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4 आतंकियों को मारने वाले हंगपन दादा को 'अशोक चक्र'

जख्मी हालत में अपने साथियों को बचाते, आतंकियों को मारते हुए शहीद हुए थे हंगपन दादा.

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14 अगस्त 2016 (अपडेटेड: 14 अगस्त 2016, 12:33 PM IST)
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Source : Twitter
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26 मई 2016. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से कुछ आतंकवादी नॉर्थ कश्मीर में घुस आए. बॉर्डर पर तैनात जवानों से मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में एक 36 साल के जवान हंगपन दादा शहीद हो गए. जाते-जाते वो चार आतंकियों को भी ढेर कर गए. हंगपन दादा, जो  मुल्क की खातिर 13 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़े. 15 अगस्त को हंगपन दादा को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा. इनके अलावा पठानकोट हमले में शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा. 1. हंगपन दादा अरुणाचल प्रदेश के सुदूरवर्ती बोदुरिया गांव के रहने वाले थे. 2. 1997 में इंडियन आर्मी जॉइन किए. वो 35 राष्ट्रीय राइफल्स में पोस्टेड थे. 3. साथी जवान उन्हें प्यार से दादा बुलाते थे. पिछले साल उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के शमसाबरी रेंज में की गई थी. ये 13 हजार फीट की ऊंचाई वाला इलाका है. जहां बर्फ ही बर्फ होती है. 4. इंडियन आर्मी के मुताबिक 26 मई को आतंकियों ने घुसपैठ की. मुठभेड़ शुरू हुई. 24 घंटे तक चली. आतंकियों ने गोलियां चलाई. जिसका जवाब सेना ने भी बखूबी दिया. दादा ने सूझबूझ दिखाई. 5. हंगपन दादा अपने साथियों को बचा ले गए. पर खुद बुरी तरह जख्मी हो गए. उन्हें गोली लगी थी. फिर भी वो लड़ते रहे और चार आतंकियों को मार गिराया.  दादा को उसके बाद अस्पताल ले जाया गया. जहां उनकी मौत हो गई. दादा के दो बच्चे भी हैं.

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