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मैंने नहीं बताई थी बजरंगबली की जाति: योगी आदित्यनाथ

हमने आपको पहले ही बताया था कि योगी आदित्यनाथ ने असल में क्या कहा था...

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13 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 12 दिसंबर 2018, 04:21 AM IST)
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राजस्थान चुनाव के लिए प्रचार करते हुए योगी आदित्यनाथ ने अलवर में एक रैली की. इसमें उनके भाषण पर खूब विवाद हुआ. लोगों ने कहा, उन्होंने हनुमान को दलित कहा है. हनुमान की जाति बताई है. इस विवाद पर योगी ने अब सफाई दी है (फोटो: PTI+IANS)
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मैंने नहीं बताई थी बजरंगबली की जाति.
ये बात कही है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने. 12 दिसंबर को वो बिहार की राजधानी पटना पहुंचे. यहीं मीडिया से बात करते हुए उन्होंने ये चीज कही. हनुमान की जाति वाली बात पर काफी विवाद हुआ था. ये शायद पहली बार था कि इस मामले पर योगी ने अपनी सफाई दी. हनुमान की जाति वाली बात का संदर्भ यूं है कि 7 दिसंबर को राजस्थान में विधानसभा चुनाव होना था. बीजेपी की तरफ से प्रचार करने वालों में योगी आदित्यनाथ भी थे. तारीख थी 27 नवंबर. योगी की एक रैली थी अलवर में. वो मालाखेड़ा में बीजेपी के उम्मीदवार मास्टर राम किशन के लिए वोट मांगने पहुंचे थे. मंच से भाषण देते हुए योगी ने कहा-
हम सबका संकल्प बजरंगी संकल्प होना चाहिए. बजरंगबली का संकल्प. बजरंगबली हमारी भारतीय परंपरा में एक ऐसे लोकदेवता हैं, जो स्वयं वनवासी हैं, गिरवासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं, सबको लेकर के… सभी… पूरे भारतीय समुदाय को… उत्तर से ले के दक्षिण तक, पूरब से पश्चिम तक, सबको जोड़ने का कार्य बजरंगबली करते हैं. और इसलिए बजरंगबली का संकल्प होना चाहिए. 
कैसा विवाद हुआ? मीडिया, सोशल मीडिया सब जगह योगी का ये बयान घूमने लगा. लोगों ने लिखा कि योगी ने हनुमान को दलित बताया है. सवाल उठा कि हनुमान तो वानर थे. उनकी जाति कैसे हो सकती है? चूंकि ये आस्था से जुड़ी बात थी, तो लोग धार्मिक ऐंगल पर भी गुस्सा हुए. फिर ये भी खबर आई कि राजस्थान के सर्व ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने आहत होकर योगी को कानूनी नोटिस भी भेज दिया. कई लोगों का रिऐक्शन तो ऐसा था मानो दलित होना कोई अधम चीज है. कोई गाली है जैसे. कि किसी को दलित कह दिया, माने उसकी बेइज्जती कर दी.
काफी गुस्से वाले रिऐक्शन आए लोगों के. कई आहत थे. कई ने हंसी उड़ाई.
काफी गुस्से वाले रिऐक्शन आए लोगों के. कई आहत थे. कई ने हंसी उड़ाई. 

क्या सच में योगी ने हनुमान को दलित कहा था? नहीं. 'द लल्लनटॉप' में हमारे साथी अविनाश ने उसी समय खबर की थी.
लिखा था कि योगी ने हनुमान को दलित नहीं कहा. वो बात एक सिक्वेंस में आई थी, जिसे कहने का योगी आदित्यनाथ का ये मतलब था कि हनुमान वनवासी, गिरवासी, दलित और वंचित आदि को एक करते हैं, जोड़ते हैं. वनवासी और गिरवासी का मतलब जंगलों और पहाड़ों में रहने वाले. यानी जैसे आदिवासी होते हैं. जिनके लिए हम अनुसूचित जनजाति या ट्राइबल जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं.
अविनाश ने ये भी कहा था कि योगी के जिस बयान के आधार पर माना जा रहा है कि उन्होंने हनुमान को दलित बताया, उसी बयान के आधार पर कहा जा सकता है कि उन्होंने हनुमान को आदिवासी बताया. अब एक ही शख्सियत को अनुसूचित जनजाति (ST) का भी कहा जाए और उसी को अनुसूचित जाति (SC) का भी कहा जाए, ये तो विरोधाभास भी होगा.
मगर लोगों ने ये तर्क नहीं लगाया और पूरे बयान में से बस हनुमान और दलित को ले उड़े. जबकि असल में शायद योगी के कहे का मतलब था कि लोकदेवता बजरंगबली वनवासी, गिरवासी, दलित, वंचित सबको साथ लेकर आए. उत्तर से दक्षिण तक और पूरब से पश्चिम तक लोगों को एक धागे में जोड़ा. रामायण की कहानी में राम की सेना देखिए. उसमें बंदर हैं, रीछ हैं, गिलहरी भी मदद करने आई है, पक्षी भी हेल्प कर रहे हैं, इंसान भी हैं. कितनी वैरायटी है. इतनी विविधता होते हुए भी राम की सेना में कितनी यूनिटी थी. इनको आपस में जोड़ने वाले एक फैक्टर हनुमान भी तो थे. कुल मिलाकर बात यही थी कि योगी ने हनुमान को दलित नहीं बताया था. ये बात हमने आपको पहले ही बताई थी और अब योगी आदित्यनाथ ने भी बता दी है.


यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को दलित कहा या आदिवासी?

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