इस शख्स ने मन के कहने पर मांगा भारत रत्न, पत्र राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा, फिर क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले हैं विनोद कुमार गोंड. उन्होंने जिलाधिकारी को एक खत लिखा था जिसका विषय है- भारत रत्न से सम्मानित होने के संबंध में प्रार्थना पत्र. हैरानी की बात ये कि अधिकारियों के साइन के साथ ये खत राष्ट्रपति भवन तक पहुंच भी गया.

भारत रत्न. कला, विज्ञान, राजनीति, खेल आदि क्षेत्रों में देश के लिए अभूतपूर्व योगदान देने वाले लोगों को देश के इस सबसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा जाता है. इसे हासिल करने के लिए आपको क्या बनना पड़ेगा वो कुछ नामों से समझ आ जाता है, जैसे सचिन तेंदुलकर, पंडित भीमसेन जोशी, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, सत्यजीत राय आदि. लेकिन विनोद कुमार गोंड को इन लोगों की तरह कुछ करके नहीं, बल्कि दिल की आवाज पर भारत रत्न चाहिए.
भाईसाहब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले हैं. 2 बच्चों के पिता विनोद कुमार गोंड पेशे से ड्राइवर हैं. उन्होंने जिलाधिकारी को एक खत लिखा है जिसका विषय है- भारत रत्न से सम्मानित होने के संबंध में प्रार्थना पत्र.
लेटर में विनोद बताते हैं कि इसी साल 30 सितंबर की शाम को वो संध्या वंदन से पहले ध्यान साधना में लगे थे. तभी उनके अंतर्मन से आवाज आई “मुझे भारत रत्न मिलना चाहिए-मुझे भारत मिलना चाहिए”. विनोद ने लेटर में बताया,
"मेरे अंतःकरण से 'मुझे भारत रत्न चाहिए-मुझे भारत रत्न चाहिए' की आवाज़ बहुत तीव्र गति से उत्पन्न होने लगी. अतः आपसे निवेदन है कि प्रार्थी की समस्त मनोकामना पूर्ण व भारत रत्न से सम्मानित कराने की कृपा करें."

साफ है मन की आवाज को विनोद भाई बहुत सीरियसली ले लिए हैं. वैसे तो संबंधित विभाग को उनके लेटर को 'मतलब कुछ भी' वाली मीम कैटेगरी में रखना चाहिए था. लेकिन ताज्जुब है कि इस अजीबोगरीब मांग को राष्ट्रपति तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों के स्तर पर प्रयास किया गया. उन्होंने मुहर पर मुहर मार के लेटर को मंजूरी दी.
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक ये पत्र विभागीय लापरवाही की वजह से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा. पत्र पाकर अधिकारियों ने बिना जांच किए उसे आगे फॉरवर्ड कर दिया. जब संबंधित अधिकारियों से इस मामले पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. हालांकि ऑफ कैमरा उन्होंने बताया कि पत्र डाक से आया था.
आजतक ने खुद के लिए भारत रत्न की मांग करने वाले विनोद कुमार गोंड से भी बात की. विनोद के मुताबिक उन्होंने हैंड टू हैंड ‘कमिश्नर साहब’ को पत्र दिया था. उनका दावा है कि इस पर कमिश्नर साहब ने उनसे कहा था कि जाइये, आपका पत्र मैं आगे भिजवा देता हूं.
खैर, विनोद का अनुरोध राष्ट्रपति भवन ने खारिज कर दिया. बकौल विनोद, उन्हें राष्ट्रपति भवन से फोन आया था. कहा गया कि उनमें कोई योग्यता नहीं है जिससे वो भारत रत्न पाने के हकदार हों. लिहाजा वो दोबारा ऐसी मांग न करें.
पूरे मामले में एक गौर करने वाली बात. विनोद के लेटर पर कई अधिकारियों की मुहर दिख रही है. सवाल उठे हैं कि ऐसे लेटर को कोई अधिकारी कैसे समय दे सकता है. सीडीओ गोरखपुर संजय कुमार मीना ने कहा कि जब भी कोई चिट्ठी कार्यालय में आती है तो उसे मार्क किया जाता है. यहां भी वही किया गया. बाकी उक्त चिट्ठी की जांच की जा रही है.
यह भी पढ़ें: OpenAI को CEO मिल गया, नाम है Sam Altman, ये कैसे हो गया?

