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ज्ञानवापी मस्जिद: बनारस के डीएम पर फिर से वजूखाने में पानी भरवाने का आरोप लगा!

Varanasi डीएम ने कहा - "न्यायालय के कार्य अपने आप मत करने लगिए"

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16 मई 2022 (अपडेटेड: 17 मई 2022, 05:10 PM IST)
Gyanvapi Mosque Varanasi
(ज्ञानवापी मस्जिद की फाइल फोटो)
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ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे (Gyanvapi Mosque Survey) अलग-अलग दावों को लेकर सुर्खियों में है. एक दावा ये है कि इस सर्वे के दौरान कथित रूप से एक वजूखाने में एक आकृति मिली है, जिसे एक पक्ष अब शिवलिंग कह रहा है. ये जानकारी मिलते ही वाराणसी की जिला अदालत ने उस जगह को तत्काल प्रभाव से सील करने का आदेश दिया है.

वहीं दूसरा दावा ये है कि सर्वे के दौरान जिस वजूखाने को खाली किया गया था, उसे फिर भर दिया गया है. कहा जा रहा है कि ये तालाब वजू के लिए बनाया गया था. अब इसमें कथित तौर पर फिर पानी भरे जाने की बात कही गई है. हालांकि वाराणी से डीएम ने इस दावे को महज अफवाह करार दिया है.

मामला क्या है?

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे के आखिरी दिन 16 मई को हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी मस्जिद में मौजूद तालाब रूपी कुएं में शिवलिंग मिला है. सर्वे के दौरान पता चला कि मस्जिद के ऊपरी हिस्से में, जहां नमाज पढ़ी जाती है, वहां पास ही में वजू करने के लिए एक छोटा सा तालब बनाया गया है. इसी तालब में शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है. इसी बीच ट्विटर पर हिंदू पक्ष के एक वकील प्रशांत उमराव ने ये दावा किया,

"कोर्ट के आदेश के बावजूद वाराणसी के डीएम ने वजू वाले तालाब में दोबारा पानी भरवा दिया है और नमाजियों के वजू का गंदा पानी विश्वेश्वर शिवलिंग पर जा रहा है. ये अस्वीकार्य है." 

प्रशांत ने इस ट्वीट में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भी टैग किया है. लेकिन वाराणसी के डीएम कौशल राज शर्मा ने प्रशांत उमराव के दावे का खंडन किया. उन्होंने ट्वीट कर इसे अफवाह बताया. लिखा,

"कृपया गलत जानकारी ना फैलाएं और न्यायालय के कार्य अपने आप मत करने लगिए. न्यायालय हैं देश में व्यवस्थाएं तय करने के लिए. न्यालालय ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया. तालाब का पानी कभी भी पूरा नहीं निकाला गया, उसका केवल लेवल कम किया गया था." 

हिंदू पक्ष के वकील के आरोप के उलट डीएम का दावा है कि सर्वे की टीम ने वजू वाले तालाब का पूरा पानी नहीं निकाला, बल्कि सिर्फ थोड़ा पानी निकालकर उस जगह की जांच की गई थी.

बहरहाल, इस सर्वे की रिपोर्ट कल यानी 17 मई को अदालत में पेश की जाएगी. तब पता चल जाएगा कि सर्वे में क्या मिला क्या नहीं मिला, वजूखाना कितना खाली किया गया और उसमें कितना पानी बचा है.


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