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हरियाणा में OPS पर बवाल, सरकारी कर्मचारियों पर लाठी चली

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उनका आंदोलन गैर राजनीतिक है.

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19 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 19 फ़रवरी 2023, 11:09 PM IST)
protest for ops in haryana
पंचकूला-चंडीगढ़ बॉर्डर पर OPS के लिए प्रदर्शन करते सरकारी कर्मचारी (फोटो: आजतक)
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पुरानी पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) को लेकर एक बार फिर से बवाल शुरू हो गया है. इस बार ये मुद्दा हरियाणा (Haryana) में गरमाया है. रविवार 19 फरवरी की सुबह हजारों की संख्या में कर्मचारी पंचकूला में इकट्ठा हुए और सरकार से पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली की मांग करने लगे. राज्य सरकार ने बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया. राज्य की भाजपा सरकार का कहना है कि ये प्रदर्शन बजट सत्र से एक दिन पहले किया गया है. इस घटना के पीछे कांग्रेस का हाथ हैं, लेकिन प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उनका आंदोलन गैर राजनीतिक है. और सरकार ने उनकी मांग नहीं सुनी तो वे सरकार बदल देंगे. 

आजतक से जुड़े मंजीत सहगल की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को हजारों कर्मचारियों ने ओपीएस की बहाली को लेकर पंचकूला में जोरदार प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि अगर ओपीएस को बहाल नहीं किया गया तो सरकार बदल दी जाएगी. आंदोलन के नेता पुरानी पेंशन स्कीम पर देश के अर्थशास्त्री और राजनेताओं के बयानों से भी सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि सांसद और विधायक खुद कई-कई पेंशन ले रहे हैं लेकिन कर्मचारियों की पेंशन पर रोक लगाई जा रही है, ये किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है.

इससे पहले हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों ने चंडीगढ़ में CM मनोहर लाल खट्‌टर (Manohar Lal khattar) के सरकारी आवास के घेराव का ऐलान किया था. जिसके चलते 19 फरवरी की सुबह ही पुलिस ने पंचकूला और चंडीगढ़ की सीमाओं को सील कर दिया. और साथ ही भारी मात्रा में पुलिस बल की तैनाती भी कर दी गई. दोपहर होते-होते आंदोलनकारियों ने पंचकूला से चंडीगढ़ कूच करने का फैसला किया. लेकिन पुलिस ने बैरिकैडिंग लगाकर कर्मचारियों को रोक दिया. लेकिन कर्मचारी नहीं रुके उन्होंने बैरिकैडिंग हटाकर चंडीगढ़ में घुसने की कोशिश की. जिसके चलते पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिसके बाद कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई जिसमें कई कर्मचारियों को चोटें भी आईं. इसके बाद भी कर्मचारी नहीं रुके तो पुलिस ने उन पर जमकर लाठियां भांजी. जिसके बाद चंडीगढ़-पंचकूला बॉर्डर पर माहौल तनावपूर्ण बना गया. हालात को काबू में करने के लिए वहां पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई है.  

इस आंदोलन के बीच राज्य में सत्ताधारी बीजेपी का कहना है कि 20 फरवरी को राज्य का बजट सत्र शुरू होने वाला है. इससे एक दिन पहले हुए इस आंदोलन के पीछे कांग्रेस का हाथ है. कांग्रेस अगले साल होने वाले लोकसभा और विधानसभा के चुनावों से पहले इस तरह के मुद्दे उठा रही है. इसे लेकर BJP नेता प्रवीण आत्रेय ने कहा, 

"पुरानी पेंशन स्कीम को साल 2004 में बंद किया गया था, उस वक्त केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी. कांग्रेस ने अपने शासनकाल में जानबूझकर इस मुद्दे को नहीं उठाया. अब इसे तूल दिया जा रहा है ताकि चुनाव में इसका फायदा उठाया जा सके."

वहीं कांग्रेस नेता केवल ढींगरा ने भाजपा के आरोपों को नकारते हुए पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को जायज बताया है.

सरकार और विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप के बीच कर्मचारी नेता विजेंद्र धारीवाल ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कर्मचारी चुनाव को लेकर नहीं बल्कि 2018 से पुरानी पेंशन की बहाली की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार ने उनकी मांग को लेकर कोई कदम नहीं उठाया और उनको दबाने की कोशिश की जा रही है.

बता दें कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने 10 फरवरी को बजट पेश करते हुए कहा था कि वे नई पेंशन स्कीम के बजाय राज्य कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ देंगे. इससे पहले हिमचाल प्रदेश की सरकार ने 14 जनवरी को OPS लागू करने की घोषणा की थी. वहीं छत्तीसगढ़ और पंजाब की सरकारों OPS को पहले ही मंजूरी दे चुकी हैं.  

वीडियो: खर्चा पानी: RBI ने OPS को लेकर राज्यों से क्या बोल दिया है?

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