US के लिए डंकी रूट से निकले, रास्ते में अगवा, किडनैपर्स ने फैमिली को दिखाया लाइव टॉर्चर
Gujarat Youths Kidnapped in Azerbaijan: गुजरात के रहने वाले ध्रुव पटेल और दीपिका पटेल ने अमेरिका जाने के लिए एक एजेंट से कॉन्टैक्ट किया था. एजेंट ने उन्हें डंकी रूट से अमेरिका पहुंचाने का वादा किया. लेकिन दोनों अजरबैजान की राजधानी में किडनैप कर लिए गए.
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अमेरिका बसने का सपना गुजरात के दो युवाओं के लिए एक कभी न भुलाने वाला कड़वा अनुभव बन गया. अवैध 'डंकी रूट' से अमेरिका पहुंचने की कोशिश में वे अजरबैजान की राजधानी में किडनैप हो गए. वहां उन्हें बुरी तरह टॉर्चर किया गया और अंग बेचने की धमकी दी गई. परिवार की सूचना पर भारतीय अधिकारियों ने उन्हें बचा लिया. इसके बाद उनकी कहानी सामने आई है.
सीएसआर जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों के नाम ध्रुव पटेल (22) और दीपिका पटेल (32) हैं. दोनों गुजरात के आणंद जिले के कंथारिया के रहने वाले हैं. अमेरिका जाने के लिए उन्होंने मुंबई के एक एजेंट से कॉन्टैक्ट किया था. एजेंट ने उन्हें अवैध डंकी रूट से अमेरिका पहुंचाने का वादा किया. डंकी रूट यानी इलिगल माइग्रेशन रास्ता. इस सफर में लोगों को कई देशों और जंगलों से गुजरना पड़ता है. इसमें जान का भी जोखिम रहता है.
ध्रुव ने डंकी रूट के लिए एजेंट को 35 लाख रुपये और दीपिका ने 15 लाख रुपये दिए. 30 जनवरी को उनकी जर्नी शुरू हुई. आणंद से वड़ोदरा और फिर दिल्ली होते हुए वे 1 फरवरी को अजरबैजान की राजधानी बाकू पहुंचे. ये देश ईस्ट यूरोप और वेस्ट एशिया के बॉर्डर पर है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बाकू में लैंड करने के बाद एजेंट पवन ने उनके फोन बंद करवाए और आगे बढ़ने से पहले और पैसों की डिमांड की. पवन ने ध्रुव और दीपिका को मुंबई में ओरिजिनल एजेंट को बाकी की पेमेंट करने से भी मना किया. दोनों ने बात मानने से इनकार किया, तो अगली सुबह उन्हें किडनैप कर एक सुनसान घर के बेसमेंट में बंद कर दिया गया. वहां ध्रुव के साथ बुरी तरह मारपीट की गई.
परिवार का आरोप है कि किडनैपर्स ने उन्हें WhatsApp वीडियो कॉल कर उनके सामने ध्रुव को टॉर्चर किया. फिरौती न देने पर अंग निकालकर बेचने की धमकी की. जिसके बाद परिवार ने 65 लाख रुपये का इंतजाम किया. इसमें से कुछ पेमेंट क्रिप्टोकरेंसी के जरिए दी गई. लेकिन इसके बाद भी और पैसे की मांग की गई.
आखिरकार दोनों के परिवारों ने आणंद के सांसद मितेश रमेशभाई पटेल से संपर्क किया. मामला विदेश मंत्री एस जयशंकर तक पहुंचा. फिर बाकू में भारतीय दूतावास को अलर्ट किया गया. ध्रुव और दीपिका को बचाने के लिए 'ऑपरेशन महिसागर' चलाया गया और 24 घंटे के अंदर दोनों को सुरक्षित किडनैपर्स के चंगुल से छुड़ा लिया गया. फिलहाल, दोनों भारतीय दूतावास की सुरक्षा में हैं और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत आएंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि किडनैपर्स कथित तौर पर पवन रॉकी और 'बाबा खान' नाम के एक ईरानी नागरिक से जुड़े गैंग का हिस्सा हो सकते हैं. दूसरी तरफ गुजरात पुलिस ने पीड़ितों को फंसाने वाले मुंबई के पांच एजेंटों की तलाश शुरू कर दी है.
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