शहीदों का शव गाड़ी में रखते वक्त रोने लगे CRPF के जवान
अभिनंदन के आने से खुशी का माहौल था, जवानों की शहादत से था कश्मीर में मातम.
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अपने साथियों की डेडबॉडी में रखने के दौरान CRPF के जवानों की आंखों में आंसू आ गए. (फोटो : रिफ़त अब्दुल्ला ट्वीटर स्क्रीन ग्रैब)
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1 मार्च, 2019. करीब 52 घंटे तक पाकिस्तान की कैद में रहने के बाद विंग कमांडर अभिनंदन भारत लौट आए. पूरे देश में खुशियां मनाई गईं. अटारी बाघा बॉर्डर पर आतिशबाजी हुई, ढोल-नगाड़े बजे और अबीर-गुलाल उड़ता हुआ नज़र आया. लेकिन देश में एक और जगह थी, जहां हमारे जवान आतंकियों से लोहा ले रहे थे. ये जगह थी कश्मीर का हंदवाडा. हंदवाड़ा के लंगेट के बाबागुंड गांव में 28 फरवरी की रात से ही सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ चल रही थी. सुरक्षा बलों ने एक आतंकी को मार गिराया था. लेकिन दूसरा आतंकी मलबे में छिप गया था. सुरक्षा बलों को लगा कि दोनों मारे गए हैं. इसी बीच देर रात एक बजे मलबे में छिपा आतंकी बाहर निकला और सुरक्षा बलों पर फायरिंग कर दी. इस फायरिंग में सीआरपीएफ के दो जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस के दो जवान शहीद हो गए.

शहीद जवानों में बिहार के सीआरपीएफ के जवान पिंटू सिंह भी थे.
ये 1 तारीख की बात थी. पूरे देश का ध्यान विंग कमांडर अभिनंदन की ही तरफ था. लेकिन 2 तारीख को जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए जवानों का अंतिम संस्कार होना था. उनके शवों को ताबूत में रखकर उनके परिवार वालों तक पहुंचाना था. जब सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान अपने साथियों के शवों को गाड़ियों में रख रह थे, तो उनकी आंखों में आंसू थे. वो रो रहे थे. देखिए उसका वीडियो जिसे जम्मू-कश्मीर के पत्रकार रिफ़त अब्दुल्ला ने ट्वीट किया है.
ये उन जवानों के आंसू हैं, जो आतंकियों से मुठभेड़ करते हैं. लेकिन आंसू भावुकता के हैं, ये आंसू इंसानियत के हैं. क्योंकि इन जवानों ने अपने साथी खोए हैं. ऐसी मुठभेड़ में, जो कश्मीर की नियति बन गई है. पहले पुलवामा में आतंकी हमला हुआ, तो 40 जवान शहीद हुए. उस वक्त को पलटवार का भी मौका नहीं था. अब मुठभेड़ हुई तो चार जवान शहीद हुए. पलटवार भी हुआ, दो आतंकी मारे भी गए. लेकिन जिन जवानों ने अपने चार साथी खो दिए, उनकी आंखों के आंसुओं को तो सूखने में वक्त लगेगा ही लगेगा.
विंग कमांडर अभिनंदन से पहले 1971 में पाकिस्तान में फंसे जेएल भार्गव की कहानी

शहीद जवानों में बिहार के सीआरपीएफ के जवान पिंटू सिंह भी थे.
ये 1 तारीख की बात थी. पूरे देश का ध्यान विंग कमांडर अभिनंदन की ही तरफ था. लेकिन 2 तारीख को जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए जवानों का अंतिम संस्कार होना था. उनके शवों को ताबूत में रखकर उनके परिवार वालों तक पहुंचाना था. जब सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान अपने साथियों के शवों को गाड़ियों में रख रह थे, तो उनकी आंखों में आंसू थे. वो रो रहे थे. देखिए उसका वीडियो जिसे जम्मू-कश्मीर के पत्रकार रिफ़त अब्दुल्ला ने ट्वीट किया है.
CRPF men broke down after bodies of their colleagues were put in a Vehicle. Two CRPF men and two J&K Police men were killed in an Encounter in Langate Handwara yesterday. Ye Kashmir main ab roaz ki kahani hay. Aakhir kab tak pic.twitter.com/ymCgE2xzCs
— Rifat Abdullah (@rifatabdullahh) March 2, 2019
ये उन जवानों के आंसू हैं, जो आतंकियों से मुठभेड़ करते हैं. लेकिन आंसू भावुकता के हैं, ये आंसू इंसानियत के हैं. क्योंकि इन जवानों ने अपने साथी खोए हैं. ऐसी मुठभेड़ में, जो कश्मीर की नियति बन गई है. पहले पुलवामा में आतंकी हमला हुआ, तो 40 जवान शहीद हुए. उस वक्त को पलटवार का भी मौका नहीं था. अब मुठभेड़ हुई तो चार जवान शहीद हुए. पलटवार भी हुआ, दो आतंकी मारे भी गए. लेकिन जिन जवानों ने अपने चार साथी खो दिए, उनकी आंखों के आंसुओं को तो सूखने में वक्त लगेगा ही लगेगा.
विंग कमांडर अभिनंदन से पहले 1971 में पाकिस्तान में फंसे जेएल भार्गव की कहानी
