जब से नोटों वाला पूरा मैटर हुआ है, यानी 8 नवंबर से, लोग खूब परेशान हैं. शुर-शुरूमें तो जमा किए खुल्लों से काम चल गया. फिर लोगों में मारपीट हुई. और अब हाल कुछयूं है कि: पहले आती थी हाल-ए-जेब पे हंसी अब किसी बात पर नहीं आती (ग़ालिब से माफ़ीके साथ) और जब हम लोग हाल-ए-जेब पर हंस रहे थे, कुछ चुटकुले whatsapp पर खूब चले.और चली मोदी की मिट्टी गुजरात के एक अखबार की कटिंग. जिसमें तारीख थी अप्रैल 2016की. और खबर में लिखा था, 'सरकार ने किए 500 और 1000 के नोट बंद'. अंदर लिखा था किये फैसला सरकार ने ब्लैक मनी होर्डिंग (यानी काले धन की बचत) को रोकने के लिए कियागया है. अखबार ने फैसले को ऐतिहासिक बताया था. इस कटिंग के वायरल होने से लोगभौंचक्क होकर रह गए थे. कि ये अखबार तो भविष्यवाणी करता है. whatsapp पर कई चक्करलगाने के बाद फाइनली 'द टेलीग्राफ' अख़बार ने इस लोकल गुजराती अखबार से बात की.अख़बार का नाम है 'अकीला' और इसके एडिटर हैं किरीट गन्तारा. किरीट ने द टेलीग्राफ कोबताया कि ये खबर उन्होंने 1 अप्रैल को लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए लगाई थी. और येएक बहुत बड़ा संयोग है कि 7 महीने बाद पूरी की पूरी खबर सच हो गई है.तो whatsapp वालों, इस खबर को असली मानकर अखबार की पूजा न करने लगना.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ लो:अब भी जिसका रंग न छूटे, नोट वही तो जाली हैनोटबंदी से लौटा बार्टर सिस्टम, 3 किलो गोभी दो, 1 किलो मछली लोप्याज खरीद कर 2000 के नोट की फोटोकॉपी ही थमा गयाक्या लोग नेपाल में खपा रहे हैं हजारों करोड़ का काला धन और नकली नोट?कौन सा ATM पैसा उगल रहा है, पता करने का सिंपल तरीकाये मशीन देखो, 500-1000 के नोट खुल्ले कर रही है!2000 के नोट पर अब गांधी की जगह आपकी फोटो!ATM की लाइन में लगने से पहले यहां जान लो, पैसे मिलेंगे या नहींसलाम ATM में पैसे भरने वालों को करो, जो कई रातों से सोए नहीं