काले धन और गरीबी को जोड़कर सरकार की नई कॉकटेल, पियें और मुक्त हो जायें
सरकार लगातार नई स्कीमें ला रही है. एक और आई.
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फोटो - thelallantop
प्रधानमंत्री काफी आक्रामक तरीके से कई योजनाएं एक साथ दबोच रहे हैं. प्रधानमंत्री के मुताबिक नोटबंदी काले धन के ऊपर अब तक का सबसे बड़ा हमला है. उन्होंने कई जगह वादे भी किये जनता से कि नोटबंदी से सारा काला धन सामने आ जाएगा और गरीबों को फायदा होगा.
काले धन पर सरकार बहुत दिन से मुहिम चला रही थी. इसमें सबसे बड़ी स्कीम इनकम डिक्लेरेशन स्कीम है. जून 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात में रेडियो पर कहा था- जून से लेकर 30 सितंबर 2016 तक 4 महीने का समय दिया जा रहा है. काले धन का 25 परसेंट नवंबर 2016 तक जमा कर देना है. और 30 सितंबर 2017 तक 3 इंस्टाल्मेंट में कुल टैक्स और पेनाल्टी देनी है. प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि डिक्लेयर करने पर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि इसमें वो लोग नहीं आएंगे जो ड्रग बेचते हैं और अन्य गैरकानूनी काम करते हैं. अगर ऐसा कोई मामला पाया जायेगा तो अलग से कार्रवाई होगी.
पर 8 नवंबर 2016 को नोट बंदी के साथ ही सबको ये लगने लगा कि अब किसी और स्कीम की जरूरत नहीं है. अब सारा काला धन सामने आ जाएगा. क्योंकि 30 दिसंबर तक का वक्त दिया गया सारे धन को डिक्लेयर करने के लिये. अगर कोई गैरकानूनी तरीके से कमाया नोट बैंक में नहीं डालता है तो वो ऐसे ही बेकार हो जाएगा. अगर डालता है तो ढाई लाख से ऊपर की रकम पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अपनी नजर रखेगा. अगर वो इंसान अपने मन से काला धन डिक्लेयर कर देता है तो उस पर 50 परसेंट टैक्स लगेगा और कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.
तो ये स्कीम भी सितंबर वाली इनकम टैक्स डिक्लेरेशन स्कीम की तरह है. मतलब आय घोषित करिए, टैक्स दीजिए और मुक्त हो जाइए. अब सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में इनकम टैक्स अमेंडमेंट बिल पेश किया. और एक नई स्कीम का प्रस्ताव दिया. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना,2016 के लिये टैक्सेशन और इंवेस्टमेंट रिजीम. इस स्कीम के अंतर्गत काले धन पर लगे टैक्स का 33 परसेंट गरीब कल्याण योजना में जाएगा. इसके अलावा और भी चीजें हैं. जैसे कि 25 परसेंट अघोषित आय को 4 साल के पहले नहीं निकाल पायेंगे. इन पैसों से नई स्कीमें लाई जायेंगी. अगर खुद नहीं बताते हैं और सरकार पकड़ती है तो 85 परसेंट टैक्स लगेगा.
सरकार एक ही स्क्रीन पर कई फिल्में दिखा रही है. काला धन, गरीबों को फायदा जैसी सारी चीजें एक प्लेटफॉर्म पर लाई जा रही हैं. पर ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि इनकम टैक्स कानून का ही इस्तेमाल कर के बहुत सारे लोग अपने काले धन को सफेद करा लेंगे. और साफ बच जायेंगे. तो गैरकानूनी तरीके से कमाया पैसा सरकार और लोगों के खाते में आधा-आधा बंट जायेगा. कोई पकड़ा नहीं जायेगा. काले धन के साथ ये सबसे बड़ी समस्या है.
मई 2014 में नई सरकार के बनने के साथ ही काले धन पर एक कमिटी बनाई गई थी. इसने कई लोगों के नाम भी सुप्रीम कोर्ट में दिये थे. पर अब तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है. क्योंकि कानूनों के लूपहोल का इस्तेमाल कर लोग बच जा रहे हैं. टैक्स सिस्टम की जटिलता इतनी ज्यादा है कि लोग रास्ते निकाल लेते हैं. फिर सरकार भी अपनी विफलता मानती है. तभी लोगों को माफ कर देती है. माफी ना देने में सबसे बड़ी समस्या ये आती है कि कम आय वाले लोग जो अपना इनकम डिक्लेयर नहीं कर पाते, फंस जाते हैं. निकल जाते हैं वो लोग जिनके पास सबसे ज्यादा गैरकानूनी पैसा है.
इन नई स्कीमों से सरकार को पॉलिटिकल माइलेज तो मिल रहा है. पर देखना ये है कि काले धन और इसकी पैदाइश पर कितनी लगाम लगती है. क्योंकि अभी तक तो सारा इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार नहीं हो पाया है. सरकार भी लोगों की ऐच्छिक डिक्लेरेशन पर निर्भर है. ये भी संभावना है कि हजार रुपये घूस लेने वाला दो हजार ले लेगा और किसी और के खाते से इनकम डिक्लेयर करवा देगा. अगर कमीशन दे भी दे तो उसके अपने पैसे बचे रहेंगे. भारतीयों की जुगाड़ क्षमता के आगे स्कीमें बिखर जाती हैं. सरकार के उत्साह का परिणाम आना अभी बाकी है. पर अभी तो काले धन वाले लोगों के पास एक रास्ता तो है ही. छूट जायेंगे. और फिर नया रास्ता निकालेंगे फिर से कमाने के लिये. क्योंकि काले धन की पैदाइश को रोकने के लिये अभी तक कोई स्कीम नहीं बनी है. उम्मीद है सरकार इसके लिये भी कोई काम करेगी ही. शायद सबसे पहले सारी राजनीतिक पार्टियों से उनका अपना धन डिक्लेयर करवाए. सबसे पहले शायद खुद का ही करे. ये नजीर पेश कर फिर सब पर शिकंजा कसे. शायद में बहुत कुछ होता है और नहीं भी होता है.
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