10 लाख लोगों ने सरकारी नौकरी का फॉर्म भरा, एक हफ्ते पहले कैंसल करके क्वॉलिफिकेशन बढ़ा दी
परीक्षा बोर्ड कह रहा है गुजरात सरकार ने बदला फैसला, सरकार कह रही, हमें तो पता ही नहीं.
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गुजरात में होने वाली बिन सचिवालय की परीक्षा, परीक्षा की डेट से एक हफ्ते पहले कैंसल कर दी गई.
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20 अक्टूबर, 2019. गुजरात में बिन सचिवालय के लिए 3,738 पदों पर परीक्षा होनी थी. करीब 10 लाख से ज्यादा लोगों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था. तैयारी भी कर रहे थे. कॉल लेटर भी आ गया था. परीक्षा के सेंटर भी डिसाइड हो गए थे. अचानक से 11 अक्टूबर को एक आदेश आया. और आदेश ये था कि अब ये परीक्षा नहीं होगी.

परीक्षा रद्द करने का आदेश.
क्यों रद्द कर दी गई परीक्षा
12 नवंबर, 2018 को गुजरात सरकार के तहत आने वाले गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड ने बिन सचिवालय के लिए 3,738 पदों के लिए वैकेंसी निकाली थी. इंटरमीडिएट पास लोग इस परीक्षा में शामिल हो सकते थे. करीब 10 लाख लोगों ने आवेदन किया था. तैयारी भी करनी शुरू कर दी थी. 20 अक्टूबर, 2019 को परीक्षा की तारीख भी तय कर दी गई थी. 18 महीने की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी के बाद 11 अक्टूबर को इन लाखों परीक्षार्थियों को तब झटका लगा, जब पता लगा कि बोर्ड ने परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है. गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड के डायरेक्टर असीम वोरा ने वजह ये बताई कि सरकार के आदेश के मुताबिक अब इस परीक्षा में इंटरमीडिएट पास लोग नहीं, बल्कि ग्रैजुएशन पास लोग ही अप्लाई कर सकते हैं. इसलिए अब पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जाएगी.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के आदेश का वो लेटर, जो परीक्षा रद्द करने के आदेश के ठीक पहले जारी हुआ था.
बोर्ड ने कहा, सरकार ने नियम बदले, सरकार ने कहा, हमें तो पता ही नहीं
गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड की ओर से जारी आदेश के मुताबिक गुजरात सरकार ने गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड के 2014 के नियमों में बदलाव कर दिया है. सरकार की ओर से 30 सितंबर को इसका नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है. लेकिन सरकार की ओर से कहा गया है कि इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. गुजरात के डिप्टी सीएम नितिन पटेल ने मेहसाणा में एक चुनावी रैली के दौरान कहा था कि गुजरात सरकार को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. और ये हाल तब है, जब परीक्षा रद्द करने के नोटिफिकेशन के ठीक पहले बोर्ड ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर कहा था कि वो परीक्षा सेंटरों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेगा. परीक्षा 33 जिलों के 3100 सेंटरों पर होनी थी.

परीक्षा रद्द होने के फैसले से नाराज़ अभ्यर्थियों ने गांधीनगर में प्रदर्शन किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.
फॉर्म भरने के पैसे गए, कोचिंग की तैयारी भी डूब गई
सुप्रीम कोर्ट का आदेश कहता है कि परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने के बाद परीक्षा के नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता है. इसके बावजूद गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड ने परीक्षा के नियम में बदलाव किया और परीक्षा रद्द कर दी. इसका असर ये हुआ है कि इस परीक्षा के लिए सामान्य कैटेगरी के जिन छात्रों ने 112 रुपये की फीस भरी थी, वो अब डूब गई.

गुजरात में इस परीक्षा के एक छात्र का कॉल लेटर.
इस बारे में भुज के एक छात्र दीप ने बताया कि इस परीक्षा की तैयारी के लिए लाखों छात्रों ने कोचिंग में एडमिशल लिया था. अपने गांव-घर को छोड़कर शहरों में रहकर तैयारी करते थे. एक छात्र की कोचिंग फीस कम से कम 15 हजार रुपये थी और रहने-खाने का खर्च कम से कम छह हजार रुपये का था. अगर सारे छात्रों को मिला लिया जाए, तो कम से कम 500 करोड़ रुपये का तो नुकसान हुआ ही होगा. इसकी भरपाई कौन करेगा, पता नहीं. परीक्षा कब होगी पता नहीं और इंटरमीडिएट पास परीक्षार्थियों का भविष्य क्या होगा, ये भी पता नहीं.

परीक्षा रद्द करने का आदेश.
क्यों रद्द कर दी गई परीक्षा
12 नवंबर, 2018 को गुजरात सरकार के तहत आने वाले गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड ने बिन सचिवालय के लिए 3,738 पदों के लिए वैकेंसी निकाली थी. इंटरमीडिएट पास लोग इस परीक्षा में शामिल हो सकते थे. करीब 10 लाख लोगों ने आवेदन किया था. तैयारी भी करनी शुरू कर दी थी. 20 अक्टूबर, 2019 को परीक्षा की तारीख भी तय कर दी गई थी. 18 महीने की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी के बाद 11 अक्टूबर को इन लाखों परीक्षार्थियों को तब झटका लगा, जब पता लगा कि बोर्ड ने परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है. गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड के डायरेक्टर असीम वोरा ने वजह ये बताई कि सरकार के आदेश के मुताबिक अब इस परीक्षा में इंटरमीडिएट पास लोग नहीं, बल्कि ग्रैजुएशन पास लोग ही अप्लाई कर सकते हैं. इसलिए अब पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जाएगी.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के आदेश का वो लेटर, जो परीक्षा रद्द करने के आदेश के ठीक पहले जारी हुआ था.बोर्ड ने कहा, सरकार ने नियम बदले, सरकार ने कहा, हमें तो पता ही नहीं
गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड की ओर से जारी आदेश के मुताबिक गुजरात सरकार ने गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड के 2014 के नियमों में बदलाव कर दिया है. सरकार की ओर से 30 सितंबर को इसका नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है. लेकिन सरकार की ओर से कहा गया है कि इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. गुजरात के डिप्टी सीएम नितिन पटेल ने मेहसाणा में एक चुनावी रैली के दौरान कहा था कि गुजरात सरकार को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. और ये हाल तब है, जब परीक्षा रद्द करने के नोटिफिकेशन के ठीक पहले बोर्ड ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर कहा था कि वो परीक्षा सेंटरों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेगा. परीक्षा 33 जिलों के 3100 सेंटरों पर होनी थी.

परीक्षा रद्द होने के फैसले से नाराज़ अभ्यर्थियों ने गांधीनगर में प्रदर्शन किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.
फॉर्म भरने के पैसे गए, कोचिंग की तैयारी भी डूब गई
सुप्रीम कोर्ट का आदेश कहता है कि परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने के बाद परीक्षा के नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता है. इसके बावजूद गुजरात सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड ने परीक्षा के नियम में बदलाव किया और परीक्षा रद्द कर दी. इसका असर ये हुआ है कि इस परीक्षा के लिए सामान्य कैटेगरी के जिन छात्रों ने 112 रुपये की फीस भरी थी, वो अब डूब गई.

गुजरात में इस परीक्षा के एक छात्र का कॉल लेटर.
इस बारे में भुज के एक छात्र दीप ने बताया कि इस परीक्षा की तैयारी के लिए लाखों छात्रों ने कोचिंग में एडमिशल लिया था. अपने गांव-घर को छोड़कर शहरों में रहकर तैयारी करते थे. एक छात्र की कोचिंग फीस कम से कम 15 हजार रुपये थी और रहने-खाने का खर्च कम से कम छह हजार रुपये का था. अगर सारे छात्रों को मिला लिया जाए, तो कम से कम 500 करोड़ रुपये का तो नुकसान हुआ ही होगा. इसकी भरपाई कौन करेगा, पता नहीं. परीक्षा कब होगी पता नहीं और इंटरमीडिएट पास परीक्षार्थियों का भविष्य क्या होगा, ये भी पता नहीं.
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