"मुसलमान होने की वजह से..."- नूह में जिनके यहां चला बुलडोजर, उन्होंने क्या-क्या आरोप लगाए?
नूह में 1200 से अधिक निर्माणों पर चला बुलडोजर. ज्यादातर दुकानें-घर मुस्लिम समुदाय के लोगों के.

हरियाणा के नूह में हुई हिंसा (Nuh Violence) के बाद कथित तौर पर अवैध कई निर्माणों को गिरा दिया गया. इधर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस बुलडोजर कार्रवाई (Bulldozer Action) पर रोक लगा दी. बुलडोजर एक्शन रुकने के बाद नूह में जगह-जगह मलबे का ढेर लगा है. इस बीच कई लोगों ने प्रशासन और सरकार पर आरोप लगाए हैं.
जिनके निर्माण तोड़े गए हैं, उनमें से बहुत से लोगों का कहना है कि वैध कागजात होने के बाद भी उनके घरों और दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया. यहां तक की उन्हें कोई नोटिस भी नहीं दिया गया. आज तक से जुड़े राम किंकर सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, नूह में हिंसा भड़कने के बाद मेवाती मेडिकल कॉलेज के पास भी प्रशासन का बुलडोजर चला था. जहां नवाब शेख उर्फ अब्दुल रशीद के दुकान को भी तोड़ा गया था.
अब्दुल रशीद के मुताबिक, नूह में किला नंबर 39 में 4/1 और 5/1 किला नंबर में मेडिकल, परचून, लैब टेस्ट की दर्जनभर दुकानें प्रशासन के बुलडोजर से जमींदोज हो चुकी हैं. अब्दुल रशीद ने दावा किया कि उनकी दुकान को धार्मिक भेदभाव की वजह से तोड़ा गया. उन्होंने कहा,
‘’प्रशासन की कार्रवाई के वक्त मैं अधिकारियों से मिलने गया था. जमीन के कागज दिखाए जाने के बाद भी किसी ने हमारी नहीं सुनी, हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया. मैंने खुद चिल्ला-चिल्लाकर कहा कि मैं किसान का बेटा हूं. हजारों किसानों ने दुकान बना रखी है, ये अवैध नहीं है. दस सालों से स्ट्रक्चर कच्चा-पक्का खड़ा था. कभी कोई नोटिस नहीं आया. 10 साल पहले क्यों नहीं तोड़ा? अगर अवैध थी तो क्यों बनाने दी थी दुकान? जब मैं बना रहा था तब अवैध नहीं थी ये. आज जब झगड़ा हुआ तो अवैध हो गई.''
अब्दुल रशीद ने आगे कहा,
''तोड़फोड़ सिर्फ भेदभाव की वजह से हुई है. अगर प्रशासन चाहता तो झगड़े नहीं होते. यात्रा के दौरान क्यों होमगार्ड लगाए गए थे? पूरी फोर्स क्यों नहीं लगाई गई?''
वहीं हिंसा की आग नलहड़ से झंडा चौक तक भी पहुंची. जहां तीन मंजिला मार्बल शोरूम पर प्रशासन का बुलडोजर चला. शोरूम के मालिक लियाकत ने भी आरोप लगाया कि बिना कोई नोटिस के बुलडोजर चला दिया. उन्होंने कहा,
कितने निर्माण गिराए गए?''हमें ना कोई नोटिस दिया गया और ना ही पूछा गया कि यह काम क्यों कर रहे हो, बस बुलडोजर चला दिया. हमने 2019 में जमीन ली है 2020 में निर्माण कराया. एक साल तक निर्माण होता रहा. हमारे पास इससे पहले भी कोई नोटिस नहीं है. अपनी जमीन है, रजिस्ट्री है. कागजात पूरे होने के बाद नक्शा पास करके बिल्डिंग बनवाई है. प्रशासन यह बताए कि हमारा दोष क्या है? कार्रवाई के वक्त बात करने की कोशिश की तो मारपीट कर भगा दिया. इसमें हमारा करीब 10 लाख का नुकसान हो गया है.''
नूह में सांप्रदायिक हिंसा के बाद से ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुआ. प्रशासन के मुताबिक, ये कार्रवाई सीधे हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के आदेश पर की गई. हिंसा की जगह पर स्थित निर्माण एक-एक कर गिराए गए.
आजतक से जुड़े सतेंदर चौहान की रिपोर्ट के मुताबिक, नूह के पुन्हाना, पिंगनवा, नगीना, टौरू और फिरोजपुर झिरका में अर्धसैनिक बल और पुलिस की उपस्थिति में बुलडोजर एक्शन हुआ. नूह में अब तक 37 जगहों पर 57.5 एकड़ जमीन से कथित अवैध निर्माण हटाए गए हैं. हिंदुस्तान टाइम्स में जुड़ीं लीना धनखड़ की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 1208 निर्माणों को जमींदोज किया जा चुका है. रिपोर्ट बताती है कि इनमें से ज्यादातर निर्माण मुस्लिम समुदाय के लोगों के थे.
नूह-मेवात में 31 जुलाई को बृजमंडल यात्रा के दौरान हिंसा हुई थी. यात्रा के दौरान दो समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए थे. देखते ही देखते यह विवाद दो समुदाय के लोगों के बीच हिंसा में बदल गया. बड़े स्तर पर हुई हिंसा में 2 होमगार्ड समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी.
हिंसा के बाद से अब तक पूरे हरियाणा में करीब 104 FIR दर्ज की गई हैं. इनमें से कई केस सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने के लिए दर्ज हुए हैं. पुलिस ने अलग-अलग इलाकों से अब तक करीब 216 लोगों को अरेस्ट किया है और 83 लोगों को हिरासत में लिया है.
वीडियो: कश्मीरी पंडितों पर स्मृति ईरानी को फारूख अब्दुल्ला का जवाब वायरल

