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  • Gujarat Assembly Elections: Six leaders from Vadodra and Narmada rebel

गुजरात में भी हिमाचल की तरह BJP का सिर दर्द बनेगी बगावत? 6 बार के विधायक ने छोड़ी पार्टी

टिकट ना मिलने से नाराज़ हैं कई नेता.

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मधु श्रीवास्तव, हर्षद वसावा और दिनेश पटेल (फोटो - फ़ेसबुक)
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सोम शेखर
13 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 13 नवंबर 2022, 05:30 PM IST)
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गुजरात में भाजपा के लिए अस्थिरता बनी हुई है. BJP ने गुजरात में 182 में से 166 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. ऐलान के बाद, एक मौजूदा विधायक और चार पूर्व विधायक 'नाराज़' हो गए हैं. टिकट नहीं मिला. BJP के इन नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है. हालांकि, इनमें से कुछ नेताओं ने कहा है कि वे समर्थकों से बातचीत करेंगे, फिर अपना अगला क़दम उठाएंगे.

पूरे राज्य में भाजपा नेता 'बाग़ी' हुए जा रहे हैं

पूर्व विधायक हर्षद वसावा आदिवासी समुदाय से हैं. गुजरात बीजेपी का जाना-माना चेहरा हैं. वसावा गुजरात बीजेपी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष हैं. 2002 से 2012 तक राजपीपला सीट से विधायक चुने गए थे. शुक्रवार, 11 नवंबर को हर्षद ने नंदोद सीट से निर्दलीय नामांकन भर दिया. नंदोद सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. अभी इस सीट पर कांग्रेस के विधायक हैं -- प्रेम सिंह भाई वसाव. भाजपा ने इस सीट से डॉ दर्शना देशमुख को उतारा है.

नर्मदा के पड़ोसी वडोदरा ज़िले में भी यही हाल है. एक मौजूदा और दो पूर्व भाजपा विधायक को भी टिकट नहीं मिला, तो वो भी नाराज़ हैं. वाघोड़िया विधानसभा से छह बार के विधायक मधु श्रीवास्तव को भी इस बार टिकट नहीं मिला. उनका काटते हुए BJP ने अश्विन पटेल को टिकट दिया है. नाराज़ मधु श्रीवास्तव ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. मधु श्रीवास्तव ने कहा था कि वो अपने समर्थकों से बात करेंगे और अगर उनके समर्थक चाहेंगे, तो वो निर्दलीय लड़ेंगे.

वाघोड़िया के अलावा पड़रा सीट पर BJP से पूर्व-विधायक दिनेश पटेल उर्फ़ दीनू मामा को भी टिकट नहीं दिया गया है. उन्होंने समर्थकों से बात करने में देर नहीं लगाई, दीनू मामा ने तो घोषणा भी कर दी कि वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे. यहां से बीजेपी ने चैतन्य सिंह जाला को मौक़ा दिया है. इस सीट पर अभी कांग्रेस का क़ब्ज़ा है.

ऐसी हा नाराज़गी करजण में भी है. सिटिंग विधायक अक्षय पटेल को टिकट दिया, तो पूर्व विधायक सतीश पटेल नाराज़ हो गए. बात ये है कि अक्षय पटेल 2017 में इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे. 2020 में भाजपा में शामिल हुए और उपचुनाव जीते. इस हिसाब से पूर्व-विधायक सतीश का कहना है कि उनका दावा ज़्यादा मज़बूत है. उन्होंने अक्षय की उम्मीदवारी और विधायकी पर सवाल उठाए और समर्थकों से बात कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाली बात कही.

वाघोड़िया, पड़रा और करजण, तीनों ही वडोदरा ज़िले में हैं. इतनी अस्थिरता को देखते हुए गुजरात बीजेपी महासचिव भार्गव भट्ट और गृह राज्यमंत्री हर्ष सांघवी ने 12 नवंबर को वडोदरा का दौरा किया और बीजेपी कार्यकर्ताओं से मिले. भट्ट ने विश्वास जताया कि वडोदरा की सभी सीटों पर भाजपा जीतेगी. 

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