हजारों दलितों ने ऊना में ली शपथ, कभी गटर में नहीं उतरेंगे
ऊना से उठा सवाल, दलितों के कत्ल पर क्यों चुप थे मुख्यमंत्री मोदी?
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फोटो - thelallantop
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15 अगस्त 2016. ये तारीख गुजरात के नाम भी की जा सकती है. वजह दो हैं. एक गुजरात के छोरे और अब इंडिया के पीएम नरेंद्र मोदी का लालकिले से पाकिस्तान की दुखती रग बलूचिस्तान पर हाथ रखना. दूजे वो हजारों दलित, जो गुजरात के ऊना में सोमवार को इकट्ठा हुए और सत्ता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक साथ शपथ ली,
ये शपथ ऊना में हजारों दलितों ने ली. 5 अगस्त से अहमदाबाद से शुरू हुई दलित अस्मिता यात्रा सोमवार को ऊना में पूरी हो गई. इस यात्रा की अगुवाई कर रहे थे जिग्नेश मेवानी. पेशे से वकील और सोशल वर्कर. गुजरात में 11 जुलाई को जब मरी हुई गायों की खाल निकालने वाले दलित मजदूरों को मारा गया था, उसके बाद से सत्ता के मैल जमे कानों में आवाज पहुंचाने का बीड़ा जिन चंद लोगों के जिम्मे था, उनमें जिग्नेश मेवानी सबसे आगे नजर आए.
जिग्नेश ने कहा,
ऊना में जब सोमवार को ये रैली हो रही थी, तब रोहित वेमुला की मां भी पहुंची. बोलीं, 'दलित के बच्चे कब तक अपनी जान खोते रहेंगे. मैंने अपने बेटे को खोया है. नहीं चाहती कि कोई और मां अपना बच्चा खोए.' JNU वाले कन्हैया कुमार भी रैली में पहुंचे थे. बता दें कि ये शायद पहली बार है, जब इतनी बड़ी तादाद में गुजरात में दलित इकट्ठा हुए हैं.
वहां की रैली का एक वीडियो ये देखिए..
https://twitter.com/treatednickel/status/765055608949182464
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'हम गुजरात के दलित समुदाय के लोग आज ऊना की धरती से, डॉक्टर अंबेडकर के नाम से ये शपथ लेते हैं कि आज के बाद जीवन में कभी गटर में उतरेंगे नहीं. मैला उठाएंगे नहीं. और मरे हुए पशु की खाल निकालकर काम करेंगे भी नहीं. और उसकी बजाय सरकार के सामने ये मांग रखेंगे कि पूरे गुजरात के हरेक दलित परिवार को 5-5 एकड़ जमीन का आवंटन हो. जय जय जय जय जय भीम. जय भीम. जय भीम.'
ये शपथ ऊना में हजारों दलितों ने ली. 5 अगस्त से अहमदाबाद से शुरू हुई दलित अस्मिता यात्रा सोमवार को ऊना में पूरी हो गई. इस यात्रा की अगुवाई कर रहे थे जिग्नेश मेवानी. पेशे से वकील और सोशल वर्कर. गुजरात में 11 जुलाई को जब मरी हुई गायों की खाल निकालने वाले दलित मजदूरों को मारा गया था, उसके बाद से सत्ता के मैल जमे कानों में आवाज पहुंचाने का बीड़ा जिन चंद लोगों के जिम्मे था, उनमें जिग्नेश मेवानी सबसे आगे नजर आए.
जिग्नेश ने कहा,
'दलित अब ये काम छोड़ना चाहते हैं. दलितों को कानून के मुताबिक, पांच एकड़ जमीन चाहिए ताकि दलित खेती कर इज्जत से रोजी रोटी कमा पाएं. अगर सरकार दलितों को उनका हक नहीं दिला सकती, तो पूरा देश सड़कों पर उतरेगा. रेल रोको अभियान भी करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दलितों पर अब तक चुप क्यों थे. जब मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए थानगण के तीन दलितों को गोली मार दी गई थी, तब उनने ये क्यों नहीं कहा कि दलितों को नहीं, मुझे मारो. अब जब गुजरात की वजह से उनपर दबाव बढ़ रहा है, तो मोदी बात कर रहे हैं. '
ऊना में जब सोमवार को ये रैली हो रही थी, तब रोहित वेमुला की मां भी पहुंची. बोलीं, 'दलित के बच्चे कब तक अपनी जान खोते रहेंगे. मैंने अपने बेटे को खोया है. नहीं चाहती कि कोई और मां अपना बच्चा खोए.' JNU वाले कन्हैया कुमार भी रैली में पहुंचे थे. बता दें कि ये शायद पहली बार है, जब इतनी बड़ी तादाद में गुजरात में दलित इकट्ठा हुए हैं.
वहां की रैली का एक वीडियो ये देखिए..
https://twitter.com/treatednickel/status/765055608949182464
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