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राम रहीम फिर जेल से बाहर आया, हरियाणा विधानसभा चुनाव भी होने ही वाले हैं

Rohtak News: Haryana के सिरसा स्थित अपने आश्रम में दो महिला अनुयायियों के साथ रेप के मामले में Gurmeet Ram Rahim 20 साल की जेल की सज़ा काट रहा है.

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13 अगस्त 2024 (अपडेटेड: 14 अगस्त 2024, 04:33 PM IST)
Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim Singh was once again released from prison
राम रहीम को फिर फरलो. (फ़ोटो - आजतक)
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बरसात का मौसम चल रहा है. इस बीच, भारी बारिश के चलते कई राज्यों की अव्यवस्थाएं सामने आईं. ख़ासकर बिहार में पुलों के गिरने की ख़बरें चर्चा में रहीं. ख़बरें ये भी हैं कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर जेल से रिहा कर दिया गया है (Gurmeet Ram Rahim Singh furlough). इस बार 21 दिन की छुट्टी पर. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, ये 8वीं बार है, जब वो बाहर आ रहा है.

13 अगस्त की सुबह 6.30 बजे रोहतक की सुनारिया जेल से बलात्कारी राम रहीम को रिहा कर दिया गया. अब वो उत्तर प्रदेश के बागपत में अपने डेरे पर रहेगा. अक्तूबर, 2024 में होने वाले हरियाणा विधान सभा चुनाव से पहले, इस रिहाई की ख़बर आई है. हरियाणा के सिरसा स्थित अपने आश्रम में दो महिला अनुयायियों के साथ रेप के मामले में राम रहीम 20 साल की जेल की सज़ा काट रहा है. वो हरियाणा के रोहतक ज़िले की सुनारिया जेल में बंद है. उसे 2017 में सज़ा सुनाई गई थी.

इससे पहले डेरा प्रमुख को बार-बार परोल और फरलो दिए जाने को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी. साथ ही, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने एक याचिका दायर की थी. कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले में सक्षम अफ़सर बिना किसी 'मनमानी या पक्षपात' के विचार करे. इससे पहले 29 फरवरी को हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि उसकी मंजूरी के बिना डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को आगे परोल ना दिया जाए.

ये भी पढ़ें - राम रहीम समेत 5 लोग बरी हो गए, हाई कोर्ट ने CBI कोर्ट के फ़ैसले को क्यों पलट दिया?

फरलो और परोल में अंतर

फरलो एक तरह की छुट्टी होती है. इसमें क़ैदी कुछ दिनों के लिए रिहा किया जाता है. सिर्फ़ सज़ा पा चुके क़ैदी को ही फरलो मिलता है. ख़ासकर उन्हें, जिन्हें लंबे वक़्त के लिए सज़ा मिली होती है. इसका मकसद होता है- क़ैदी अपने परिवार और समाज के लोगों से मिल सके. क्योंकि जेल राज्य का विषय है, इसलिए हर राज्य में इसे लेकर अलग-अलग तरह के नियम होते हैं. मसलन यूपी में फरलो देने का प्रावधान नहीं है.

वहीं परोल पर किसी भी क़ैदी को थोड़े दिन के लिए रिहा किया जा सकता है. फरलो देने के लिए किसी विशेष कारण की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन इसमें होती है. परोल तभी मिलती है, जब क़ैदी के परिवार में किसी की मौत हो जाए या ब्लड रिलेशन वाले किसी सदस्य की शादी या कुछ और ज़रूरी कारण हों. परोल देने से इनकार भी किया जा सकता है. अधिकारी समाज के हित में ना होने का हवाला देते हुए, पराल देने से मना कर सकते हैं.

बात बिहार में पुल गिरने की आई, तो उसका हाल भी जान ही लेते हैं. 5 जुलाई को ख़बर आई कि 17 दिनों में बिहार में कम से कम 12 पुल ढह गए. सीवान, सारण, मधुबनी, अररिया, पूर्वी चंपारण और किशनगंज से पुल गिरने की घटनाएं सामने आईं.

वीडियो: राम रहीम को बार-बार परोल! हाई कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, क्या आदेश दिया?

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