां से प्राप्त हो सकता है?एम्स और पीजीआई-जैसे संस्थान उसे कराते हैं. पंजीकरण कराकर जाना होता है. वहप्रैक्टिकल है. लोग बीएलएस यानी बेसिक लाइफ़ सपोर्ट सीख लें तो बेहतर.# कोई यू ट्यूब वीडियो?ये वीडियो डीएमसीएच लुधियाना के डॉ. अनुज ग्रेवल और डॉ. विवेक गुप्ता द्वारा बनायागया है:--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:श्रीदेवी से बढ़िया नागिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में न हुई है, न होगीश्रीदेवी के वो 11 गाने, जो उन्हें हमेशा ज़िंदा रखेंगेश्रीदेवी के फैन नहीं हैं तो ये 10 फिल्में देखिए, बन जाएंगेश्रीदेवी की मौत पर फैक्ट बताकर कांग्रेस ने निहायती छिछली हरकत की हैकौन कह सकता था कि ये श्रीदेवी की आखिरी तस्वीरें, आखिरी वीडियो होगा!पत्रकार सीमा साहनी ने कैद होने से ठीक पहले इतिहास रच दिया थाकाश कोई कह दे कि श्रीदेवी के मरने की ख़बर अफवाह हैमैंने मां से कहा था, ‘अरे श्रीदेवी ऐसी नहीं है’श्रीदेवी ने मरकर मेरा भरोसा तोड़ दिया--------------------------------------------------------------------------------वीडियो देखें:Sridevi के किस्से जब रजनीकांत ने श्रीदेवी के पैर छुए थे: