'बॉयकॉट चाइनीज प्रोडक्ट' के शोर के बीच अब सरकार खेल का नया नियम लेकर आई है!
'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा देने के लिए ये कदम उठाया गया.
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सरकारी पोर्टल Gem पर अब विक्रेताओं को प्रोडक्ट का मूल देश बताना होगा. सरकार ने इसके लिए आदेश जारी किए हैं. प्रतीकात्मक फोटो-AP
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सरकारी पोर्टल Gem पर अब विक्रेताओं को प्रोडक्ट का मूल देश बताना होगा. सरकार ने इसके लिए आदेश जारी किए हैं. गवर्मेंट ई-मार्केटप्लेस Gem पर नए प्रोडक्ट को रजिस्टर करते समय विक्रेताओं को प्रोडक्ट का 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' बताना होगा. यानी सेलर्स को यह जानकारी देनी होगी कि प्रोडक्ट का निर्माण या उसका आयात कहां से हुआ है. जो विक्रेता पहले ही अपने प्रोडक्ट को रजिस्टर कर चुके हैं, उन्हें भी ये जानकारी देनी होगी. ये भी कहा गया है कि ऐसा नहीं करने पर उनके प्रोडक्ट को GeM से हटा दिया जाएगा.
'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा देने के लिए ये कदम उठाया गया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में 'वोकल फॉर लोकल' की बात की थी. कहा था कि आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए लोकल प्रोडक्ट को बढ़ावा देना होगा. उन्होंने नागरिकों से अपील की थी कि लोकल के लिए वोकल भी बनें.
Gem है क्या?
GeM यानी Government e-Marketplace वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करता है. इसे सार्वजनिक क्षेत्र की खरीदारी के लिए बनाया गया है. केंद्र ने सभी सरकारी विभागों को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस से जोड़ा है. सरकारी विभाग अपने उपयोग लिए वस्तुओं और सेवाओं को ई-पोर्टल GeM के जरिए खरीद सकेंगे. मान लीजिए कि आप इलेक्ट्रॉनिक्स बेचते हैं. और आपने GeM पर रजिस्ट्रेशन करा रखा है, तो अगर भारत सरकार का कोई डिपार्टमेंट इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने के लिए टेंडर निकालता है, तो आपको इसकी जानकारी दी जाएगी और आप इस टेंडर के लिए बोली लगा सकते हैं.
इस बारे में और क्या कहा गया है?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि GeM शुरुआत से ही 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है. इस मार्केट प्लेस से छोटे स्थानीय विक्रेताओं को सार्वजनिक खरीद में हिस्सा लेने का मंच मिल गया है. विज्ञप्ति में कहा गया है कि कोविड-19 के इस काल में जब सरकारी संगठनों को तात्कालिक तौर पर उत्पादों की जरूरत पड़ रही है, ऐसे वक्त में GeM सामान की सार्वजनिक खरीद के लिए बहुत प्रभावी, पारदर्शी और किफायती मंच साबित हो रहा है.
ई-मार्केट प्लेस पर रजिस्टर्ड हर सामान के आगे 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' के साथ ही स्थानीय सामग्री के प्रतिशत की जानकारी भी मिलेगी. इस महीने की शुरुआत में सरकार ने खरीद मानकों में संशोधन किया था. सप्लायर्स को उनके प्रोडक्ट में स्थानीय सामग्री के स्तर के आधार पर कैटेगरी में बांटा गया है.
अन्य के लिए भी उठी मांग
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि उन्होंने 15 जून को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से संपर्क किया था कि निजी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' टैग अनिवार्य किया जाए. ज्यादातर ई-कॉमर्स कंपनियां अपने पोर्टल पर बड़ी मात्रा में चीनी सामान बेच रही हैं. ग्राहक प्रोडक्ट के 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' से अनजान हैं. इसलिए यह उनके पसंद को भी प्रभावित करता है.
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