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ज्ञानवापी मस्जिद में फव्वारा या शिवलिंग, पता कराने इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया

अब होगा सर्वे.

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Gyanvapi Masjid Survey
ज्ञानवापी मस्जिद में मिला विवादित ढांचा (फोटो- इंडिया टुडे/पीटीआई)
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साकेत आनंद
12 मई 2023 (Updated: 12 मई 2023, 07:42 PM IST)
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) में मिली विवादित आकृति के साइंटिफिक सर्वे कराने का आदेश दिया है. यह आदेश आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) को दिया गया है. मस्जिद में मिले इस ढांचे को मुस्लिम पक्ष ने ‘’फव्वारा'' कहा, तो हिंदू पक्ष ने "शिवलिंग.'' और तब हुआ विवाद. अब हाई कोर्ट ने आदेश में कहा है कि इस ढांचे को बिना नुकसान पहुंचाए सर्वे करना होगा. इसके जरिये पता लगाना होगा कि यह ढांचा कितना पुराना है, क्या ये वाकई शिवलिंग है या कुछ और.

पिछले साल 14 अक्टूबर को वाराणसी कोर्ट ने इस ढांचे की कार्बन डेटिंग कराने की मांग को खारिज कर दिया था. मां श्रंगार गौरी की पूजा की अनुमति मांगने वाली पांच महिलाओं में से चार ने जिला अदालत से ये मांग की थी. निचली अदालत से मांग खारिज होने के बाद इन महिलाओं ने हाई कोर्ट का रुख किया था. इन महिलाओं की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील विष्णुशंकर जैन ने मीडिया को बताया कि हाई कोर्ट ने पहले ASI से रिपोर्ट मांगी थी. पूछा गया था कि ऐसे कौन से तरीके हैं जिससे उस आकृति का नुकसान किए बगैर उसकी प्रकृति का पता लगाया जा सकता है.

जैन ने आगे कहा, 

"ASI ने हाई कोर्ट के सामने 52 पन्नों की रिपोर्ट फाइल की थी. रिपोर्ट में ASI ने उन सभी वैज्ञानिक तरीकों के बारे में कोर्ट को बताया है, जिससे शिवलिंग की प्रकृति का पता लगा सकते हैं. हाई कोर्ट ने इसी आधार पर निचली अदालत का फैसला पलट दिया. कोर्ट ने ASI के वकील को निर्देश दिया है कि वे 22 मई को निचली अदालत में पेश होकर उन्हें इसकी जानकारी दें."

विष्णुशंकर जैन ने बताया कि यह साइंटिफिक सर्वे कोर्ट की निगरानी में ही होगा. जैन के मुताबिक, इसमें IIT रुड़की और दूसरे संस्थान ने भी कहा था कि इसे नुकसान पहुंचाए बिना साइंटिफिक स्टडी की जा सकती है.

मुस्लिम पक्ष बता रहा ‘फव्वारा’

जिस आकृति को हिंदू पक्ष 'शिवलिंग' बता रहा है, उसे मुस्लिम पक्ष के लोगों ने 'फव्वारा' होने का दावा किया. हाई कोर्ट ने पिछले साल 5 नवंबर को ASI को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगा था.

हिंदू पक्ष ने इस ढांचे के साइंटिफिक टेस्ट कराने की मांग की थी, जिनमें कार्बन डेटिंग को भी शामिल करने को कहा गया था. हालांकि अभी इसमें साफ नहीं है कि हाई कोर्ट ने आदेश में कार्बन डेटिंग की अनुमति दी है या नहीं.

कार्बन डेटिंग होता क्या है?

कार्बन डेटिंग एक ऐसा तरीका है जो कार्बन-बेस्ड चीजों यानी कार्बनिक पदार्थों की अनुमानित उम्र के बारे में बताती है. कार्बन डेटिंग से लकड़ी, मिट्टी की चीजें, कई तरह की चट्टानों वगैरह की उम्र का अंदाजा लगाया जाता है. कार्बन डेटिंग का तरीका इस तथ्य पर आधारित है कि सभी जीवों और जीवों के अंश से बनी चीजों में कार्बन होता है. इसी कार्बन के आधार पर उस चीज की उम्र कैलकुलेट की जाती है.

वीडियो: कार्बन डेटिंग से ज्ञानवापी मामले में क्या राज खुलेगा?

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