एक आजाद देश में खुलकर सांस लेना, सुबह वक्त पर दफ्तर जाना, शाम को घर आ जाना, अपनेपरिवार, दोस्तों के साथ समय बिताना, कहीं भी आना-जाना, किसी भी मुद्दे पर खुलकरबोलना. ये सब संभव हुआ है, उन शहीदों की बदौलत, जिन्होंने जान देकर देश को आजादीदिलाई. ऐसे ही एक शहीद थे सरदार उधम सिंह, जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड केदोषी माइकल ओ’ ड्वायर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. 13 अप्रैल 1919 को हुएहत्याकांड के दोषी माइकल ओ’ ड्वायर को मारने के लिए सरदार उधम सिंह अलग-अलग नामोंसे अफ्रीका, नैरोबी, ब्राजील और अमेरिका पहुंचे. इसके बाद वो 1934 में लंदन पहुंचे.वहां करीब 6 साल रहने के बाद 13 मार्च 1940 को उन्होंने माइकल ओ’ ड्वायर को मारनेमें सफलता हासिल की. हत्या के बाद भी उधम सिंह वहां से फरार नहीं हुए और खुद कोगिरफ्तार होने दिया. 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई. ये वो शहीद हैं, जिनके नामपर उत्तराखंड राज्य के एक जिले का नाम शहीद उधमसिंह नगर रखा गया है. लेकिन अब इसशहीद के परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है. ये परेशानी लंबे समय सेचल रही है और इससे परेशान होकर उनके एक पोते गुरदेव सिंह ने 9 जनवरी को फांसी लगाकरजान दे दी है. पंजाब के फरीदकोट जिले के चाहल गांव के रहने वाले गुरदेव सिंह किसानथे. फसल अच्छी न होने की वजह से उनपर 20 लाख रुपये का कर्ज हो गया था, जिसे वोचाहकर भी नहीं चुका पा रहे थे. पंजाब में जब 2017 के विधानसभा चुनाव थे, तोकांग्रेस ने सत्ता में आने पर कर्ज माफी का वादा किया था. इसी के तहत पांच जिलोंमें इस योजना को शुरू किया गया था, जिसमें 47 किसान शामिल थे. इन किसानों को 2-2लाख रुपये की कर्जमाफी का फायदा मिलना था. गुरदेव सिंह को भी उम्मीद थी कि उन्हेंइसका फायदा मिलेगा. लेकिन 9 जनवरी को जब कर्जमाफी के किसानों की लिस्ट आई, तो उसमेंउनका नाम नहीं था. इससे परेशान होकर उन्होंने घर में ही फांसी लगाकर जान दे दी. 26जनवरी और 15 अगस्त के अलावा सरकार को शहीदों की याद या तो उनके जन्मदिन पर आती हैया फिर उनकी पुण्यतिथि पर. इसके अलावा उन शहीदों का परिवार किस हालत में है, इसकीसुध किसी सरकार ने नहीं ली. यही वजह है कि सरदार उधम सिंह जैसे शहीद के पोते कोफांसी लगाकर जान देनी पड़ी है. और किसानों ने भी उठाए हैं सवाल कर्जमाफी के मुद्देपर पंजाब में सत्ता में आई कांग्रेस की इस कर्जमाफी योजना पर और भी किसानों ने सवालउठाए हैं. संगरूर में एक किसान जसवीर सिंह का सिर्फ 5 रुपये का कर्ज माफ किया गयाहै, जबकि उसपर 65,000 का कर्ज था. इसी गांव के एक किसान हाकम सिंह पर 67,000 काकर्ज था, जो माफ ही नहीं हुआ है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: कुल तीन UK रहे उधम सिंह की ज़िंदगी के अहम हिस्से उधम सिंह के 'राममोहम्मद सिंह आजाद' बनने के पीछे की असली कहानी बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां कीदोस्ती का किस्सा, जो मौत के बाद ही खत्म हुआ वो स्वदेशी के लिए आंदोलन कर रहा था,उस पर ट्रक चढ़ाकर मार डाला गया वीडियो में जानिए पैराडाइज पेपर लीक करने वालेअखबार की हालत