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दलितों ने नहीं, शेर ने मारी थी गाय, गोरक्षकों जाओ बदला लो!

CID ने कही है ये बात. पीड़ित दलितों ने कहा- अब चमड़ा नहीं खींचेंगे. पर घर कैसे चलाएं?

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27 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 26 जुलाई 2016, 05:02 AM IST)
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गुजरात के ऊना वाले बेवकूफ 'गोरक्षकों' के गधेपन का सबूत मिल गया है. साथ ही मौका आ गया है कि ये कथित गोरक्षक शेर से गोहत्या का बदला लेने के लिए कूच करें. क्योंकि केस की जांच में जुटी गुजरात सीआईडी की रिपोर्ट आ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक,

'ऊना में जिस मरी हुई गाय की खाल दलित निकाल रहे थे. उस गाय को शेर ने मारा था. न कि गाय की खाल निकालने वाले दलितों ने.'

बता दें कि 11 जुलाई को ऊना में 'गोरक्षकों' ने चार दलितों को SUV कार से बांधकर खूब मारा था. वीडियो बनाया. सोशल मीडिया पर इस मैसेज के साथ सर्कुलेट किया कि गाय की हत्या करने वालों का यही अंजाम होगा. अब उनका ये मैसेज शेर के लिए भी लागू होगा. ऐसी सो कॉल्ड गोरक्षकों से हमें उम्मीद है. जरा देखें तो शेर को बांधने और फिर मारने की हिम्मत किस गोरक्षक में है. lion द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सीआईडी अधिकारियों इस बात की जांच कर रहे हैं कि गोरक्षकों को गाय की खाल खींचने वाले दलितों के बारे में किसने इंफॉर्म किया था. ऊना पुलिस स्टेशन रिकॉर्ड्स की मानें तो अहमदाबाद के स्टेट कंट्रोल रूम में नारनभाई ने कथित गोहत्या के बारे में 11 जुलाई दोपहर, डेढ़ बजे फोन कर बताया था. लेकिन दर्ज एफआईआर के मुताबिक, गोरक्षकों ने सुबह 10 बजे दलितों पर अटैक किया था. गाय की खाल खींचने वाले वासाराम सरवेया के पापा बालु सरवेया ने कहा,
'हमें सुबह 8 बजे फोन आया कि बेधिया गांव के पास एक शेर ने गाय को मार दिया है. गाय की खाल खींचने वालों की जरूरत है. मैंने तब अपने बेटे वासाराम, रमेश, एक रिलेटिव बेचारभाई और अशोक को भेज दिया. तभी वहां से एक सफेद कार निकली. वो कार थोड़ी देर बाद लौटी. साथ में 30-35 बंदे मोटरसाइकिल पर आए. इसके बाद इन्होंने वहां गाय की खाल खीच रहे लोगों के साथ मारपीट की.'
देखें ऊना में दलितों की पिटाई का वीडियो https://www.youtube.com/watch?v=F7IigiTFUGI गोरक्षकों की रिमांड की डिमांड 20 जुलाई से सीआईडी ने केस अपने हाथ में ले लिया है. पहले इस केस की जांच गिर सोमनाथ पुलिस कर रही थी. सीआईडी ने सोमवार को इन गोरक्षकों को रिमांड में लेने की डिमांड की है. केस की जांच कर रहे सीआईडी क्राइम के डीएसपी केशवजी सारादवा ने कहा, 'चश्मदीदों के बयान के मुताबिक, गाय शेर के हमले से मरी थी. हम ड्यूटी पर तैनात पुलिसवालों और आरोपियों की जांच कर रहे हैं. पुलिस कंट्रोल रूम से मिले इनपुट के आधार पर भी हम काम कर रहे हैं.' 'अब नहीं खींचनी खाल, सरकार नौकरी दो' ऊना में जिन दलितों कि पिटाई की गई थी. वो बुरी तरह से घायल हो गए थे. सोमवार को घायलों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. चारों पीड़ितों ने अस्पताल से निकलने के बाद कहा, 'हम अब गाय का चमड़ा निकालने का काम नहीं करेंगे. गांव जाकर धंधा क्या करें. घर कैसे चलेगा, ये नहीं मालूम. हमारी सरकार से मांग है कि हमें कहीं सरकारी नौकरी दे दें.' सुसाइड की हुई थीं कोशिशें 11 जुलाई की इस घटना के बाद गुजरात के ज्यादातर हिस्सों में प्रदर्शन हुए. 7 से ज्यादा दलित युवकों ने खुलेआम आत्महत्या की कोशिशें की. जिला कलेक्टर के दफ्तर में मरे हुए जानवरों से भरे ट्रक ले जाकर खड़े किए गए. रोड जाम किए गए. संसद में मायावती ने मामला उठाया. गुजरात की सीएम आनंदीबेन पटेल ने पीड़ितों को एक-एक लाख रुपये देने का ऐलान किया था. गुजरात में दलित औरतों की हालत सबसे खराब अहमदाबाद का एक ट्रस्ट है नवसृजन. इस ट्रस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जातीय हिंसा के मामले में दलित औरतों की हालत सबसे खराब है. 2006-2015 के बीच हर साल 45 रेप की घटनाएं और 20 दलितों का मर्डर किया जाता है. साढ़े चार हजार से SC/ST पर अत्याचार के मामले पेंडिंग हैं.
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