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गुलबर्ग सोसाइटी केस: 24 दंगाइयों में से 11 को उम्रकैद

जानें गुलबर्ग का पूरा मामला, जहां 2002 गुजरात दंगों के दौरान 69 लोगों को जिंदा जला दिया गया था.

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गुलबर्ग सोसाइटी में दिवंगत कांग्रेस नेता एहसान जाफरी का घर. Photo: Reuters
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कुलदीप
17 जून 2016 (Updated: 17 जून 2016, 08:44 AM IST)
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गुजरात दंगों से जुड़े गुलबर्ग सोसाइटी केस में सजा का ऐलान हो गया है.  अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट 24 दोषियों को सजा सुनाई है. इनमें से 11 को उम्रकैद, 12 को 7 साल कैद और एक दोषी को 10 साल कैद की सजा सुनाई है. सजा सुनाते हुए जज ने कहा कि लाइफटाइम सजा के लिए राज्य के माफी देने के हक को चैलेंज नहीं करना चाहता. लेकिन मेरा 'स्ट्रॉन्ग रेकमेंडेशन' है कि उम्रकैद के सभी 11 दोषी मौत तक जेल में रहें. इन दंगों में मारे गए पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी फैसले से खुश नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'मैं संतुष्ट नहीं हूं. मैं खुश नहीं हूं. मैं अपने वकीलों से बात करूंगी. ये इंसाफ नहीं है. इतने लोगों के मरने के बाद कोर्ट का ये फैसला है? सिर्फ 12 लोग दोषी हैं? मैं इसके लिए लड़ती रहूंगी. मेरे लिए केस अभी खत्म नहीं हुआ है. हम वहीं हैं, जहां से शुरू किया था.' 2 जून को स्पेशल कोर्ट ने मामले में 24 लोगों को दोषी पाया गया था. 11 लोग हत्या के और 13 आगजनी के दोषी पाए गए. इन 13 आरोपियों में विश्व हिंदू परिषद के नेता अतुल बैद्य भी गुनहगार पाए गए थे. पुलिस ने इसके अलावा जिन 36 और लोगों को आरोपी बनाया था. कोर्ट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया. इनमें बीजेपी के मौजूदा कॉरपोरेटर बिपिन पटेल भी थे. कोर्ट से बाहर आने के बाद कुछ आरोपियों ने 'भारत माता की जय' और 'जय श्री राम' के नारे लगाए थे.

दोषियों के नाम

1. कैलाश लालचंद धोबी2. योगेंद्र सिंह उर्फ लालू मोहनसिंह शेखावत3. जयेश कुमार उर्फ गब्बर मदनलाल जिगर4. कृष्ण कुमार उर्फ कृष्णा मुन्ना लाल5. जयेश रामजी परमार6. राजू उर्फ मामो कानीयो7. नारण सीताराम टांक8. लाखणसिंह उर्फ लाखीयो9. भरत उर्फ भरत तैली बालोदीया10. भरत लक्ष्मणसिंह गोडा11. दिलीप प्रभुदाश शर्मा12. बाबुभाइ मनजीभाइ पटणी13. मांगीलाल धूपचंद जैन14. दिलीप उर्फ काणू चतुरभाई15. संदीप उर्फ सोनू16. मुकेश पुखराज सांखला17. अंबेस कांतिलाल जीगर18. प्रकाश उर्फ कली खेंगारजी पढियार19. मनीष प्रभुलाल जैन20. धर्मेश प्रहलाद भाई शुक्ल21. कपिल देवनारायण उर्फ मुन्नाभाई मिश्रा 22. अतुल इंद्रवधन वैध 23. बाबूभाई हस्तीमल राठौड़ 24. सुरेंद्र सिंह उर्फ वकील दिग्विजय सिंह चौहानजानें गुलबर्ग का पूरा मामला, जहां पूर्व सांसद समेत 69 लोगों को जिंदा जला दिया गया था. 14 साल पहले गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगी. 58 लोगों की मौत हो गई. ट्रेन के उस डिब्बे में अयोध्या से लौट रहे कई कारसेवक थे. उसके बाद प्रदेश में कई जगहों पर मुस्लिम विरोधी दंगे भड़के उठे थे. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इसमें 1044 लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन कई सूत्र 2 हजार से ज्यादा मौतों का दावा करते हैं. जिन जगहों पर दंगों का सबसे वीभत्स रूप दिखा, उनमें से एक थी नॉर्थ अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी. गुलबर्ग सोसाइटी केस में गुरुवार को फैसला आया है. जानिए इस केस में किस दिन, क्या हुआ था.

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गोधराकांड के एक दिन बाद. तारीख, 28 फरवरी, 2002. अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी को 20 हजार से ज्यादा लोगों ने घेर लिया. 29 बंगलों और 10 फ्लैट की इस सोसाइटी में एक पारसी और बाकी मुस्लिम परिवार रहते थे. कांग्रेस सांसद रह चुके सांसद एहसान जाफरी भी यहीं रहते थे.

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हिंसक भीड़ ने सोसाइटी पर हमला किया. घरों से निकाल-निकाल के लोगों को मार डाला. ज्यादातर लोगों को घरों में आग लगाकर जिंदा जला दिया. 39 लाशें बरामद हुईं और बाकी को गुमशुदा बताया गया. लेकिन सात साल बाद तक उनकी कोई खबर नहीं मिली, तो उन्हें भी मरा हुआ मान लिया गया. अब मौत का आंकड़ा 69 है. मरने वालों में एहसान जाफरी भी थे.

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8 जून, 2006 को एहसान जाफरी की बेवा जाकिया जाफरी ने पुलिस को फरियाद दी, जिसमें उन्होंने इस हत्याकांड के लिए उस वक्त के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, कई मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार बताया. पुलिस ने ये फरियाद लेने से मना कर दिया.

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7 नवंबर 2007 को गुजरात हाईकोर्ट ने भी इस फरियाद को FIR मानकर जांच करवाने से मना कर दिया.

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26 मार्च 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के 10 बड़े केसों की जांच के लिए आरके राघवन की अध्यक्षता में एक SIT बनाई. इनमें गुलबर्ग का मामला भी था.

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मार्च 2009 में ज़किया की फरियाद की जांच का जिम्मा भी सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को सौंपा.

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सितंबर 2009 को ट्रायल कोर्ट में गुलबर्ग हत्याकांड की सुनवाई शुरू हुई.

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27 मार्च 2010 को जकिया की फरियाद के संबंध में SIT ने नरेंद्र मोदी को समन किया. कई घंटे तक यह पूछताछ चली.

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14 मई 2010 को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दी.

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जुलाई 2011 में एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने इस रिपोर्ट पर अपना नोट सुप्रीम के सामने रख दिया.

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11 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर फैसला ट्रायल कोर्ट पर छोड दिया.

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8 फरवरी 2012 को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश की.

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10 अप्रैल 2012 को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने SIT की रिपोर्ट के आधार पर माना कि मोदी और दूसरे 62 लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं.

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इस केस में 66 आरोपी हैं. जिसमें प्रमुख आरोपी बीजेपी के असारवा के काउंसलर बिपिन पटेल भी हैं.

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मामले के 4 आरोपियों की ट्रायल के दौरान ही मौत हो चुकी है.

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आरोपियों में से 9 अब भी जेल में हैं जबकि बाकी आरोपी ज़मानत पर बाहर हैं.

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केस में 338 से ज्यादा गवाहों की गवाही हुई है. सितंबर 2015 में केस का ट्रायल खत्म हो गया. 8 महीने पहले फैसला सुरक्षित रख लिया गया.

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2 जून 2016 को फैसला सुनाया गया. 66 में से 24 लोग दोषी पाए गए और 36 को बरी कर दिया गया.

क्या हुआ था उस दिन, देखें राकेश शर्मा की डॉक्युमेंट्री 'फाइनल सॉल्यूशन' का एक हिस्सा

https://www.youtube.com/watch?v=vojYsnV9XUo ये भी पढ़ें:गुलबर्ग सोसाइटी का न्यायः 11 दंगाइयों ने 69 लोगों को मारा!

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