मोदी सरकार ने तय कर लिया है कि वह फिलहाल सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत जारी नहींकरेगी. 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने टॉप लेवल के सरकारी सूत्रों के हवाले से ये दावाकिया है. सूत्र के मुताबिक, सरकार इस वक्त युद्ध को भारत के हित में नहीं मानती,लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि अगर युद्ध थोपा गया तो वह लड़ा और जीता नहीं जाएगा.इससे पहले सूत्रों के हवाले से कुछ अखबारों ने दावा किया था कि सेना ने अपनी तरफ सेसरकार को सबूत सौंप दिए हैं और उन्हें सार्वजनिक करने का फैसला सरकार को लेना है.बहुत सारे लोग पूछ सकते हैं कि इस वाक्य में 'फिलहाल' क्यों नत्थी है? सरकार कभीसबूत जारी नहीं करेगी या फिलहाल नहीं कर रही है? क्या चुनावों का इंतज़ार किया जारहा है? भारतीय सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि 28 सितंबर को तड़के एलओसीके पार आतंकियों के लॉन्च पैड पर सर्जिकल स्ट्राइक की गई और उन्हें 'काफी नुकसान'पहुंचाया गया. इसके बाद विपक्ष के कुछ नेताओं ने परोक्ष रूप से इस स्ट्राइक के सबूतजारी करने की मांग की थी.UN की मीटिंग खत्म होने का इंतज़ार किया गया, जान बूझ के!सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सरकार सर्जिकल स्ट्राइक को डिप्लोमेटिकललेवल पर कामयाब मानती है, क्योंकि किसी भी देश ने इस कार्रवाई का विरोध नहीं किया.यहां तक कि पाकिस्तान के मित्र चीन ने भी नहीं. इस्लामी दुनिया से आई प्रतिक्रियाभी भारत के पक्ष में ही रही. सूत्र ने ये भी बताया कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के लिएयूनाइटेड नेशंस की जनरल असेंबली मीटिंग खत्म होने का इंतजार किया गया, ताकिपेचीदगियों से बचा जा सके. सूत्र ने कहा, 'इससे हमारा ध्यान और कूटनीतिक ऊर्जा गलतदिशा में जा सकती थी.' यह भी सरकार की कूटनीतिक चालाकी थी कि सर्जिकल स्ट्राइक केबाद ही सरकार ने ऐलान किया कि आने वाले गणतंत्र दिवस पर अबू धाबी के प्रिंस शेखमुहम्मद बिन जायद अल नाहयान हमारे चीफ गेस्ट होंगे. सूत्रों ने ये भी बताया किसर्जिकल स्ट्राइक से पहले अमेरिका को कोई सूचना नहीं दी गई थी. सूत्र ने कहा, 'भारतकी कूटनीति किसी भी देश के लिए चापलूसी वाली नहीं होगी. नेहरू के समय से भारत कीयही नीति रही है. गुटनिरपेक्ष नीति का यही मतलब था. हमने महाशक्तियों के साथ कामकिया है, लेकिन हम अपने फैसले लेने का हक कभी नहीं छोड़ेंगे.'अगली बार तरीका एकदम अलग होगा!बताया जाता है कि सरकार मानती है कि सर्जिकल स्ट्राइक पर दुनिया के रिएक्शन सेपाकिस्तान का हौसला गिरा है. सूत्र ने कहा, 'दुनिया ने मान लिया है कि भारत का कदमउचित था. इस स्वीकृति से हमारे लिए अगली बार एक्शन लेना आसान रहेगा. लेकिन अगली बारका तरीका एकदम अलग हो सकता है. ये किसी कार्रवाई के काउंटर में होने वाले नुकसान काआकलन करके तय किया जाएगा. लेकिन हमारी तरफ से कोई भी कार्रवाई में तीन चीजें होंगी:स्पीड, स्किल और सरप्राइज.' सर्जिकल स्ट्राइक के बाद रूस और पाकिस्तान के साझासैन्य अभ्यास पर भी सूत्र ने टिप्पणी की. उन्होंने इसे 'हमारी ओर से की गईमिस-हैंडलिंग' बताया. उन्होंने कहा, 'मॉस्को सेंट्रल एशिया में अस्थिरता सेफिक्रमंद है और उसे ISI को एंगेज करने की जरूरत है ताकि वो रूस के खिलाफ न हो जाए.लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि बात अगर भारत और पाकिस्तान में से एक को चुनने पर आए तोरूस पाकिस्तान को चुने.'-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ें: ये रहा सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो, लो देख लो सर्जिकल स्ट्राइक केएक-एक मिनट का खुलासा PoK में सर्जिकल स्ट्राइक के 'मास्टरमाइंड' थे मुलायम सिंह?