11 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 11 फ़रवरी 2016, 08:18 AM IST)
फोटो - thelallantop
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पाकिस्तानी अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने कोर्ट में सनसनीखेज खुलासा किया है. उसने स्पेशल कोर्ट को बताया कि इशरत जहां आतंकी संगठन लश्करे-तैयबा की सुसाइड बॉम्बर थी. इस खुलासे से देश में पॉलिटिकल सनसनी मच सकती है.
https://twitter.com/PTI_News/status/697646045740707840
इससे सबसे ज्यादा राहत की सांस बीजेपी लेगी, जिसके मौजूदा प्रेसिडेंट अमित शाह इशरत जहां कथित फेक एनकाउंटर केस में फंसे थे. हालांकि बाद में सीबीआई ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी. इशरत के कथित एनकाउंटर के समय अमित शाह गुजरात के गृह मंत्री थे. आरोप था कि इशरत और उसके साथी गुजरात के उस वक्त के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रच रहे थे. बाद में मुद्दे ने राजनीतिक रूप लिया और दावा किया गया कि इशरत बेकसूर थी. लेकिन वह संदिग्ध आतंकवादियों के साथ थी, इसलिए उसका भी एनकाउंटर कर दिया गया. कई 'सेक्युलर' दलों ने इशरत को बेकसूर मानते हुए बयान जारी किए. जेडीयू नेता अली अनवर ने यहां तक कह दिया था कि इशरत जहां बिहार की बेटी थीं और उनकी लड़ाई इंसाफ की लड़ाई है.
https://twitter.com/ANI_news/status/697689882773196801
हालांकि हेडली ने यह दावा तो किया है कि इशरत आतंकी थी, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उसका एनकाउंटर फर्जी नहीं था. फर्जी एनकाउंटर का केस अब तक गुजरात हाई कोर्ट में चल रहा है. वैे ताजा खुलासे से बीजेपी का एग्रेसिव होना लाज़िम है. बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कह भी दिया है कि जो लोग इशरत को शहीद और बिहार की बेटी बता रहे थे, अब उनकी आंख अब खुल गई होगी. हेडली के बयान के बाद उन नेताओं को भी अपना बयान वापस ले लेना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
15 जून 2004 को महाराष्ट्र के मुंब्रा की रहने वाली इशरत जहां का एनकाउंटर हुआ था. तब वह 19 साल की थी. इस एनकाउंटर में तीन लोग और मारे गए थे. प्राणेश पिल्लई उर्फ जावेद गुलाम शेख. अमजद अली राना और जीशान जौहर. इन्हें गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मारा था.
पुलिस की इस टीम को DIG डीजी वंजारा लीड कर रहे थे. इन लोगों को बाद में सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर में जेल हुई. पुलिस के मुताबिक इशरत और उसके साथी लश्कर ए तैयबा के ऑपरेटिव थे. वह गुजरात के उस वक्त के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश रच रहे थे.
https://twitter.com/ANI_news/status/697689647141359616
2009 में अहमदाबाद मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने फैसला सुनाया कि एनकाउंटर फर्जी था. इसके बाद गुजरात सरकार मामले को हाई कोर्ट में ले गई. 3 जुलाई 2013 को सीबीआई ने पहली चार्जशीट फाइल की. उसमें भी यही कहा गया कि एनकाउंटर फर्जी था.
ये एक एंगल है. मगर दूसरा एंगल ये है इशरत जहां आतंकवादी थी या नहीं. सीबीआई ने भी इशरत को मासूम नहीं बताया. 2004 में लाहौर के लश्कर से जुड़े एक पत्र ने इशरत और उसके साथ मरने वालों को अपना शहीद बताया था.
https://twitter.com/ANI_news/status/697663306438291456
https://twitter.com/ANI_news/status/697662674004357121
2007 में लश्कर के पॉलिटिकल विंग जमात-उद-दावा ने कहा कि गलती से ये कह दिया गया था. 2010 में बात आई कि डेविड हेडली ने एनआईए की जांच के दौरान इशरत का नाम लिया था. मगर मीडिया में आई इन खबरों को एजेंसी ने खारिज कर दिया था.
उस वक्त CBI ने ऐसी अटकलें जताई थीं कि उसी कोटरी के एक और IPS अफसर राजेंद्र कुमार इस तरह की खबरें प्लांट कर रहे हैं. जून 2013 में IB चीफ आसिफ इब्राहिम ने PMO को बताया कि इशरत जहां लश्कर की आतंकवादी थी और इसके हमारे पास पुख्ता सबूत हैं. ये आतंकवादी नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी को मारना चाह रहे थे.
अब फरवरी 2016 में हेडली ने भी स्पेशल कोर्ट में कहा कि इशरत लश्कर की सुसाइड बॉम्बर थी.