डेटा बोलता हैः क्या दिल्ली, यूपी, बिहार की सरकारों ने कोविड की टेस्टिंग में कमी कर दी?
महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का क्या हाल है?
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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और बिहार के सीएम नीतीश कुमार. (तस्वीर: पीटीआई)
कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर में संक्रमितों और इससे मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. लोगों को हॉस्पिटल में बेड नहीं मिल रहे. कई जगह ऑक्सीजन की घोर कमी देखी जा रही है. विदेशों से ऑक्सीजन मंगवाई जा रही है. कोविड टेस्टिंग तक में बहुत अधिक वक्त लग रहा है. और इन सबके बीच नए केसों की संख्या हर दिन 3 लाख के पार जा रही है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 26 अप्रैल को कोरोना वायरस से संक्रमण के 3 लाख 19 हज़ार 315 नए मामले सामने आए हैं और 2,762 लोगों की मौत हो गई है. पिछले कुछ दिनों के डेटा को देखें तो यह डेटा बेहतर है क्योंकि संक्रमितों की संख्या जिस हिसाब से बढ़ रही थी, उस पर ब्रेक लगा है. दो दिनों के डेटा की तुलना करें तो संक्रमितों की संख्या में करीब 35 हज़ार की कमी आई है.
बीते कुछ दिनों में छत्तीसगढ़, दिल्ली, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में केसेस में गिरावट आई है. ऐसे में कई लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि इन राज्यों ने टेस्ट की संख्या कम कर दी है. इस वजह से केस भी कम आ रहे हैं. इसलिए हमने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र का डेटा खंगाला है और जानने की कोशिश की है कि क्या इन राज्यों में वाकई टेस्टिंग में कमी आई है?
नोट: स्टोरी में इस्तेमाल किए गए सभी डेटा 1 अप्रैल 2021 से लेकर 26 अप्रैल 2021 तक के हैं.
दिल्ली से शुरू करते हैं
कोरोना वायरस से दिल्ली का बुरा हाल है. कोरोना काल में एक बार फिर दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच की अनबन सामने आई है. लेकिन हम अभी बात करेंगे दिल्ली में हो रहे कोविड टेस्टिंग की.
दिल्ली के केस में टेस्टिंग में कमी होने की बात सही है. दिल्ली में अप्रैल के पहले 13 दिनों में जिस स्पीड से टेस्टिंग हुई है उसकी मुकाबले हाल के दिनों में कम स्पीड से टेस्टिंग हुई है.
1-13 अप्रैल की औसत टेस्टिंग: 90572
14-26 अप्रैल की औसत टेस्टिंग : 83573
आख़िरी 7 दिन की औसत टेस्टिंग (20-26 अप्रैल): 74406
देखिए दिल्ली में टेस्टिंग का हाल
यानी टेस्टिंग में कमी साफ़ नज़र आ रही है. बीते सात दिनों में एक बार भी टेस्टिंग का आंकड़ा 90 हज़ार के पार नहीं पहुंचा है. वहीं शुरुआती अप्रैल में पांच दफ़ा टेस्टिंग का आंकड़ा एक लाख के पार पहुंचा था. पूरे 26 दिन की बात करें तो, 26 अप्रैल को सबसे कम टेस्टिंग की गई है. सिर्फ 57,690. दिल्ली में कम हो रही टेस्टिंग के साथ पॉजिटिविटी रेट भी बढ़ी है और बढ़ती जा रही है. औसतन टेस्ट करवा रहे हर तीन आदमी में से एक आदमी कोविड से संक्रमित पाया जा रहा है. ग्राफ़ के जरिए देखिए दिल्ली में बढ़ रहे संक्रमण दर को देखिएअब बात उत्तर प्रदेश की
उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां टेस्टिंग में औसतन बढ़ोतरी ही नज़र आती है. सिवाए 26 अप्रैल के. 26 अप्रैल को पिछले 20 दिन की तुलना में सबसे कम टेस्ट किए गए हैं. जबकि 25 अप्रैल को सबसे अधिक 2,39,584 टेस्ट किए गए हैं. ऐसे में एक दिन में करीब 63 हज़ार टेस्ट की कमी, काफ़ी सोचनीय है.
टेस्टिंग का हाल देखिए
1-13 अप्रैल की औसत टेस्टिंग: 1,82,718 14-26 अप्रैल की औसत टेस्टिंग : 2,14,134 आख़िरी 7 दिन की औसत टेस्टिंग (20-26 अप्रैल): 2,12,896 उत्तर प्रदेश कोरोना पॉजिटिविटी रेट
उत्तर प्रदेश की भी पॉजिटिविटी रेट बढ़ती जा रही है. अप्रैल की शुरुआत में यह सिर्फ 2 फीसद थी जो अब बढ़कर 19 फीसद पर पहुंच चुकी है.
नीतीश सरकार का क्या हाल है?
बिहार में भी टेस्टिंग में बढ़ोतरी हो रही है लेकिन बिहार का रिकॉर्ड खराब रहा है. हाल के दिनों में कई ऐसी रिपोर्ट आई जिसमें बिहार में कोविड टेस्टिंग में हुए फ्रॉड को लेकर विस्तार से बताया गया था. नीतीश सरकार ने बाद में जांच की बात भी कही थी लेकिन जांच रिपोर्ट का अब तक कोई ख़ास अपडेट नहीं है.
1-13 अप्रैल की औसत टेस्टिंग: 80,156
14-26 अप्रैल की औसत टेस्टिंग : 99,232
आख़िरी 7 दिन की औसत टेस्टिंग (20-26 अप्रैल): 1,00,532
यहां देखिए किस दिन कितनी टेस्टिंग हुई
बिहार अप्रैल की शुरुआत में करीब 60 हज़ार टेस्ट कर रहा था जो 14 अप्रैल आते-आते 1 लाख को पार कर गया. 14 अप्रैल से लेकर 26 अप्रैल के बीच सिर्फ 2 दिन एक लाख से कम टेस्ट किए गए हैं. 26 अप्रैल को सिर्फ 80,461 टेस्ट किए गए, यह पिछले 14 दिनों में सबसे कम है. बिहार में भी 25 अप्रैल और 26 अप्रैल के बीच टेस्टिंग में गिरावट है. 25 अप्रैल की तुलना में 26 अप्रैल को करीब 20 हज़ार कम टेस्ट हुए हैं. बिहार में संक्रमण दर का क्या हाल है?
अप्रैल की शुरुआत में बिहार में पॉजिटिविटी रेट 1 फीसद से भी कम थी जो 26 अप्रैल तक बढ़कर 14.7 तक पहुंच गई है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की तुलना में बिहार की पॉजिटिविटी रेट सबसे तेजी से बढ़ रही है.
अब सबसे बुरी तरह से प्रभावित महाराष्ट्र की बात
महाराष्ट्र भारत का सबसे बुरी तरह से कोविड प्रभावित राज्य है. राज्य में अब तक 65 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. यहां 6.5 लाख से अधिक एक्टिव केस हैं.
1-13 अप्रैल की औसत टेस्टिंग: 2,12,916
14-26 अप्रैल की औसत टेस्टिंग : 2,62,459
आख़िरी 7 दिन की औसत टेस्टिंग (20-26 अप्रैल): 2,70,886
देखिए किस दिन कितने टेस्ट किए गए
महाराष्ट्र में टेस्टिंग बढ़ी है. अप्रैल की शुरुआत में हर दिन करीब 1.8 लाख टेस्ट हो रहे थे जो 25 अप्रैल आते-आते करीब 2.9 लाख तक पहुंच गए. 26 अप्रैल को महाराष्ट्र में भी कम टेस्टिंग देखी गई है. 25 अप्रैल की तुलना में करीब 67 हज़ार की कमी. महाराष्ट्र में पॉजिटिविटी रेट की बात करें तो कमी आई है. अप्रैल के पहले हफ्ते में पॉजिटिविटी रेट 29 फीसद तक पहुंच गई थी जो अप्रैल के चौथे हफ्ते तक 22 के करीब आ गई है. ग्राफ़ में देखिए महाराष्ट्र का पॉजिटिविटी रेटछत्तीसगढ़ के क्या हाल हैं?
छत्तीसगढ़ में कोविड की टेस्टिंग में बढ़ोतरी हुई है. अप्रैल की शुरुआत में औसत आंकड़ा करीब 40 हज़ार हर दिन का रहा जो 25 अप्रैल आते-आते 50 हज़ार को पार कर चुका है.
देखिए छत्तीसगढ़ में हर दिन कितने टेस्ट हो रहे?
1- 13 अप्रैल की औसत टेस्टिंग: 42,983 14-26 अप्रैल की औसत टेस्टिंग: 50,529 आख़िरी 7 दिन की औसत टेस्टिंग (20-26 अप्रैल): 51,724 पॉजिटिविटी रेट क्या है?
छत्तीसगढ़ में कोविड पॉजिटिविटी रेट में बढ़ोतरी हुई है. अप्रैल की शुरुआत में यह करीब 12 फीसद था जो 25 अप्रैल आते-आते करीब 25 फीसद तक पहुंच चुका है.
अब बात शिवराज सरकार की
मध्य प्रदेश ने अप्रैल की शुरुआत से लेकर 25 अप्रैल तक टेस्टिंग को दोगुना कर दिया है. अप्रैल की शुरुआत में हर दिन करीब 25 हज़ार टेस्ट किए जा रहे थे जो अब 50 हज़ार के पार जा चुके हैं. कोरोना के नए मामलों की बात करें तो मध्यप्रदेश में जोरदार उछाल है. अप्रैल की शुरुआत में करीब 3 हज़ार से कम भी केस आ रहे थे जो अब बढ़कर 12 हज़ार के पार जा चुके हैं.
ग्राफ के जरिए देखिए
1-13 अप्रैल की औसत टेस्टिंग: 33,768 14-26 अप्रैल की औसत टेस्टिंग: 52,586 आख़िरी 7 दिन की औसत टेस्टिंग (20-26 अप्रैल): 54,862 अब बात पॉजिटिविटी रेट की
मध्य प्रदेश में भी पॉजिटिविटी रेट में बढ़ोतरी है. अप्रैल की शुरुआत में मध्य प्रदेश में पॉजिटिविटी रेट करीब 10 फीसद थी जो अब बढ़कर करीब 23 फीसद पर पहुंच चुकी है.

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