हाफिज सईद को LOL सलाम! JNU सपोर्ट की खबर फर्जी है
JNU में कुछ बकलोलों ने एंटी इंडिया नारे लगाए. फिर हाफिज सईद के 'अकाउंट' से सपोर्ट की खबर आई. लेकिन सच कम लोग जानते हैं.
Advertisement

फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
जब जेएनयू में इंडिया तोड़ने, शहीद अफजल गुरु और कश्मीर की आजादी के कुछ बकलोलों ने नारे लगाए, तो 'प्रो और एंटी' लोग इकट्ठा हुए. और फैसला हुआ कि फेसबुक, ट्विटर, 'न्यूज चायनलों' और 'यहां क्लिक करें' टाइप वेबसाइट्स पर आज का हॉट टॉपिक यही है. #ShutDownJNU ट्रेंड करने लगा. हमने भी गूगल पर कीवर्ड डाला JNU. और फिर एक नई ही गाथा सामने आई. जिसे जानना हम सब के लिए जरूरी है.
एक वेबसाइट ने कहा, आतंकी हाफिज सईद जेएनयू में एंटी इंडिया नारे लगाने वालों के सपोर्ट में है. खबर पक्की बताने के लिए एक ट्वीट को खबर में चेपा गया. हमने क्लिक किया तो देखा आतंकी हाफिज सईद का ट्विटर अकाउंट @HafeezSaeedJUD. भगवान कस्समस, फरवरी में इससे ज्यादा किसी और बात पर हंसी नहीं आई. इत्ता बड़ा आतंकी और फॉलोअर्स सिर्फ 2233. इससे कई लाख गुना फॉलोअर्स तो हमारे मासूम KRK के हैं. पर पहले आप, खबर देखो. हमारी नहीं, उस वेबसाइट की.
अब जरा लोड डालिए. और सोचिए. इत्ता बड़ा आतंकी इंडिया की इत्ती छोटी छोटी बातों पर ट्वीट करेगा क्या? बिलकुल नहीं. नापाक साजिश नाम की जो चीज होती है. उसको सेट करने में लगता है वक्त. अगर ऐसे आतंकी सोशल मीडिया पर वक्त बिताने लगे, तो अपने अजित डोभाल सर कब का लपक चुके होते इस आतंकी को. थ्रू ट्विटर.
और भी चंपत हैं जमाने में..
ट्विटर पर अकाउंट बनाने में कित्ती देर लगती है. तनिक भर. न पइसा लगता है. न कौनो आधार कार्ड. हां तो ऐसे ही कुछ चंपतों ने हाफिज सईद का ट्विटर पर फर्जी अकाउंट बनाया हुआ है. एक और हैंडल है. नाम है @HafizSaeedLive. इससे भी एंटी इंडिया ट्वीट होते हैं. पर अगेन वही बात. फॉलोअर्स 1982. आंकड़ा देखकर ये न पूछ बैठना, '84 में कहां थे तुम?' अब इस दूजे अकाउंट से हुए ट्वीट पढ़िए.
तो असली अकाउंट तुम ही बताओ लल्लन?
@HafizSaeedJUD
अब दिमाग लगाकर आप इस ट्विटर हैंडल पर जाने की सोच रहे हैं. तो ठहरिए. आगे अंधा 404 ERROR मोड़ है. कुछ नहीं मिलेगा. क्योंकि ट्विटर यूजर्स का तो नहीं पता, लेकिन ट्विटर अमन की आशा प्रेमी है. साल था 2014, हाफिज सईद का @HafizSaeedJUD सस्पेंड कर दिया गया था. कमसे कम पाकिस्तानी न्यूज मीडिया 'द डॉन' तो यही कह रहा है.
किसने लगाए थे बवाली नारे?
जेएनयू का बजरंग दल समझ लीजिए इसे. ग्रुप का नाम है डीएसयू. कित्ते भी चुनाव लड़े हों. न कभी एकौ इलेक्शन जीता है. फेसबुक पर एक सज्जन ने कहा, 'इसको न कोई वोट देता है. न कोई सपोर्ट करता है. जेएनयू के इतिहास में तभी कोई चुनाव नहीं जीता है इस ग्रुप ने.'
भेड़ चाल है दौड़े रहो
खबर लगी कि 'जेएनयू को हाफिज सईद का सपोर्ट. जानने के लिए क्लिक करें.' लोगों ने बात मानी. और पढ़ी पूरी खबर. और खौल गए कि जेएनयू के एंटी इंडिया नारे लगाने वालों का सपोर्ट आतंकी कर रहा है. फर्जी अकाउंट हो सकता है. इसका लोड कोई क्यों ले. जब इस मुल्क में फर्जी एनकाउंटर भी फर्जी निकल जाता है. ट्विटर अकाउंट तो बहुत छोटी सी बात है. हाफिज सईद के सपोर्ट वाली साइट पर खबर के नीचे कुछ लोगों का देशप्रेम जाग गया. और कर दिए कमेंट्स. हम यहां उसका भी स्क्रीनशॉट चेपे दे रहे हैं. ताकि आप समझ लें.

अब इस खबर में लिखे ट्विटर अकाउंट से हुए कुछ टवीट्स पर गौर फरमाइए.
अब जरा लोड डालिए. और सोचिए. इत्ता बड़ा आतंकी इंडिया की इत्ती छोटी छोटी बातों पर ट्वीट करेगा क्या? बिलकुल नहीं. नापाक साजिश नाम की जो चीज होती है. उसको सेट करने में लगता है वक्त. अगर ऐसे आतंकी सोशल मीडिया पर वक्त बिताने लगे, तो अपने अजित डोभाल सर कब का लपक चुके होते इस आतंकी को. थ्रू ट्विटर.
और भी चंपत हैं जमाने में..
ट्विटर पर अकाउंट बनाने में कित्ती देर लगती है. तनिक भर. न पइसा लगता है. न कौनो आधार कार्ड. हां तो ऐसे ही कुछ चंपतों ने हाफिज सईद का ट्विटर पर फर्जी अकाउंट बनाया हुआ है. एक और हैंडल है. नाम है @HafizSaeedLive. इससे भी एंटी इंडिया ट्वीट होते हैं. पर अगेन वही बात. फॉलोअर्स 1982. आंकड़ा देखकर ये न पूछ बैठना, '84 में कहां थे तुम?' अब इस दूजे अकाउंट से हुए ट्वीट पढ़िए.
तो असली अकाउंट तुम ही बताओ लल्लन?
@HafizSaeedJUD
अब दिमाग लगाकर आप इस ट्विटर हैंडल पर जाने की सोच रहे हैं. तो ठहरिए. आगे अंधा 404 ERROR मोड़ है. कुछ नहीं मिलेगा. क्योंकि ट्विटर यूजर्स का तो नहीं पता, लेकिन ट्विटर अमन की आशा प्रेमी है. साल था 2014, हाफिज सईद का @HafizSaeedJUD सस्पेंड कर दिया गया था. कमसे कम पाकिस्तानी न्यूज मीडिया 'द डॉन' तो यही कह रहा है.
किसने लगाए थे बवाली नारे?
जेएनयू का बजरंग दल समझ लीजिए इसे. ग्रुप का नाम है डीएसयू. कित्ते भी चुनाव लड़े हों. न कभी एकौ इलेक्शन जीता है. फेसबुक पर एक सज्जन ने कहा, 'इसको न कोई वोट देता है. न कोई सपोर्ट करता है. जेएनयू के इतिहास में तभी कोई चुनाव नहीं जीता है इस ग्रुप ने.'
भेड़ चाल है दौड़े रहो
खबर लगी कि 'जेएनयू को हाफिज सईद का सपोर्ट. जानने के लिए क्लिक करें.' लोगों ने बात मानी. और पढ़ी पूरी खबर. और खौल गए कि जेएनयू के एंटी इंडिया नारे लगाने वालों का सपोर्ट आतंकी कर रहा है. फर्जी अकाउंट हो सकता है. इसका लोड कोई क्यों ले. जब इस मुल्क में फर्जी एनकाउंटर भी फर्जी निकल जाता है. ट्विटर अकाउंट तो बहुत छोटी सी बात है. हाफिज सईद के सपोर्ट वाली साइट पर खबर के नीचे कुछ लोगों का देशप्रेम जाग गया. और कर दिए कमेंट्स. हम यहां उसका भी स्क्रीनशॉट चेपे दे रहे हैं. ताकि आप समझ लें.
क्योंकि हर खबर करती है असर....


