डॉक्टर कफील के भाई को किसने तीन गोलियां मारीं?
गोलियां क्यों मारी गईं, इसके पीछे अलग-अलग थ्योरी सामने आ रही है.
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गोरखपुर में बच्चों की मौत के बाद गिरफ्तार किए गए डॉ. कफील (दाएं) के भाई काश़िफ को तीन गोलियां मारी गई हैं.
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गोरखपुर में एक मेडिकल कॉलेज है. नाम है बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज. ये वही अस्पताल है, जहां हर साल इंसेफेलाइटिस की वजह से 1000 से भी ज्यादा बच्चों की मौत हो जाती है. इसी अस्पताल में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी से एक ही दिन में 65 बच्चों की मौत हो गई थी. और इन्हीं मौतों के बाद यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बयान दिया था कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं. और इसी हादसे के बाद कई गिरफ्तारियां हुई थीं. इनमें से एक नाम डॉक्टर कफील खान का भी था, जो इस अस्पताल के इंसेफेलाइटिस वॉर्ड के इंचार्ज थे. ये वही कफील खान थे, जिन्होंने अपने पैसों से ऑक्सिजन सिलिंडर खरीदकर मंगाए थे और इसकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. लेकिन सरकार की जांच में ऑक्सीजन की सप्लाई में कमी के लिए डॉक्टर कफील को दोषी पाया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया.

अगस्त 2017 में बच्चों की मौत के बाद डॉ. कफील की ये फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं.
डॉक्टर कफील जेल से तो जमानत पर बाहर आ गए, लेकिन उनके साथ एक और हादसा हो गया है. उनके छोटे भाई काश़िफ जमील को बाइक सवार बदमाशों ने तीन गोलियां मार दी हैं. इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.

काश़िफ फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.
डॉ. कफील चार भाई हैं. सबसे बड़े हैं अदील अहमद खान. उसके बाद डॉक्टर कफील हैं. कफील से छोटे हैं काशिफ और उनसे छोटे हैं डॉ. फजील अहमद खान. डॉ. कफील से छोटे काश़िफ गोरखपुर के बसंतपुर इलाके में रहते हैं. वहां रुस्तमपुर में उनकी क्वॉलिटी इंटरप्राइजेज नाम से बैट्री और इनवर्टर की दुकान है. इसके अलावा वो प्रापर्टी डिलींग का भी काम करते हैं. 10 जून की शाम को इफ्तार के बाद वो अपने एक दोस्त से मिलने के लिए गोरखनाथ इलाके में गए थे. दोस्त से मिलकर घर लौटते वक्त काश़िफ की बाइक जब रात साढ़े 10 बजे जेपी हॉस्पिटल के पास पहुंची, स्कूटर सवार दो बदमाशों ने उनको गोली मार दी. तीन गोलियां लगने के बाद भी काश़िफ ने हिम्मत नहीं हारी और पैदल ही पास के जेपी हॉस्पिटल पहुंच गए. वहां इलाज न मिलने पर उन्होंने एक ऑटो किया और फिर स्टार हॉस्पिटल पहुंच गए. इसके बाद घरवाले और पुलिस अस्पताल पहुंचे. अस्पताल में पता चला कि काश़िफ को तीन गोलियां लगी हैं, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.
भाई को गोली लगने की खबर सुनकर अस्पताल पहुंचे डॉ. कफील ने कहा-
जेल से लिखी थी चिट्ठी

डॉक्टर कफील ने जेल में रहने के दौरान 11 पन्नों का लेटर लिखा था, जिसे उनकी पत्नी ने मीडिया में इसे जारी किया था.
बीआरडी अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद यूपी एसटीएफ ने डॉ. कफील को गिरफ्तार किया था. जेल में रहने के दौरान कफील ने खुद पर और अपने परिवार पर हमले की आशंका जताई थी. डॉ. कफील ने जेल से ही 10 पन्नों का एक खत लिखा था, जिसमें कहा गया था कि प्रशासन की नाकामी छुपाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है. ये पत्र 18 अप्रैल को लिखा गया था, जिससे उनकी पत्नी शबिस्ता ने मीडिया में भी जारी किया था. इस पत्र में कफील ने लिखा था कि 3 अगस्त की सुबह योगी महाराज अस्पताल में मुझसे मिले थे और कहा था कि सिलिंडर का इंतजाम कर लेने से आपको लग रहा कि आप हीरो बन जाएंगे? मैं इसे देखता हूं. कफील ने लिखा था कि सीएम योगी को लग रहा था कि मेरी वजह से ये मामला मीडिया में गया है. इसके बाद तो मेरे परिवार को तंग किया जाने लगा. पुलिस घर आने लगी. मुझे धमकी दी जाने लगी. मेरा परिवार इन सब बातों से डर गया था. परिवार को बचाने के लिए मैंने सरेंडर कर दिया था.
कहीं जमीन का विवाद तो वजह नहीं!

गोरखपुर में डॉ. कफील का अपना अस्पताल भी है. (फोटो : Indian Express)
डॉक्टर कफील के भाई काश़िफ को गोली लगने के बाद ये सवाल स्थानीय मीडिया में जोर-शोर से तैर रहा है. बताया जा रहा है कि काश़िफ के परिवार का गोरखपुर में कई लोगों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है. काश़िफ के एक रिश्तेदार ने बीजेपी के एक सांसद पर जमीन हड़पने का भी आरोप लगाया था. हिंदुस्तान अखबार के मुताबिक 10 जून को ही डॉक्टर कफील ने रुस्तमपुर की एक प्रापर्टी बेचने के लिए सोशल मीडिया और डॉक्टरों के कई ग्रुप में मैसेज भी भेजा था. उन्होंने लिखा था कि जगदीश हॉस्पिटल के बगल में 2200 स्क्वॉयर फीट में बना तीन मंजिला मकान उनका है, जिसे वो बेचना चाहते हैं. इसकी वजह बताते हुए कफील ने लिखा था कि जेल में रहने की वजह से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है और इसलिए वो अपनी प्रॉपर्टी बेचना चाहते हैं.
पुलिस भी उठा रही सवाल
गोलीकांड की सूचना पर सीओ क्राइम प्रवीण सिंह और कोतवाल घनश्याम तिवारी पहले मौके पर पहुंचे. उसके बाद दोनों पुलिस अधिकारी अस्पताल गए. पूछताछ के बाद पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम पर शक जाहिर किया है. पुलिस के मुताबिक अगर हमलावरों को मारना ही था, तो तीन गोलियां छूकर कैसे निकल गईं. जेपी हॉस्पिटल के पास भीड़ रहती है, ऐसे में हमलावर आराम से कैसे भाग गए. इसके अलावा पुलिस इस बात को लेकर भी शक की निगाह से देख रही है कि गोली लगने के बाद काश़िफ ने खुद से ऑटो किया और बैठकर अस्पताल आ गए.
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अगस्त 2017 में बच्चों की मौत के बाद डॉ. कफील की ये फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं.
डॉक्टर कफील जेल से तो जमानत पर बाहर आ गए, लेकिन उनके साथ एक और हादसा हो गया है. उनके छोटे भाई काश़िफ जमील को बाइक सवार बदमाशों ने तीन गोलियां मार दी हैं. इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.

काश़िफ फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.
डॉ. कफील चार भाई हैं. सबसे बड़े हैं अदील अहमद खान. उसके बाद डॉक्टर कफील हैं. कफील से छोटे हैं काशिफ और उनसे छोटे हैं डॉ. फजील अहमद खान. डॉ. कफील से छोटे काश़िफ गोरखपुर के बसंतपुर इलाके में रहते हैं. वहां रुस्तमपुर में उनकी क्वॉलिटी इंटरप्राइजेज नाम से बैट्री और इनवर्टर की दुकान है. इसके अलावा वो प्रापर्टी डिलींग का भी काम करते हैं. 10 जून की शाम को इफ्तार के बाद वो अपने एक दोस्त से मिलने के लिए गोरखनाथ इलाके में गए थे. दोस्त से मिलकर घर लौटते वक्त काश़िफ की बाइक जब रात साढ़े 10 बजे जेपी हॉस्पिटल के पास पहुंची, स्कूटर सवार दो बदमाशों ने उनको गोली मार दी. तीन गोलियां लगने के बाद भी काश़िफ ने हिम्मत नहीं हारी और पैदल ही पास के जेपी हॉस्पिटल पहुंच गए. वहां इलाज न मिलने पर उन्होंने एक ऑटो किया और फिर स्टार हॉस्पिटल पहुंच गए. इसके बाद घरवाले और पुलिस अस्पताल पहुंचे. अस्पताल में पता चला कि काश़िफ को तीन गोलियां लगी हैं, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.
Brother of Kafeel Khan, shot thrice today around 10.15pm.
Khan is accused in Gorakhpur tragedy last year where about 24 children died over 3 nights when liquid oxygen ran out at gov hospital.
Video of brother: pic.twitter.com/86n6kwHKN2
— Anoo Bhuyan (@AnooBhu) June 10, 2018
भाई को गोली लगने की खबर सुनकर अस्पताल पहुंचे डॉ. कफील ने कहा-
''मेरे भाई को तीन गोलियां मारी गई हैं. उसकी हत्या करने की कोशिश की गई है. वह अस्पताल में भर्ती है. मैंने हमेशा से कहा था कि वो हमें मारने की कोशिश करेंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस गोरखनाथ मंदिर में सो रहे थे, उससे महज 500 मीटर की दूरी पर वारदात हुई है.''सुनिए डॉक्टर कफील ने क्या कहा-
हमलावर तो रफ्फूचक्कर हो गए लेकिन Police ने घायल को मारने हेतु
गोरखपुर: कानून के राज में जानलेवा हमला कर हमलावर तो रफ्फूचक्कर हो गए लेकिन #Uppolice ने घायल काशिफ खान को मारने हेतु क्या क्या कारनामा किया, पीड़ित के भाई डॉ.कफील खान की जुबानी सुनिए...... #काकावाणी (अली सोहराब)
Posted by ALI SOHRAB
on Sunday, 10 June 2018

डॉक्टर कफील ने जेल में रहने के दौरान 11 पन्नों का लेटर लिखा था, जिसे उनकी पत्नी ने मीडिया में इसे जारी किया था.
बीआरडी अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद यूपी एसटीएफ ने डॉ. कफील को गिरफ्तार किया था. जेल में रहने के दौरान कफील ने खुद पर और अपने परिवार पर हमले की आशंका जताई थी. डॉ. कफील ने जेल से ही 10 पन्नों का एक खत लिखा था, जिसमें कहा गया था कि प्रशासन की नाकामी छुपाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है. ये पत्र 18 अप्रैल को लिखा गया था, जिससे उनकी पत्नी शबिस्ता ने मीडिया में भी जारी किया था. इस पत्र में कफील ने लिखा था कि 3 अगस्त की सुबह योगी महाराज अस्पताल में मुझसे मिले थे और कहा था कि सिलिंडर का इंतजाम कर लेने से आपको लग रहा कि आप हीरो बन जाएंगे? मैं इसे देखता हूं. कफील ने लिखा था कि सीएम योगी को लग रहा था कि मेरी वजह से ये मामला मीडिया में गया है. इसके बाद तो मेरे परिवार को तंग किया जाने लगा. पुलिस घर आने लगी. मुझे धमकी दी जाने लगी. मेरा परिवार इन सब बातों से डर गया था. परिवार को बचाने के लिए मैंने सरेंडर कर दिया था.
कहीं जमीन का विवाद तो वजह नहीं!

गोरखपुर में डॉ. कफील का अपना अस्पताल भी है. (फोटो : Indian Express)
डॉक्टर कफील के भाई काश़िफ को गोली लगने के बाद ये सवाल स्थानीय मीडिया में जोर-शोर से तैर रहा है. बताया जा रहा है कि काश़िफ के परिवार का गोरखपुर में कई लोगों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है. काश़िफ के एक रिश्तेदार ने बीजेपी के एक सांसद पर जमीन हड़पने का भी आरोप लगाया था. हिंदुस्तान अखबार के मुताबिक 10 जून को ही डॉक्टर कफील ने रुस्तमपुर की एक प्रापर्टी बेचने के लिए सोशल मीडिया और डॉक्टरों के कई ग्रुप में मैसेज भी भेजा था. उन्होंने लिखा था कि जगदीश हॉस्पिटल के बगल में 2200 स्क्वॉयर फीट में बना तीन मंजिला मकान उनका है, जिसे वो बेचना चाहते हैं. इसकी वजह बताते हुए कफील ने लिखा था कि जेल में रहने की वजह से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है और इसलिए वो अपनी प्रॉपर्टी बेचना चाहते हैं.
पुलिस भी उठा रही सवाल
गोलीकांड की सूचना पर सीओ क्राइम प्रवीण सिंह और कोतवाल घनश्याम तिवारी पहले मौके पर पहुंचे. उसके बाद दोनों पुलिस अधिकारी अस्पताल गए. पूछताछ के बाद पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम पर शक जाहिर किया है. पुलिस के मुताबिक अगर हमलावरों को मारना ही था, तो तीन गोलियां छूकर कैसे निकल गईं. जेपी हॉस्पिटल के पास भीड़ रहती है, ऐसे में हमलावर आराम से कैसे भाग गए. इसके अलावा पुलिस इस बात को लेकर भी शक की निगाह से देख रही है कि गोली लगने के बाद काश़िफ ने खुद से ऑटो किया और बैठकर अस्पताल आ गए.
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