जब मैं इंदौर में पढ़ता था, अपनी बहन के साथ रहता था. उस से तंग आकर मैं जब-तब अपनेदोस्तों के कमरे पर जाता था. 'आओ सनम - जाओ सनम' कमरा. कोई रोक-टोक नहीं, बिलकुलबिंदास. मकान मालिक भी कमरे जैसा. उसकी बाइक पूरी तरह खतम हो चुकी थी. इतनी कि सड़कपर लेकर निकलते ही 57 नियम टूट जाएं. लेकिन सड़क पर कोई पुलिस वाला उसे हाथ नहींदेता था. वो कहता था कि ऐसा इसलिए है क्योंकि उसकी बाइक का नंबर MP- 07 से शुरूहोता है. माने ग्वालियर पासिंग. ग्वालियर वालों से कोई नहीं उलझता.ग्वालियर वालों से उलझो, उनको ज्ञान दो, तो वो पसंद नहीं करते. बदले में कुछ भी करसकते हैं. कुछ भी.ग्वालियर ज़िले में जब सरकारी कर्मचारी और वॉलेंटियर लोगों से घरों में संडास(अच्छा, शौचालय कह लीजिए) बनवाने की अपील करने गए, तो लोगों ने आव देखा, ना ताव, उनपर बंदूक तान दी. लाइसेंसी बंदूक.व्हेन सम वन आस्क्स मी टू बिल्ड अ टॉयलेटअब जान से ऊपर न संडास है, न नौकरी. तो कर्मचारी बेचारे वापस आ गए. गली से बाहरनुक्कड़ पर रुक कर कहीं से मांग कर पानी पिया. फिर बगल में दबी डायरी में मकान नंबरलिख लिया. ऐसे लगभग 80 मकान मालिकों की एक लिस्ट तैयार हो गई है, जिन्होंनेलाइसेंसी हथियारों का ताव सरकारी कर्मचारियों को दिखाया. इन सबको सरकारीकर्मचारियों को धमकाने का नोटिस थमा दिया गया है. ग्वालियर ज़िला पंचायत के CEOबताते हैं कि ऐसा यहां आम है. नोटिस मिलता है तो लोग माफ़ी मांगने भी आ जाते हैं औरसंडास बनवाने का वादा कर के जाते हैं. इसलिए आमतौर पर FIR वगैरह के चक्कर में नहींपड़ा जाता. लेकिन इस बार 30 लोगों के बारे में प्रशासन सीरियस है. ये भी हो सकता किइनके लाइसेंस वापस ले लिए जाएं.मैं सोच रहा हूं कि ये 30 लोग अपने पड़ोसियों को क्या बताएंगे? संडास भी बंदूक खोनेलायक बहाना हुआ भला? लेकिन फिर याद आता है, ग्वालियर वाले कुछ भी कर सकते हैं. कुछभी.